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लाल कृष्ण आडवाणी: पढ़िए क्यों और किस तरह टिकट कटा | NATIONAL NEWS

नई दिल्ली। गुरूवार की रात भारत की राजनीति, कम से कम भाजपा की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम हुआ। जिस व्यक्ति ने भाजपा को 181 सीट तक पहुंचाया। जिस व्यक्ति ने नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री बनाया। उसी व्यक्ति ने लाल कृष्ण आडवाणी का टिकट काट दिया। सूत्र बताते हैं कि नरेंद्र मोदी एवं ​अमित शाह ने काफी कोशिश की कि लाल कृष्ण आडवाणी खुद अन्य नेताओं की तरह चुनाव लड़ने से इंकार कर दें लेकिन आडवाणी ने ऐसा नहीं किया। शायद वो चाहते थे कि तारीख इस बात की गवाह बने कि भाजपा में क्या और कितना बदल गया है। 

सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह काफी समय से गांधीनगर सीट पर उम्मीदवार बदलना चाहते थे। अमित शाह यहां से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, लेकिन भाजपा के संस्थापक, भारतीय राजनीति के सबसे उम्र दराज लाल कृष्ण आडवाणी को दूसरे नेताओं की तरह तो ट्रीट नहीं किया जा सकता था। सूत्र बताते हैं इसके लिए प्रधानमंत्री ने खुद कई बार पहल की। कई बार चर्चा में आडवाणी को संकेत दिया गया कि वो फार्मूला 75 को स्वीकार करते हुए चुनाव लड़ने से इंकार कर दें, लेकिन आडवाणी ने पहले कभी स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिल्ली के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय अधिवेशन तक शीर्ष नेतृत्व यह साहस नहीं जुटा पा रहा था लेकिन ऑपरेशन बालाकोट ने भाजपा नेतृत्व और प्रधानमंत्री को उत्साह से भर दिया। इसके बाद बात बदल गई। अमित शाह और नरेंद्र मोदी के बीच चर्चा हुई। तय किया गया कि गांधीनगर से लाल कृष्ण आडवाणी को प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। सूची जारी करने से पहले आडवाणी को इसकी जानकारी भी दी गई। 

इससे पहले सौदेबाजी भी की गई थी

लाल कृष्ण आडवाणी का इस तरह टिकट काटने से पहले सौदेबाजी भी की गई थी। उनसे पूछा गया था कि वो अपनी पसंद के व्यक्ति का नाम बताएं जिसे लोकसभा का टिकट दिया जाएगा लेकिन नरेंद्र मोदी को अपनी पसंद बताने वाले लाल कृष्ण आडवाणी ने अब किसी भी व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया। फिर उनके सामने प्रस्ताव रखा गया कि वो चाहें तो उनकी बेटी को टिकट दिया जा सकता है परंतु लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि वो वंशवाद की राजनीति का विरोध करते हैं।