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ये SMART CITY की सड़क है, जो पहले रिजेक्ट हुई थी, अब पास हो गई | JABALPUR NEWS

जबलपुर। स्मार्ट सिटी के नाम पर क्या कुछ नहीं हो रहा है। शारदा चौक से शारदा मंदिर तक की सीसी रोड गड़बड़ी का मौजूदा प्रमाण है। इस सड़क को पहले रिजेक्ट कर दिया गया था फिर नियम विरुद्ध कोर कटिंग हुई और इसे पास कर दिया गया। सड़क को अधूरा छोड़ दिया गया है। इसके पीछे क्या खेल है आने वाला वक्त ही बताएगा। 

मामला 2 करोड़ 31 लाख रुपए से बन रही शारदा चौक से शारदा मंदिर तक की सीसी रोड का है, जिसे भोपाल से आई टीम ने रिजेक्ट कर दिया था। इसे पास करवाने के लिए स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने 3 बार की जगह 9 बार रोड की कोर कटिंग करवा दी और येन-केन प्रकारेण इस रोड को पास करवा भी लिया है। मौके पर जाकर देखने पर पता चला कि इस रोड का काम करीब महीने भर से बंद है। जितना हिस्सा बनाया गया है वहां से बनी हुई रोड से सीमेंट छूटने लगी है और गड्ढे होने लगे हैं। इस रोड के साथ ही नाली निर्माण भी होना है जिसका कुछ हिस्सा बनाया गया है। नाली निर्माण भी गुणवत्ताहीन तरीके से किया जाने के कारण इसके हिस्से टूटने लगे हैं। इसकी फिनिशिंग भी नहीं की गई है। 

ऐसे हुई रोड रिजेक्ट, और ऐसे हो गई पास 

स्मार्ट सिटी से होने वाले निर्माण हों या अन्य कोई भी, सभी में गुणवत्ता का पालन अनिवार्य है। इस सड़क को 2 करोड़ 31 लाख रुपए से तैयार करवाया जा रहा है जिसमें दोनों ओर नाली निर्माण भी होना है। भोपाल से आई क्वालिटी कंट्रोल टीम ने आकर स्मार्ट सिटी के कामों का निरीक्षण किया और इसमें शारदा चौक से शारदा मंदिर तक बनने वाली रोड भी शामिल थी। इस रोड को उन्होंने रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद इस टीम से इस रोड को येन-केन प्रकारेण पास करवाने के लिए स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने रोड की 9 बार कोर कटिंग करवा डाली जबकि नियम केवल 3 बार का है। मजे की बात तो यह है कि 9 बार कराई गई कोर कटिंग में से 7 बार की कोर कटिंग 100 प्रतिशत पास भी हो गई। 2 कोर कटिंग में थोड़ा संदेह था मगर बाद में वे भी पास हो गई।

ठेकेदार को थमाए गए 2 नोटिस

नाला निर्माण में हुई गड़बड़ी को लेकर ठेकेदार को स्मार्ट सिटी प्रबंधन 2 बार नोटिस दे चुका है मगर नाला निर्माण में सुधार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है। सड़क का भी यही हाल है चंद महीने पहले बनी रोड का हिस्सा ऐसे नजर आता है जैसे बरसों पहले बनी हो।

महीने भर से बंद है काम 

इस रोड का काम करीब महीने भर से बंद है। ठेकेदार का कहना है कि स्थानीय जन काम नहीं करने दे रहे हैं। वहीं यहां के टाल संचालक अपने ट्रेक्टर नई बनी रोड से निकालने लगे हैं। बताया जाता है कि बारिश रुकने के बाद ही यहां पर काम चालू किया जाएगा।

..तो क्या करते हैं इंजीनियर

स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों से जब भी संपर्क का प्रयास किया जाता है तो पता चलता है कि वे फील्ड पर हैं। यदि वे फील्ड पर हैं तो आखिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता क्यों खराब हो रही है। ठेकेदार वही काम करेगा जो इंजीनियर निर्देशित करते हैं। साफ है कि घटिया गुणवत्ता के पीछे कहीं न कहीं से इंजीनियरों का रोल होता है।