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मलाला: जिसे शांति के लिए नोबेल मिला, पाकिस्तानियों को भारत के खिलाफ भड़काती है | WORLD NEWS

नई दिल्ली। मलाला युसुफ़ज़ई को कौन नहीं जानता। बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता। कहा जाता है कि 13 साल की उम्र में वो आतंकवादियों से भिड़ गई थी। जिसे 2014 में दुनिया का सबसे बड़ा शांति के लिए दिया जाने वाला नोबेल पुरस्कार दिया गया। अब पाकिस्तानियों को भारत के खिलाफ भड़काती है। 

मामला क्या है
बुधवार को बकिंघम पैलेस के पास लंदन मॉल में उद्घाटन समारोह हुआ। टूर्नामेंट में भाग ले रहे सभी देशों के दो-दो प्रतिनिधि समरोह में पहुंचे। भारत की ओर से पूर्व कप्तान अनिल कुंबले और अभिनेता फरहान अख्तर पहुंचे। वहीं, पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व क्रिकेटर अजहर अली और नोबल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने किया। समारोह में सभी प्रतिनिधियों के बीच 60 सेकंड चैलेंज गेम हुआ। इसमें भारतीय टीम 19 रन बनाकर सबसे नीचे रही। इंग्लैंड ने सबसे ज्यादा 74 रन बनाए। पाकिस्तान ने 38 रन बनाए।

इस गेम चैलेंज के बाद मलाला ने बयान दिया: "पाकिस्तान, हमने ठीक-ठाक प्रदर्शन किया। यह खराब नहीं था। हम सातवें स्थान पर रहे। कम से कम भारत की तरह सबसे पीछे तो नहीं रहे।’ सभ्य समाज ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। ट्वीटर पर यूजर्स ने इसे भारत के प्रति घृणा बताया। एक यूजर्स ने लिखा, ‘आपने पाकिस्तान की तारीफ की, जहां आप जा भी नहीं सकतीं। आपने भारत की बेईज्जती बिल्कुल उसी तरह की है जिस तरह कोई ब्रेनवॉश पाकिस्तानी करता है। फिर भी आप भारत में सुरक्षित यात्रा कर सकतीं हैं।’

कौन है मलाला
इसे बच्चों के अधिकारों की कार्यकर्ता कहा जाता है। पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा प्रान्त के स्वात जिले में स्थित मिंगोरा शहर की एक छात्रा है। कहानियां सुनाई जातीं हैं कि 13 साल की उम्र में ही वह तहरीक-ए-तालिबान शासन के अत्याचारों के बारे में छद्म नाम से बीबीसी के लिए ब्लॉगिंग करती थी और इसी ब्लॉग के कारण वो स्वात के लोगों में नायिका बन गयी। अक्टूबर 2012 में, मात्र 14 वर्ष की आयु में एक आतंकवादी हमले में वो घायल हुई और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई। तब से अब तक मलाला को कई पुरस्कार मिले परंतु उसने आतंकवादियों से बच्चों की रक्षा के लिए कोई सफल अभियान संचालित किया, यह जानकारी नहीं मिलती। 

शांति का नोबेल पुरस्कार किसे मिलता है
दुनिया में तबाही का मं​जर दिखाने वाली बारूद 'डायनामाइट' के जनक स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर इस पुरस्कार की शुरूआत की गई। यह शांति के लिए दिया जाता है। यानी ऐसे व्यक्ति को जो हर हाल में, तब भी जब दुनिया में 2 पक्ष या 2 देश युद्ध कर रहे हों, शांति स्थापना के प्रयास करता रहता है।