HOME GUARD को समान काम समान भुगतान दिया जाए: सुप्रीम कोर्ट | SUPREME COURT DECISION

माला दीक्षित/नई दिल्ली। पुलिस के सिपाही की तरह काम में लगे, लेकिन वेतन में पीछे रहने वाले उत्तर प्रदेश के करीब 87000 होमगार्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खुशखबरी आयी है। उत्तर प्रदेश के होमगार्ड को पुलिस के सिपाही के न्यूनतम वेतन के बराबर रोजाना भत्ता मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका खारिज करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। अब जबकि उत्तरप्रदेश के लिए यह फैसला आ गया है तो देश के दूसरे राज्यों की सरकार भी या तो इसे अपने आप लागू कर देंगी या फिर होमगार्ड सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर अपना हक हासिल कर लेंगे। 

उत्तर प्रदेश में फिलहाल करीब 92000 होमगार्ड हैं जिसमें से करीब 87000 अभी ड्यूटी कर रहे हैं। नियम के मुताबिक होमगार्ड को अभी रोजाना काम के हिसाब से रोजाना भत्ते के रूप में 500 रुपये मिलते हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सिपाही के न्यूनतम वेतन के अनुसार होमगार्ड को रोजाना भत्ता दिया जाएगा। इस हिसाब से एक होमगार्ड का रोजाना भत्ता बढ़कर करीब 672 रुपये हो जाएगा। इसका लाभ ड्यूटी कर रहे 87000 होमगार्ड को मिलेगा।

होमगार्ड को मिलने वाले वेतन को रोजाना भत्ता कहा जाता क्योंकि उन्होंने जितने दिन काम किया होता है उसी हिसाब से प्रतिदिन का पैसा मिलता है। सुप्रीम कोर्ट से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ और खंडपीठ दोनों ने यही आदेश दिया था। प्रदेश सरकार ने खंडपीठ के 6 दिसंबर 2016 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदेश सरकार की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि पुलिस के सिपाही को जो न्यूनतम वेतन प्रतिदिन का मिलता हो उसी हिसाब से होमगार्ड को भी रोजाना भत्ता दिया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान जब प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार, एडीशनल एडवोकेट जनरल एश्वर्या भाटी और पैनल वकील अंकुर प्रकाश की ओर से हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए पुलिस और होमगार्ड की भर्ती और योग्यता में अंतर गिनाए गए तो कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कानून के मुताबिक इनकी भर्ती सिर्फ आपात समय में काम कराने के लिए हुई थी, लेकिन जब इनसे लगातार पुलिस का काम लिया जा रहा है तो उन्हें वैसा ही भत्ता मिलना चाहिए।

रंजीत कुमार का कहना था कि होमगार्ड की भर्ती पुलिस की तरह नहीं होती न ही उनकी पुलिस जैसी ट्रेनिंग होती है। उनकी शैक्षणिक योग्यता भी पुलिस की नहीं होती। इसके अलावा राज्य सरकार का यह भी कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश से राज्य सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

दूसरी ओर सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए होमगार्ड के वकील जयंत भूषण की दलील थी कि होमगार्ड और पुलिस मे जो अंतर था उसे सरकार ने स्वयं खतम कर दिया है। सरकार उनसे लगातार पुलिस जैसा काम करा रही है और इस हिसाब से हाईकोर्ट का आदेश बिल्कुल सही है।