शिक्षक तो अब भी अटैच हैं, कमिश्नर का आदेश किसी ने नहीं माना | MP SHIKSHA VIBHAG NEWS

मंडला। मध्यप्रदेश शासन के पत्र क्रमांक एफ 4- 25/2008/1/25 दिनांक 08 अप्रैल 2008 के द्वारा संलग्नीकरण पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बाद भी शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग में व्याख्याताओं तथा शिक्षकों का अटैचमेंट और डेपुटेशन बदस्तूर जारी है। मंडला जिला में प्राचार्य, व्याख्याता और शिक्षकों के अनेकों पद खाली पड़े हैं। ग्रामीण सुदूर क्षेत्रों में तो और हालत खराब है, इन क्षेत्रों में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों के अतिथि शिक्षक भी नही मिलते हैं। 

स्थानांतरण का एक नया तरीका भी ईजाद कर लिया गया है। जैसे पहले संलग्न कर दो फिर धीरे से एलपीसी जारी कर दो। कुछ तो सस्पेंड वाला तरीका अपनाते है, कुछ दिनों के लिए सस्पेंड हो जाओ फिर मनचाही जगह में पदस्थाना कराकर बहाल हो जाओ। वर्तमान में स्कूल संचालित हो गए हैं, अतिथि शिक्षकों की भर्ती नही हुई है। लगता है इन सभी बातों पर गौर करते हुए जयश्री कियावत, आयुक्त लोक शिक्षण मध्यप्रदेश ने 21 जून 2019 को परिपत्र जारी कर जिला शिक्षा अधिकारियों को 24 जून के पूर्व गैर शैक्षणिक कार्य मे संलग्न शिक्षकों को उनकी मूल संस्था में पदस्थ करने के निर्देश दिए गए हैं। 

पत्र में यह भी लिखा गया है कि निर्वाचन के नाम पर अथवा अन्य प्रयोजनों से  शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य मे सम्बद्ध रखे जाने पर संबंधित जिला शिक्षा के विरुद्ध कार्यवाही भी हो सकती है।इसी प्रकार के आशय का एक परिपत्र दीपाली रस्तोगी ,आयुक्त आदिवासी विकास मध्यप्रदेश द्वारा भी 26 जून 2019 को जारी करते हुए कलेक्टरों निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी व्याख्याता, शिक्षक शैक्षणिक कार्य के अतिरिक्त न तो कहीं संलग्न रहेंगें और न ही कोई गैर शैक्षणिक कार्य करेंगें।शासन के आदेश के बावजूद कई व्याख्याता, शिक्षक अन्य स्थान,विभाग, अन्य दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पद पर भेजे गए हैं।

उन सभी की सेवाएं हटाकर उन्हें शैक्षणिक कार्य मे लगाया जाए।निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के लिए लिखा गया है साथ ही संबंधित नियंत्रणकर्ता अधिकारी के ऊपर जवाबदेही निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय हैं कि मंडला जिला में भी बहुत से व्याख्याता,शिक्षक यहां-वहां संलग्न और प्रतिनियुक्ति पर है। पर न तो जिला शिक्षा अधिकारी, न तो सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग और न ही कलेक्टर मंडला शासन के आदेशों को गंभीरता से ले रहे है। ऐसे में मंडला जैसे आदिवासी जिला की शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी। जनप्रतिनिधियों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।