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सौदान सिंह: एक देशभक्त स्वयंसेवक, जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं | MP NEWS

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी में संगठन मंत्रियों को देवतुल्य माना जाता है। कहा जाता है कि ये ऐसे लोग होते हैं जो अपना जीवन राष्ट्र के नाम समर्पित कर देते हैं। इस लिस्ट में एक नाम सौदान सिंह (SAUDAN SINGH BAGHEL) भी है। भाजपा में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री (RASHTRIYA SAH SANGATHAN MANTRI BJP) हैं। इन दिनों छत्तीसगढ़ का काम देख रहे हैं। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित कागपुर गांव (KAGPUR VILLAGE, VIDISHA, MP) के रहने वाले हैं। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार (CORRUPTION) के गंभीर आरोप लगे हैं। भ्रष्टाचार भी ऐसा कि देखने सुनने वाले चौंक उठें। देश और मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार नई बात नहीं है परंतु जो लोग अपना सर्वस्व राष्ट्र के नाम समर्पित करने का ऐलान करते हों, यदि उनका आचरण भी आदर्श ना रह जाए तो बात नई हो जाती है। 

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित कागपुर गांव की कुल आबादी 2500 है। यहां एक एक तालाब का सौंदंर्यीकरण और गहरीकारण 12 बार किया गया। अलग अलग मदों से इस तालाब पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि तालाब को पता ही नहीं है कि उसका सौंदंर्यीकरण भी हुआ है, क्योंकि वो आज भी उसी हाल में है जैसा कि 2012 में था। कहते हैं कागपुर गांव में सौदान सिंह बघेल की स्थिति किसी जमींदार के जैसी है। पूरे गांव में केवल इनकी ही एक आलीशान कोठी है। इनके खिलाफ कोई आवाज उठाने की हिम्मत नहीं करता। थानेदार और तहसीलदार की तो विसात ही क्या, कागपुर के मामले में कलेक्टर तक इनके कहने पर कलम चलाते हैं। आरटीआई कार्यकर्ता भुवनेश्वर मिश्रा ने हिम्मत जुटाकर इनके खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत की है और तमाम प्रमाण भी सौंपे हैं। 

क्या आरोप हैं सौदान सिंह पर

आप जानकर चौंक जाएंगे कि मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में मात्र 2500 की आबादी वाले इस गांव के विकास के लिए राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यसभा सांसदों ने करोड़ों रुपए की राशि आवंटित की है। इतना ही नहीं केंद्र की अलग-अलग योजनाओं के तहत भी मोटी रकम आवंटित की गई। 
सामुदायिक भवन निर्माण के लिए करीब 2 करोड़ की राशि विभिन्न राज्य सभा सांसदों से आवंटित की गई परंतु सामुदायिक भवन का निर्माण अब तक अधूरा है। 
तालाब के गहरीकरण के लिए सरकारी मद से बड़ी रकम निकाली गई। सरकारी वाहन और मशीनों से तालाब की मिट्टी निकालकर सौदान सिंह की बंजर जमीन पर डाल दी गई ताकि वो उपजाऊ खेत बन जाए। 
सौदान सिंह की पॉवर देखिए कि 2 कलेक्टरों ने 2 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी जबकि वो रूल ऑफ फायनेंशियल पॉवर के विरुद्ध थी। 

गांव में विकास हुआ या नहीं

सौदान सिंह के गांव की आबादी महज 2500 है। यहां का बाजार सालों से बदहाली की स्थिति में है। आज भी पत्थरों के टपरों में हाट बाजार लग रहा है। दस हैक्टयर में फैले तालाब किनारे पिचिंग तक नहीं है। सामुदायिक भवन का निर्माण अधूरा है। गांव के जरूरत के विकास काम आज तक नहीं हुए हैं। सौदान सिंह की कोठी और खेत को छोड़ दें तो कहीं भी अच्छे दिन नजर नहीं आते।