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CRYPTOCURRENCY से करोड़पति बनाने का लालच देकर 100 करोड़ की ठगी, JABALPUR से दंपत्ति गिरफ्तार

भोपाल। दुनिया की सबसे महंगी मुद्रा BITCOIN, जिसका कोई ठोस आधार ही नहीं है, और ऐसी ही तमाम मुद्राओं को CRYPTOCURRENCY कहते हैं। शेयर बाजार की तरह इन 'क्रिप्टो करेंसी' का भी एक बाजार होता है जहां ये मुद्राएं खरीदी और बेची जातीं हैं। इन मुद्राओं को करोड़पति बनने का शॉर्टकट कहा जाता है। इसी अवैध कारोबार के एक रैकेट का खुलासा हुआ है। मप्र पुलिस ने जबलपुर से एक दंपत्ति को गिरफ्तार किया है जो आभाषी मुद्रा का फर्जी कारोबार कर रहे थे। जबलपुर गिरफ्तार हुई महिला का मायका है।

CRYPTOCURRENCY: 50 करोड़ से ज्यादा की ठगी का अनुमान

मध्य प्रदेश एसटीएफ ने प्रतिबंधित मुद्रा 'क्रिप्टो करेंसी' का कारोबार कर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सरगना को उसकी पत्नी के साथ जबलपुर से गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं। एसटीएफ का अनुमान है कि ये गिरोह करीब 50 करोड़ से अधिक की ठगी कर चुका है। गिरोह के तार हांगकांग, चीन, मलेशिया और थाइलेंड से जुड़े हुए हैं। खास बात ये है कि गिरोह के सरगना डिप्लोमा धारी और एयरकंडीशनर के टेक्नीशियन हैं। इन्होंने ठगी की रकम को फिल्मों में भी निवेश किया है। 

HONG KONG STOCK EXCHANGE की फर्जी वेबसाइट बनाई

मंगलवार को भोपाल में आयोजित पत्रकारवार्ता में विशेष पुलिस महानिदेशक एसटीएफ पुरूषोत्तम शर्मा ने बताया कि आरोपियों ने लोगों को ठगने के लिए हांगकांग के शेयर बाजार की एक वेबसाइट भारत में बनाई। इसका सर्वर जयपुर में लगाया। देखने में ये वेबसाइट बिलकुल हांगकांग के शेयर बाजार की तरह ही लगती थी। लोग भ्रमित होकर इस वेबसाइट को हांगकांग के शेयर बाजार की समझ क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने लगे।

BRAJESH RAIKWAR व SEEMA दिल्ली से ठगी के कारोबार चलाते थे

भोपाल के भी एक शख्स ने इस फर्जी साइट के जरिए क्रिप्टो करेंसी में लाखों रुपए निवेश किया। लेकिन जब उसने क्रिप्टो करेंसी को बेचने के लिए एप्लाई किया तो ऐसी नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता ने शिकायत की थी कि पीजीयूसी कंपनी जिसका मुख्यालय हांगकांग में है। क्रिप्टो करेंसी की खरीदी बिक्री कर रही है। एसटीएफ ने आरोपियों के अकाउंट से तीन करोड़ रूपए ठगी की रकम के लेनदेन का पता चला है। ठगी के इस कारोबार को दिल्ली से बृजेश रायकवार व उसकी पत्नी सीमा और साथियों के साथ में अंजाम दिया करता था।

रातों रात करोड़पति बनने का लालच देते थे

आरोपी प्रतिबंधित मुद्रा में इंवेस्टमेंट करने के नाम पर रकम दो गुनी करने का झांसा दिया करते थे। पुलिस दोनों जालसाजों की निशानदेही पर उनके साथियों की तलाश कर रही है। गिरोह के तार हांगकांग तक जुड़े हैं। हमे जानकारी मिली थी कि हांगकंग की कंपनी प्लस गोल्ड यूनियन कॉइन कंपनी क्रिप्टो करेंसी की खरीदी बिक्री कर रही है। भारत में इसके प्रमोटर ब्रजेश रैकवार व रूपेश राय है। इनकी गतिविधियां संदिग्ध है। मध्य प्रदेश पुलिस ने इसकी जांच एसटीएफ के सुपुर्द कर दी।

JABALPUR से हुआ गिरफ्तार: 

दुबई से जब ब्रजेश अपनी सुसराल जबलपुर आया तो एसटीएफ ने उसे हिरासत में ले लिया। उसकी पत्नी के खातों से तीन से चार करोड़ रुपए का हिसाब मिला है। आरोपियों ने पहले अपनी कंपनी बनाई फिर हांगकाग निवासी केविन से दिल्ली की एक होटल में मिले। केविन की मदद से बृजेश और रूपेश ने लोगों को फंसाना शुरू कर दिया। इसके बाद जब इन लोगों की अच्छी खासी कमाई होने लगी तो तीनों मिलकर एक नई कंपनी बनाई। इसके लिए उन्होंने बेंगलुरू की एक साफ्टवेयर कंपनी से साफ्टवेयर तैयार कराया था।

बताया जाता है कि जबलपुर की दंपती ब्रजेश रैकवार और सीमा रैकवार तथा रूपेश राय ने क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से लोगों से निवेश लेने की शुरुआत की। राजीव शर्मा नामक व्यक्ति निवेश के लिए आने वालों को बताया करता था कि मल्टीलेबल मार्केटिंग बिजनेस है और इसके प्रमोटर ब्रजेश व रूपेश राय हैं। राजीव के अलावा रूपेंद्र पाल सिंह, विनीत यादव एसोसिएट्स व पार्टनर हैं। इन लोगों ने हांगकांग के केविन और मलेशिया के डेनियल फ्रांसिस को भी अपने साथ जोड़ा। इसका नेटवर्क चीन और दुबई तक फैला है। हांगकांग की एक कंपनी जो, सी सेक्स एक्सचेंज में पंजीकृत थी, उसके द्वारा निवेशकों को लुभाया।

इन लोगों ने निवेशकों को लाने के लिए मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़, भोपाल, रायपुर, जालंधर, अमृतसर जैसे शहरों में मीटिंग कीं। मगर 2017-18 में आभास मुद्रा की कीमतें तेजी से गिरीं तो यह कारोबार भी प्रभावित हुआ। दिसंबर 2017 में सी सेक्स एक्सचेंज बंद हो गया तो ब्रजेश-रूपेश और उनके साथियों ने पीजीयूसी (प्लस गोल्ड यूनियन क्वाइन) शुरू किया जिसका जयपुर में सर्वर रखा। वहां से कारोबार चलाया। गिरोह के सरगना जबलपुर के रैकवार पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथी रूपेश राय फरार है।

क्या है क्रिप्टो करेंसी

क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। अमूमन रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं की तरह ही इस मुद्रा का संचालन किसी राज्य, देश, संस्था या सरकार द्वारा नहीं किया जाता। यह एक डिजिटल करेंसी होती है जिसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर इसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है।