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रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए टैक्स बचाने के स्पेशल टिप्स | TIPS

19 January 2019

नई दिल्ली। रिटायरमेंट ( Retirement ) यानी सेवानिवृत्ति एक व्यक्ति के कमाने की उम्र के ख़त्म होने की निशानी मानी जाती है और इस उम्र के बाद एक व्यक्ति यही चाहता है कि वह अपने रिटायरमेंट फंड ( Retirement fund ) का भरपूर लाभ उठा सके और अपनी टैक्स देनदारी को कम कर सके। FIXED INCOME (निश्चित आय) वाले उत्पादों के साथ-साथ मार्केट से जुड़े उत्पादों में सही अनुपात में निवेश करते हुए एक अच्छा Portfolio तैयार करना रिटायर होने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाती है। इस टैक्स सीज़न में, आइए कुछ परेशानी रहित निवेश साधनों पर गौर करते हैं जिनमें निवेश करके आप अपने रिटायरमेंट के लिए एक बड़ी रकम तैयार करने के साथ-साथ टैक्स भी बचा सकते हैं।

सीनियर सिटिजंस सेविंग स्कीम्स / Senior Citizens Savings Schemes (SCSS)

इस स्कीम को ख़ास तौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र के भारतीय नागरिकों के लिए तैयार किया गया है। सुपरएनुएशन (सेवानिवृत्ति) और वोलंटरी रिटायरमेंट (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लेने वाले लोगों के साथ-साथ उन लोगों के लिए भी इस उम्र सीमा में थोड़ी छूट देते हुए इसे 55 साल कर दिया गया है जिनका आवेदन, सेवानिवृत्ति लाभ के उपार्जन के एक महीने के भीतर जमा हो गया है। वरिष्ठ नागरिक किसी भी पदनामित बैंक या किसी ऐसे डाकघर में एक एससीएसएस अकाउंट खुलवा सकते हैं जहाँ इस उत्पाद में निवेश करने की सुविधा मौजूद है।

इस स्कीम में अधिक से अधिक रु.15 लाख तक जमा किया जा सकता है। आम तौर पर, इस स्कीम की समय सीमा पांच साल की होती है लेकिन मैच्योरिटी (परिपक्वता) के बाद इसे और तीन साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। एससीएसएस में किए गए निवेश पर धारा 80C के तहत टैक्स लाभ भी मिलता है। लेकिन, इस पर मिलने वाला ब्याज, लागू टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्सेबल (कर योग्य) होता है।

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट / National Savings Certificate (NSC)

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली एक अन्य फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट स्कीम / Fixed Income Investment Scheme (निश्चित आय निवेश योजना) है। एनएससी में निवेश करने की सुविधा, देश के डाकघरों में मौजूद है और इसमें कोई भी निवेश कर सकता है। इसमें निवेश की समय सीमा पांच साल और इसमें थोड़ा कम जोखिम होता है। इस पर मिलने वाला ब्याज हर साल चक्रवृद्धि की दर से बढ़ता रहता है और संचित होता रहता है।

समय सीमा समाप्त होने पर, निवेशक को निवेश की रकम के साथ-साथ उस पर संचित ब्याज का भुगतान कर दिया जाता है। एनएससी में निवेश की जाने वाली रकम पर कोई सीमा नहीं है। एनएससी में किए जाने वाले निवेश पर धारा 80C के तहत टैक्स लाभ भी मिलता है। चूंकि इसमें ब्याज की रकम को हर साल फिर से निवेश कर दिया जाता है, इसलिए इस पर धारा 80C के तहत एक फ्रेश डिडक्शन (नए कटौती) की सुविधा मिलती है। सिर्फ अंतिम ब्याज की रकम टैक्सेबल (कर योग्य) होती है।

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट / Bank fixed deposit (FD)

बैंक एफडी, रिटायर्ड लोगों के लिए एक अन्य लोकप्रिय INVESTMENT साधन है। निवेश करने में आसानी और निवेश की रकम की सुरक्षा के कारण यह एक आसान निवेश साधन बन गया है। वरिष्ठ नागरिकों को बैंक एफडी पर लगभग 0.5% अधिक ब्याज मिलता है जिससे यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक आकर्षक निवेश साधन बन जाता है। पांच साल की अवधि वाले बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने पर धारा 80C के तहत टैक्स लाभ भी मिलता है। लेकिन, इसमें पांच साल का लॉक-इन पीरियड होता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज / INTREST, टैक्सेबल (कर योग्य) होता है। लेकिन, वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी से 50,000 रुपए तक के ब्याज पर टैक्स नहीं लगता है। सैद्धांतिक रूप से, एक वरिष्ठ नागरिक हर तीन महीने पर 8% की चक्रवृद्धि दर से बढ़ने वाले एफडी में एक साल में 600,000 रुपए निवेश करके लगभग 49,500 रुपए टैक्स-फ्री (कर मुक्त) ब्याज कमा सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम / Health insurance premium

यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स बचाने का एक बहुत बढ़िया तरीका है। कहने की जरूरत नहीं है, अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आने पर यह काफी मददगार साबित होता है क्योंकि अस्पताल का सारा खर्च, बीमा कंपनी द्वारा उठाया जाता है। बड़ी तेजी से बढ़ते हेल्थ केयर खर्च को देखते हुए आपके पोर्टफोलियो में इसका होना बहुत जरूरी है। 

वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में किए जाने वाले निवेश पर धारा 80D के तहत मिलने वाले टैक्स डिडक्शन बेनिफिट को रु.30,000 से बढ़ाकर अब रु. 50,000 कर दिया गया है। इसके अलावा, यदि एक वरिष्ठ नागरिक एक अति वरिष्ठ माता/पिता के प्रीमियम का भुगतान कर रहा है, तो वह रु.50,000 तक की अतिरिक्त छूट पाने के योग्य है।

लेखक आदिल शेट्टी, बैंक बाजार के सीईओ हैं।/ Author Adil Shetty, is the CEO of the bank market 
(उद्घोषणा: ये लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसको निवेश से जुड़ी, वित्तीय या दूसरी सलाह न माना जाए। आप कोई भी फैसला लेने से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।)



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