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शिवराज सिंह की डेयरी के लिए सरकारी खजाने से सड़क और पुल बनाया ? | MP NEWS

भोपाल। पुत्र मोह में अंधे होने की कहानी में सिर्फ कैलाश विजयवर्गीय ही किरदार नहीं हैं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी कुछ ऐसा ही करते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के युवराज कार्तिकेय सिंह के आने जाने के लिए सरकारी खजाने से सड़क और पुल बनाया गया। जिस मामले का विधानसभा में भी जिक्र आया परंतु बस जिक्र के लिए ही जिक्र आया। 

नरोत्तम को चुप कराने सुंदर डेयरी का नाम लिया!

विधानसभा में मंत्रियों के बंगलों पर हुए खर्च की चर्चा के दौरान विदिशा से कांग्रेस विधायक शशांक भार्गव ने धीरे से सुंदर डेयरी का जिक्र किया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों के बंगलों पर सवाल उठाए थे। इस दौरान विदिशा विधायक बोले कि विदिशा में एक सुंदर डेयरी है। उसका रोड बनाने और पुल बनाने के लिए कितने करोड़ खर्च किए गए। यह व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति को जाने के लिए की गई। इस सवाल का उद्देश्य सदन में सवाल उठा रहे नरोत्तम मिश्रा को चुप कराना मात्र था। 

कुणाल के एडमिशन के लिए सरकारी विदेश यात्रा की थी ?

कहा तो यह भी जाता है कि तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने छोटे बेटे कुणाल सिंह चौहान के एडमिशन के लिए पहले कुछ विशेष नौकरशाहों को सरकारी खर्चे पर विदेशी निवेश के बहाने विदेश भेजा था, फिर खुद भी गए थे। अपने बेटे से मिलने के​ लिए भी जब शिवराज सिंह गए तो सरकारी खजाने से यात्रा की। दस्तावेजों में दर्ज है कि वो विदेशी निवेशकों से मिलने गए थे। 

डेयरी को लोन पर भी सवाल उठा था

विदिशा में स्थित जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित जिसका आईएफएस कोड CBIN0MPDCBM है। ने सुंदर डेयरी को 7.50 करोड़ रुपए का लोन दिया है। इस लोन पर भी सवाल उठे थे। आरोप लगाए गए थे कि बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय प्रकाश सिंह एवं फील्ड आपरेशन मैनेजर सत्यप्रकाश आर्य द्वारा अपने पद का दुरूपयोग कर सुन्दर डेयरी फार्म, डोलखेड़ी को नियमों, प्रावधानों के विपरीत जाकर परियोजना ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण के रूप में लगभग 7 करोड़ 51 लाख 31 हजार रूपये की राशि डेयरी संचालन हेतु दिनांक 10 मार्च 2017 को स्वीकृत कर दिया गया। सुन्दर डेयरी के अलावा विदिशा जिले की ही यशदीप एजुकेशन सोसायटी, नेशनल कैप्सूल प्रायवेट लिमिटेड, सोहागमल जैन शिक्षण समिति को भी परियोजना ऋण भारतीय रिजर्ब बैंक आफ इंडिया एवं नावार्ड की गाइडलाइन के विपरीत स्वीकृत कर अनुचित रूप से लाभ पहुंचाया गया। इस आरोप की जांच हुई या नहीं, फिल्हाल पता नहीं चल पाया है।