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MP NEWS: सब इंस्पेक्टर भागीरथ की मौत कई सवाल कर रही है

भोपाल। क्या कोई पुलिस अधिकारी इसलिए सुसाइड कर सकता है कि उसे कंप्यूटर चलाना नहीं आता या कंप्यूटर में उसे एक SOFTWARE की जानकारी नहीं है। झाबुआ पुलिस के दावे को सच मानें तो झकनावदा पुलिस चौकी के प्रभारी सब इंस्पेक्टर भागीरथ बघेल ने इसलिए आत्महत्या की थी क्योंकि उन्हे CCTNS सिस्टम की जानकारी नहीं थी। यहां याद दिला दें कि मप्र पुलिस में सब इंस्पेक्टर की भर्ती अपराधियों को पकड़ने की लिए की जाती है, CCTNS सिस्टम चलाने के लिए नहीं।

झाबुआ पुलिस का दावा

झाबुआ पुलिस ने दावा किया है कि झकनावदा में पदस्थ चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भागीरथ बघेल उम्र 48 साल के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने खुद लिखा है कि पुलिस के कम्प्यूटराइज्ड सीसीटीएनएस सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं होने काे आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि मैं अपनी नौकरी में सीसीटीवी- सीसीटीएनएस का कार्य नहीं जानता था, जिससे हर समय परेशान रहता था। मैं परिवार और विभाग को धोखा दे रहा हूं। मुझे किसी से कोई तकलीफ नहीं है।

घटना का विवरण

आत्महत्या का पता तब चला जब रोज की तरह चौकी स्टाफ वाले चौकी प्रभारी के लिए चाय बनाकर उनके निजी कमरे पर ले गए। बघेल को आवाज दी लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। इसके बाद खिड़की से देखा तो बघेल फंदे पर झूलते पाए गए। इसकी सूचना एसपी विनीत जैन को दी गई। बघेल ग्राम ठान जिला बड़वानी के रहने वाले थे। उनका परिवार फिलहाल खरगोन में हैं।

सीसीटीएनएस सिस्टम क्या है 

सीसीटीएनएस एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर है। इसके तहत ऑनलाइन एफआईआर दर्ज होतीं हैं। मप्र पुलिस में इसे अनिवार्य किया गया है परंतु इसे चलाने के लिए आरक्षक या हेड कांस्टेबल होते हैं। पुलिस चौकी पर सीसीटीएनएस से काम ही नहीं होता। चौकी वाले डायरी थाने पर ले जाते हैं और वहां ऑपरेटर द्वारा एंट्री की जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि जरूरी नहीं है कि हर एसआई को थाना प्रभारी ही बनाया जाए। बड़े थानों में एसआई, मैदानी काम संभालते हैं। टीआई थाने का प्राधिकृत अधिकारी होता है। पुलिस विभाग में ऐसे बहुत सारे काम हैं जिसमें कंप्यूटर की जरूरत नहीं होती।

अब यह रहस्यमयी मौत है

इस तरह के सुसाइड नोट के सामने आने के बाद यह मौत रहस्यमयी हो गई है। सुसाइड नोट की हेंडराइटिंग जांच करानी चाहिए। इसके अलावा यह पता जरूर लगाया जाना चाहिए कि कहीं सब इंस्पेक्टर भागीरथ बघेल विभागीय प्रताड़ना का शिकार तो नहीं थे। सुसाइड नोट में एक लाइन लिखी है 'मुझे किसी से कोई तकलीफ नहीं है।' यह लाइन अपने आप में गवाही दे रही है कि या तो यह सुसाइड नोट भागीरथ ने नहीं लिखा या फिर उनसे लिखवाया गया है।