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GOOD NEWS: पूरे मध्यप्रदेश में प्रॉपर्टी 20% सस्ती | PROPERTY RATE 20% DOWN IN MP STATE

भोपाल। मंगलवार की शुरूआत मंगलकारी खबर से हो रही है। पूरे प्रदेश में प्रॉपर्टी के दाम घटा 20 प्रतिशत दिए गए हैं। यह एक बड़ी राहत है। अब प्रॉपर्टी का कारोबार सटोरियों और खाईबाजों से मुक्त हो जाएगा और असली खरीददार व विक्रेता के बीच संबंध स्थापित होंगे। भोपाल में केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक लगातार साढ़े छह घंटे तक चली और उसके बाद यह फैसला लिया गया। 

नई दरें 1 जुलाई से लागू, 

केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में कुछ चुनिंदा जगहों पर कलेक्टर गाइडलाइन (बाजार दर) बढ़ाने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। बैठक के बाद वाणिज्यिक कर मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर ने अफसरों को निर्देश दिए कि कलेक्टर गाइडलाइन में प्रॉपर्टी की दरें 20 फीसदी कम करने के कैबिनेट के फैसले को भी एक जुलाई से लागू किया जाए। यह फैसला जनता के हित में है, इसलिए इसे जल्द लागू किया जाए। 

प्रॉपर्टी कारोबार ठंडा हो गया था

गौरतलब है कि 19 जून को रियल एस्टेट को मंदी से उबारने के लिए कैबिनेट ने प्रदेश में प्रॉपर्टी की कीमतें 20 फीसदी तक घटाने का फैसला लिया था। तर्क दिया था कि इस फैसले से सरकार को हर साल 1 हजार करोड़ का राजस्व मिलेगा और रजिस्ट्रियों की संख्या 20 से 30 फीसदी तक बढ़ जाएगी। इस फैसले के बाद भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर सहित 20 जिलों ने चुनिंदा इलाकों में प्रॉपर्टी के दाम 5 से लेकर 50 फीसदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे मंत्री ने खारिज करते हुए कैबिनेट के फैसले काे लागू करने के निर्देश अफसरों को दिए हैं। 

सरकार ने जनता के हित में फैसला लिया है, वो ही लागू होगा 

सरकार ने 20 फीसदी प्रॉपर्टी की कीमतें घटाने का फैसला लिया है। इसे लागू किया जाएगा। अफसरों की बैठक से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कीमतें कम होने से प्रदेश के लोगों को प्रॉपर्टी खरीदने में आसानी होगी। 
बृजेंद्र सिंह राठौर, मंत्री वाणिज्यिक कर 

अफसर बार-बार दाम बढ़ाने के तर्क देते रहे 

बैठक में आईजी पंजीयन एवं मुद्रांक अमित राठौर ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के जिला पंजीयकों से दाम बढ़ाने की वजह जानी। पंजीयकों ने कहा कि वर्तमान गाइडलाइन से ज्यादा रजिस्टर्ड हुए दस्तावेजों की संख्या बढ़ी है। इसलिए इन चुनिंदा इलाकों में कीमतें बढ़ाई जाएं। हालांकि बोर्ड ने इन तर्कों को दाम बढ़ाने के लिए उचित नहीं माना।