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PRIYANKA GANDHI को यूपी के शिक्षामित्र दिखते हैं, MP के अतिथि शिक्षक नजर नहीं आते क्या | KHULA KHAT

आदरणीय महोदय जी, सादर नमस्‍कार, आज न्‍यूज चैनल पर देखा कि उत्‍तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के शिक्षामित्रों (Shicshamitron) के साथ हो रहा अत्‍याचार प्रियंका बाड्रा (Priyanka Baadra) जी को दिखाई दिया उत्‍तरप्रदेश के शिक्षामित्र जिनको वहॉं की सरकार 10000 प्रतिमाह दे रही है व पात्रता परीक्षा उत्‍तीर्ण (Passing the exams) करने के बाद प्रतिकार्य वर्ष 2.5 अंक अनुभव भारांक अधिकतम 25 अंक 10 वर्ष तक देकर नियमित कर रही है वहीं म.प्र में बाबूलाल गौरजी (Babulal Gaurji) के मुख्‍यमंत्री कार्यकाल में रिक्‍त शिक्षक पदों पर प्रदेश सरकार ने 1000 रू प्रतिमाह के मानदेय में अतिथिशिक्षक (Atithishikshk) नियुक्‍त किए थे फिर 100 रू प्रतिदिन पर कई वर्ष कार्य लिया व अब दुगुना वेतन किया है जो कि दो तीन माह बाद ही मिलता है।

हमारे देश में अभी 545 लोकसभा व 250 राज्‍यसभा सदस्‍य है जो हमारे सेवक बनकर आते है चुनावी समय में जो कि 6 लाख के लगभग प्रतिमाह वेतन भत्‍ते (Salary allowances) पाते है साल का लगभग 72 लाख व जीवन भर पेंशन म.प्र में शिवराजजी ने अतिथिशिक्षक,संविदाकर्मियों पर कई बार झूठी घोषणायें की व उनको वर्षों अल्‍पवेतन में शोषित किया व सत्‍ता में बने रहे कांग्रेस ने भी चुनाव पूर्व अतिथि शिक्षक, अतिथि विद्वान, संविदा कर्मियों के नियमितिकरण संबंधी झूठे वचन दिए व सरकार बनने के तीन माह बाद भी सब बातें ही है धरातल पर कुछ भी नहीं। क्‍या इन नेताओं को जहाँ इनकी सरकार नहीं होती वहीं की परेशानी दिखाई देती है? आखिर क्‍यों प्रियंका व राहुलजी को म.प्र में वर्षों से शोषित हो रहे अतिथिशिक्षकों व अन्‍य कर्मचारियों की परेशानी दिखाई नहीं देती है। 

आज समझ आया की क्‍यों 1948 में बना इस्‍राइल सफल हैं जो 56 विरोधी देशों से घिरा है जबकि 1947 में गुलामी से  आजाद भारत क्‍यों अपनी सुरक्षा के लिए कश्‍मीर में उन लोगों से परेशान  है जिन पर देश का 40 % बजट खर्च होता है फिर भी वो पाक परस्‍त है आखिर क्‍यों 15 कांग्रेस कमेटी के वोट के बाद भी सरदार पटेल प्रधानमंत्री क्‍यों न बन सके क्‍योंकि ये नेता सिर्फ अपना हित देखते हैं हम अपनी शिकायतें परेशानिया प्रेसीडेंट पोर्टल,पीजी पोर्टल से सरकार तक भेजते है वह सब औपचारिकता मात्र है इन नेताओं को जहॉं पर सरकार नहीं होती है वहॉं की परेशानी दिखाई देती है वो भी चुनाव के समय आज ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया, दिग्‍विजय सिंह जी, कमलनाथ जी को अपना अतिथि शिक्षकों से किया गया वचन याद नही है क्‍यों? जबकि जब कांग्रेस विपक्ष में थी तो पूरी सहानुभूति थी अतिथि शिक्षकों से व सत्‍ता में आते  ही अपने सारे वचन भूल गई राजनीति में वही परेशानी नेता देख पाते है जिससे उन्‍हें लाभ हो सब घडि़याली आंसू ही बहाते है जबकि देशहित में कभी किसी सांसद ने खुद के वेतन भत्‍तों व खर्च सुविधाओं में कमी की बात नहीं की है और अन्‍य जनसामान्‍य के कामों में बजट आड़े आता है राजनीति में कोई नागनाथ है तो कोई सॉंपनाथ।

द्वितीय विश्‍व युद्ध में बर्बाद हुआ जापान जो हर वर्ष प्राकृतिक आपदा झेलता फिर भी सफल है इस्‍राइल भी सफल है क्‍योंकि वहॉं के नेताओं में राष्‍ट्रप्रेम व जनसामान्‍य की परेशानियों को हल करने के प्रति दृढ़ इच्‍छा शक्ति है व कर्तव्‍य का आभास भी। जो गरीबी मिटाने की बात करते है युवाओं की बात करते हैै उन मोदी जी के शिवराज मेें भी  अतिथिशिक्षक का बहुुुत अपमान व शोषण हुआ। 
सादर धन्‍यवाद
आपका शुभेच्‍छु
आशीष बिलथरिया