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अतिशेष शिक्षक निर्धारण के लिए डीपीआई की नीति ही गलत है | ATISHESH SHIKSHAK DPI POLICY

श्रीमान मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूं कि वर्तमान में स्कूल शिक्षा विभाग में अतिशेष शिक्षकों के निर्धारण की प्रक्रिया समस्त जिलों में चल रही है जिसके लिए जिले स्तरों पर समितियां बनाई गई हैं। डीपीआई ने अतिशेष शिक्षक के निर्धारण हेतु एक आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि स्वीकृत पद से अधिक शिक्षक होने पर या एक ही विषय के एक से अधिक शिक्षक होने पर अतिशेष शिक्षक का निर्धारण शिक्षक की नियुक्ति दिनांक से किया जाए तथा जिसकी नियुक्ति दिनांक सबसे बाद की हो उसे अतिशेष माना जाए। 

इस आदेश को जारी करते समय शिक्षकों की पदोन्नति की दशा का ध्यान नहीं रखा गया। यदि एक यूडीटी या अध्यापक की नियुक्ति सहायक शिक्षक या सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी और बाद में वह पदोन्नत होकर दूसरे विद्यालय में पहुंचा है तो फिर उसकी वर्तमान पद पर नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का निर्धारण होना चाहिए। पदोन्नति में भी इसी नियम का पालन किया जाता है। परंतु हो इसका उल्टा रहा है 2001 के सहायक अध्यापक को 2003 के अद्यापक से वरिष्ठ माना जा रहा है जबकि वो सहायक अध्यापक 2013 में अध्यापक बना है अगर यह नियम सही है तो फिर 1998 का सहायक अध्यापक जो बाद में 2012 में अध्यापक बना हो अगली पदोन्नति सूची में भी उसको सबसे वरिष्ठ मानते हुए उसको दोबारा पदोन्नति क्यों नहीं दे देते, तब क्यों उसके वर्तमान पद से वरिष्ठता का निर्धारण करते हैं।

इस बात पर जब आपत्ति जताई जा रही है तो समिति का कहना है आदेश में नियुक्ति दिनांक शब्द है इसलिए निर्धारण तो प्रथम नियुक्ति दिनांक से ही होगा। जिलों में आपत्तियां लेने का कोई प्राबधान नहीं रखा गया है। इस स्थिति में पीड़ित शिक्षक वर्ग किस से गुहार लगाये।

आपके माध्यम से मैं डी पी आई आयुक्त से निवेदन करना चाहता हूं कृपया इस संबंध में मार्गदर्शन का पत्र जारी करें ताकि हज़ारों शिक्षक जो गलत तरीक़े से अतिशेष होने जा रहे हैं वे इससे बच सकें।
(पत्र लेखक ने नाम गोपनीय रखने का आग्रह किया है)