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यहां महिला की कोख से जन्मे थे शिव, संपत्ति में हिस्सा भी मिला

खरगोन। भगवान 'शिव' का जन्म कहां हुआ था, किसके गर्भ से हुआ था। यदि देश के किसी भी हिस्से में आप यह प्रश्न करेंगे तो विद्वान बताएंगे कि भगवान शिव 'स्वयंभू' हैं, ना तो उनका जन्म किसी गर्भ से हुआ था और ना ही वो मृत्यु को प्राप्त हुए या होंगे परंतु यदि खरगोन में आप यही प्रश्न करेंगे तो लोग बताएंगे सन् 1707 में भगवान शिव का जन्म एक सामान्य महिला के गर्भ से 'नाग' के रूप में हुआ था। शिव की माता का नाम जानकी है और उन्हे संपत्ति में हिस्सा भी दिया गया था। बंटवारे में मिली संपत्ति से ही यहां उनके मंदिर का निर्माण किया गया है। 

मध्यप्रदेश के खरगोन जिला मुख्यालय के भावसार मोहल्ले में स्थित है सिद्धनाथ महादेव मंदिर। यह मंदिर वही संपत्ति है जो भगवान शिव को पुत्रों के बीच हुए संपत्ति बंटवारे में मिली थी। यह देश भर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर बना शिवलिंग नाग देवता की समाधि पर स्थापित है। कहा जाता है कि सन् 1707 में एक महिला ने नौ माह तक गर्भ में धारण कर एक नाग को जन्म दिया था। उनकी नौवीं पीढ़ी के वंशज आज भी जीवित हैं। साथ ही पुजारी भी नौंवी पीढ़ी के हैं।

सिद्धनाथ महादेव मंदिर के इतिहास बताते हुए नौंवी पीढ़ी के वंशज अशोक मल्लीवाल ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण 1707 में उनके पूर्वज पिता और माता जानकी के बेटे यानी भगवान शिव के भाई, शम्भूदयाल ने करवाया था। माता जानकी ने नौ माह गर्भ में रख कर एक नाग को पुत्र के रूप में जन्म दिया, जिनका नाम सिद्धनाथ रखा गया था और इन्हें प्यार से लोग सिद्धू के नाम से पुकारते थे।

नौंवी पीढ़ी के वंशज अशोक मल्लीवाल ने इसके इतिहास के बारे में बताया कि माता जानकी के 3 बेटे ने पुरूष योनि और एक नाग योनि में जन्म लिया था। जब परिवार में बंटवारे की बात आई तो 3 भाइयों के हिस्से किये तो बाबा ने फन हिलाया, जिसके बाद 4 हिस्से किए तब उनके देहावसान के बाद उनके हिस्से की सम्पत्ति से मन्दिर का निर्माण करवाया गया था।

अशोक का कहना है कि रोज शयन आरती के बाद चौसर बिछाई जाती है। तो गोटे बिखरी मिलती है। सिद्धनाथ बाबा और माता जानकी चौसर खेलने आते हैं। साथ यह भी बताया कि उस समय बगोद निवासी गोस्वामी परिवार को पुजारी के रूप में लाए थे। उनकी भी नौवीं पीढ़ी के हरीश गोस्वामी आज भी पुजारी के रूप में है।