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मप्र में डॉक्टरों की शिकायत पर सुनवाई नहीं होती, 11 माह, 80 शिकायतें, सभी पेंडिंग | MP NEWS

भोपाल। मप्र मेडिकल काउंसिल में डॉक्टरों के खिलाफ जुलाई-2018 से शिकायतों पर सुनवाई नहीं हो रही। इसके कारण 80 शिकायतें पेंडिंग पड़ी है। इसकी वजह यह है कि काउंसिल पहले स्वास्थ्य विभाग के अधीन थी पर 2016 में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन आ गई। बदलाव के बाद काउंसिल के एक्ट में धारा 4 व धारा 29 में काउंसिल के सक्षम अधिकारी के तौर पर संचालक स्वास्थ्य की जगह आयुक्त उच्च शिक्षा किया जाना था, लेकिन धारा 29 में बदलाव नहीं हो पाया। काउंसिल ने तीन डॉक्टर के खिलाफ शिकायत पर कार्रवाई की तो डॉक्टर हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने पिछले साल जुलाई में धारा 29 में बदलाव नहीं होने का हवाला देकर सुनवाई पर रोक लगा दी।

मप्र मेडिकल काउंसिल का गठन 1996 में हुआ था। तब से काउंसिल के एक्ट में सक्षम अधिकारी (चेयरमैन) के तौर पर स्वास्थ्य संचालक दर्ज था। 2016 में काउंसिल स्वास्थ्य विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन आ गई। मप्र शासन ने इसके लिए काउंसिल के एक्ट में बदलाव किया। एक्ट में दो जगह धारा 4 व धारा 29 में सक्षम अधिकारी के तौर पर स्वास्थ्य संचालक की जगह आयुक्त चिकित्सा शिक्षा किया जाना था। धारा 29 में यह संशोधन नहीं हो पाया। पिछले साल ग्वालियर के एक नर्सिंग होम में एक मरीज की मौत के बाद परिजन ने मप्र मेडिकल काउंसिल में शिकायत की थी। परिजन का कहना था कि आईसीयू में कोई एक्सपर्ट डॉक्टर नहीं होने से मरीज की मौत हुई। काउंसिल ने तीन डॉक्टर का एक से तीन महीने तक के लिए काउंसिल से पंजीयन निलंबित कर दिया था। इसके बाद डॉक्टर हाईकोर्ट चले गए। कोर्ट ने कहा कि एक्ट के अनुसार आयुक्त चिकित्सा शिक्षा काउंसिल के चेयरमैन नहीं हैं, फिर कार्रवाई कैसे कर सकते हैं। तभी से सुनवाई बंद है।

ऐसे होती है शिकायत

मप्र मेडिकल काउंसिल में इलाज संबंधी लापरवाही की शिकायत मरीज या परिजन करते हैं। इसके बाद काउंसिल एथिकल कमेटी की बैठक बुलाती है। इसमें अलग-अलग विषय के विशेषज्ञ चिकित्सक रहते हैं। कमेटी डॉक्टर व मरीज दोनों का पक्ष सुनने के बाद फैसला देती है। दोषी पाए जाने पर डॉक्टर का मप्र मेडिकल काउंसिल में पंजीयन निलंबित करने व निरस्त करने की कार्रवाई की जाती है।

केस स्टडी- डॉक्टर ने पेट में कपड़ा छोड़ा, सुनवाई अटकी

भोपाल की रहने वाली फरहा नामक मरीज ने मप्र मेडिकल काउंसिल में शहर के एक डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की है। शिकायत में कहा है कि उन्होंने कोहेफिजा के एक अस्पताल में सीजर डिलेवरी कराई। हफ्ते भर बाद पेट में दर्द हुआ तो डॉक्टर ने कहा पेट में गठान है। दूसरी जगह सोनोग्राफी कराई तो पता चला कि उसी डॉक्टर ने पहली डिलेवरी के दौरान पेट में पट्टी छोड़ दी थी। ऑपरेशन कर पट्टी निकाली गई।

लंबित प्रकरणों को निपटाने के लिए हर 15 दिन में करेंगे सुनवाई

काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सुबोध मिश्रा ने बताया कि केस ज्यादा होने की वजह से अब जल्दी-जल्दी सुनवाई करना होगी। सुनवाई शुरू होने पर महीने में एथिकल कमेटी की कम से कम दो बैठकें करेंगे। जिससे लंबित केसों की सुनवाई जल्द पूरी का जा सके। आमतौर पर एथिकल कमेटी की बैठक दो महीने में एक बार होती है।

जल्द अधिसूचना जारी होगी
धारा 29 में कैबिनेट से बदलाव हो गया है। पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने की वजह से नोटिफिकेशन नहीं हो पाया है। हफ्तेभर के भीतर शासन से अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।
डॉ. सुबोध मिश्रा, रजिस्ट्रार, मप्र फार्मेसी काउंसिल