दम तोडती युवा स्वाभिमान योजना | EDITORIAL by Rakesh Dubey

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दम तोडती युवा स्वाभिमान योजना | EDITORIAL by Rakesh Dubey

मध्यप्रदेश की  सबसे चर्चित युवा स्वाभिमान योजना दम तोडती नजर आ रही है | मध्यप्रदेश में पंद्रह सालों के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार ने युवाओं को लुभाने के लिए युवा स्वाभिमान योजना लागू की थी|  इसमें युवाओं के लिए सौ दिनों के रोजगार का वादा किया गया था लेकिन आधी अधूरी तैयारियों के साथ लागू की गई ये योजना अब कई लोगों को रास नहीं आ रही है| नतीजा किसी दिन इसकी अकाल मृत्यु होना  है | जल्दबाजी में बनी इस  योजना में इस बात का संतुलन नहीं बिठाया गया कि किस जिले में कौन सा रोजगार उपयुक्त होगा और इस रोजगार सम्भावना के लिए किस विषय का प्रशिक्षण उपयुक्त रहेगा |

बिना किसी अध्ययन के बनाये गये इस कार्यक्रम में सबसे पहले मुख्यमंत्री का जिला छिंदवाडा ही प्रभावित हुआ | यहाँ जो लोग ब्यूटीशियन, टेलरिंग, कॉल सेंटर, वीडियोग्राफी,जैसे का काम का प्रशिक्षण चाहते थे, उन्हें बैंड- बाजा बजाने और जानवर चराने के प्रशिक्षण की पेशकश की गई | इसके बावजूद दरबारी, मुख्यमंत्री को खुश करने के लिए कांग्रेस कमेटी के दफ्तर के सामने आभार प्रदर्शन का ढोल पीटने लगे | छिंदवाडा से प्रशिक्षित लोगों के नाम पर भोपाल जिले के युवाओं से बैंड बजवा दिए गये | ये बैंड बजाने वाले भोपाल में सालों से इसी व्यवसाय में हैं |
     
हकीक़त में हो क्या रहा है? २४ साल के विकास बताते हैं | १२ वीं के बाद गाड़ी चलाना सीखने के लिए आवेदन दिया, एसएमएस भी आ गया लेकिन जिस ट्रेनिंग की चाहत थी वो उनके जिले मौजूद नहीं थी उन्हें सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र भेज दिया गया| आवेदक ऑनलाइन फॉर्म डाला था, ३ ट्रेड डाले थे ऑफिस असिस्सटेंट, ड्राइवर, ऑटोमोबाइल का डाला था कौशल विकास केन्द्र में संपर्क करने पर पता चला कि वहां सिलाई और ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग दी जाती है, आवेदक को वापस लौटना पड़ा|  दूसरा उदहारण कॉन्ट्रैक्ट सुपरवाइजर के लिए आवेदन करने वाली युवती क उसकी तकलीफ भी इससे अलग नहीं है| उसने कॉन्ट्रेक्ट सुपरवाइजर के लिए भरा था उस हिसाब से ट्रेनिंग होनी चाहिए, उसे ब्यूटीशियन और सिलाई सीखने का  आफर मिला | सरकार को इन सब प्रशिक्षण की व्यवस्था  करने के पूर्व एक अध्ययन करना चाहिए था कि कहाँ और किसका प्रशिक्षण हो | जो जल्दबाजी में नहीं किया गया |  सरकार ने लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस  योजना की ताबड़तोड़ शुरूआत  कर दी, शायद इसके लिए जरूरी व्यवस्थाएं करना भूल गई| जहाँ जिस ट्रेड प्रशिक्षण है, वहां के आवेदकों की उस ट्रेड में रूचि है या नहीं।

इस योजना के तहत दो लाख रुपये से कम आय वाले २१ से ३०  वर्ष उम्र के युवाओं को ९०  दिनों के लिए कौशल प्रशिक्षण देने के लिए ९८७०१  सीटें उपलब्ध  हैं, जिसमें सिलाई और ब्यूटीशियन की ही अकेले लगभग ३२०००  सीटे हैं, हार्डवेयर की२१३०० , डेटा एंट्री की १७६७२  योजना में एक साल में १०० दिनों के लिए, ४०००/- रुपये प्रति माह स्‍टाइपेंड पर नगरीय निकायों में अस्‍थाई रोजगार दिया जाना है | जहां काम में ३३ प्रतिशत और प्रशिक्षण में ७० प्रतिशत न्यूनतम उपस्थिति होने ही चाहिए | जो कुछ भी जमीन पर नहीं दिखता है |

इस योजना में मध्यप्रदेश का स्थायी निवासी होने की शर्त भी शामिल है, मकसद था दो साल ५३ प्रतिशत बढ़ी बेरोजगारी का रोकना लेकिन  सोचा कुछ था, किया कुछ और हुआ कुछ  की तर्ज  पर योजना  दम तोडती दिख रही है। आचार संहिता का हवाला देकर अब इसे विलम्बित करने के भी आसार दिख रहे हैं।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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