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क्या सांप अपनी जहर की थैली गटककर सुसाइड कर सकता है | Can a snake be able to succumb to its poison bag

सांप की कई प्रजातियां होतीं हैं और ज्यादातर प्र​जातियां जहरीली नहीं होतीं। एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि लोग सांप के जहर के कम, दहशत से ज्यादा मर जाते हैं। हम यहां जहरीले सापों की बात कर रहे हैं। यदि दो जहरीले सांप एक दूसरे को डस लें तो क्या वो मर जाएंगे। यदि हां, तो फिर सांप अपने जहर से खुद क्यों नहीं मर जाता। क्या सांप अपनी जहर की थैली यानी विष ग्रंथी खुद गटक कर सुसाइड कर सकता है। 

बिहार राज्य सरकार को सेवाएं दे रहे होम्योपैथिक चिकित्सक कंज कुमार बताते हैं कि जहां तक 2 सापों द्वारा एक दूसरे पर हमला करके मारने का विषय है तो अगर दोनों एक ही प्रजाति के हों तो दोनों पर विष का असर नहीं होगा लेकिन अलग-अलग प्रजाति के हों तो ज्यादा जहर वाला कम जहर वाले को मार सकता है। एक दिन डिस्कवरी चैनल पर साँपों के बारे में बता रहा था जिसमें किंग कोबरा ने दूसरे साँप को अपने विष से अचेत करके निगल लिया, लेकिन जब दो किंग कोबरा लगभग एक ही लम्बाई के आमने सामने हुए तो दोनों ने एक दूसरे पर दांत से हमला नहीं किया बल्कि एक दूसरे को नीचे गिराना का प्रयास कर रहे थे। वाचक बता रहा था कि विष का दोनों पर कोई असर नहीं होगा।

क्या सांप अपने ही जहर से सुसाइड कर सकता है

इनकी विष ग्रंथि में इनका विष इकठ्ठा रहता है इनके खून संचरण से इसका कोई संपर्क नहीं होता। अगर इनके विष को निकाल कर इनके ब्लड सर्कुलेशन में डाला जाए तो अवश्य ही इनपर असर होगा। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि हमारा अमाशय मांस के खाए गए टुकड़े को तो पचा देता है लेकिन अमाशय जो खुद एक मांस का टुकड़ा होता है, बचा रह जाता है क्योंकि अमाशय पर म्यूकस की एक परत रहती है जो इसे गलने से बचाती है। 
यानी उत्तर यह कि सांप के जहर से उसकी हत्या तो की जा सकती है परंतु वो खुद चाहकर भी आत्महत्या नहीं कर सकता। 

क्या सांप भी आत्महत्या करते हैं

एनडीटीवी के पत्रकार चतुरेश तिवारी ने एक अध्ययन के बाद बताया कि निश्चित रूप से आपको भरोसा नहीं हो रहा होगा लेकिन सच यही कि सांप भी आत्महत्या करते हैं। सांप के सुसाइड का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। यह वीडियो यूट्यूब पर अपलोड हुआ था। सांप अपना फन पटककर आत्महत्या कर लेता है। सांपों में इस दशा को सेरेपटिसिड्स कहते हैं जो कि सांपों में होने वाली आम दशा है। जबकि मानव में यह प्रवृत्ति कभी-कभार ही होती है। यह दशा 'सेवेरेंट्स' रसायन के रक्त में मिल जाने की वजह से होती है। इससे तनाव और गुस्सा आता है जिसके परिणामस्वरूप जीव बहुत ही हिंसक व्यवहार करता है।
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