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सातवें वेतनमान के नाम पर प्राध्यापकों के बीच की बंदरबांट शुरु | JABALPUR NEWS



जबलपुर। जिले के सरकारी कॉलेजों (Government colleges) में प्राध्यापकों (Professors) को दिए जाने वाले सातवें वेतनमान (Seventh pay scale) की बंदरबांट शुरु हो चुकी है। बहुत थोड़ी सी पड़ताल के बाद लगभग सभी सरकारी कॉलेज कटघरे में नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सरकारी कॉलेजों के सीधी भर्ती वाले प्राध्यापकों को सातवें वेतनमान में उस स्तर का लाभ दिया गया, जिसके वे पात्र नहीं हैं। इनमें से कई प्रोफेसर तो दो महीने (मार्च-अप्रैल) का बढ़ा हुआ वेतन भी ले चुके हैं। साल 2016 से इस नए वेतनमान को लागू किया गया है यानी एक प्राध्यापक को 19 से 20 लाख रुपए एरियर्स मिलेगा। हुआ ये है कि कॉलेज प्रबंधन ने सॉफ्टवेयर IFMIS में सीधी भर्ती वाले प्राध्यापकों का नाम भी उन्नयन (विद-आउट ऑप्शन) में दर्ज कर दिया। जिससे वे भी प्राध्यापकों के बराबर के हकदार हो गए, जबकि नियमावली में ऐसा नहीं था।

28 मार्च 2019 को भोपाल से एक पत्र जारी किया गया, जिसमें पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई है कि सीधी भर्ती वाले प्राध्यापकों का वेतन निर्धारण (Salary fixation) कैसे करना है। इस पत्र में कहीं भी उन्नयन (विद-आउट ऑप्शन) का जिक्र नहीं है। लेकिन कॉलेजों ने अपने चहेतों को इस ऑप्शन में रखकर उपकृत किया। कॉलेजों से यदि चूक हुई होती तो वे 28 मार्च के पत्र के बाद अपनी गलती सुधार लेते। लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया। इससे मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्राध्यापक यानी नौकरी के पहले दिन से इसी पद पर कार्यरत हैं। दूसरे हैं सीधी भर्ती वाले प्राध्यापक। ये पहले सहायक प्राध्यापक थे। बाद में जब विभागीय परीक्षा हुई तो उसमें पास होकर वे प्राध्यापक बने। विभागीय स्तर पर इन दोनों को सातवां वेतनमान देने पर भी अलग-अलग नियम हैं, लेकिन जबलपुर संभाग में इसकी अनदेखी हुई।

सातवें वेतनमान के बाद प्राध्यापकों के वेतन में 10 से 12 हजार रुपए का इजाफा आ गया है। एक-दो महाविद्यालय हैं, जहां अपात्र प्राध्यापकों को वेतन भी जारी किया जा चुका है। हालांकि, इसकी शिकायत भोपाल स्तर पर की जा चुकी है। जल्दी ही कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।

वर्जन...
यदि इस तरह की गड़बड़ी हुई तो जांच कराएंगे। दरअसल, सब कुछ सॉफ्टवेयर के जरिए होता है, लेकिन कॉलेज द्वारा गलत जानकारी भरने का सवाल है तो उसे देखा जाएगा।
डॉ.गीता श्रीवास्तव, प्राचार्य, मानकुंवर बाई महाविद्यालय

वर्जन...
सातवें वेतनमान की एक भी प्रक्रिया कॉलेज स्तर पर नहीं होती। अभी तक मेरे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत आएगी तो जांच करवाई