मध्यप्रदेश में 1 अफसर 1 गाड़ी का फार्मूला लागू, मंत्री भी जद में | MP NEWS

29 January 2019

भोपाल। किसानों की कर्जमाफी में आए 55 हजार करोड़ के खर्च का असर आगामी वित्तीय वर्ष में भी दिखाई देगा। वित्त विभाग ने खर्चों में कटौती मंत्रियों और अफसरों से शुरू कर दी है। अब मंत्री और अफसर एक ही गाड़ी रख सकेंगे, जिनके पास निगम, मंडल या बोर्ड के एक से ज्यादा वाहन हैं, उन्हें वापस करना होगा। यह व्यवस्था सोमवार से तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। बता दें कि ज्यादातर कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत और इनके समकक्ष अधिकारियों के पास 1 से ज्यादा कार होतीं हैं। 1 कार तो इन्हे सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से दी जाती है जिसमें जो इनके परिवार के उपयोग में आती है। दूसरी कार ये किसी विभाग से अटैच करके अपने पास रख लेते हैं। 

इसके साथ ही वित्त विभाग ने सभी विभागों से कहा है कि जैसा कि बीते सालों में प्रस्ताव बजट में शामिल करने के लिए भेज दिए जाते थे। अब ऐसा नहीं चलेगा जो जरूरी जनकल्याण के काम हों, उन्हीं के प्रस्ताव लेखानुदान में शामिल करने के लिए भेजे जाएं। इस साल विधानसभा का 18 से 21 फरवरी तक बजट सत्र बुलाया गया है, जिसमें सरकार अगले पांच महीनों के खर्चे के लिए करीब 70 हजार करोड़ का लेखानुदान लाने जा रही है। सदन में 18 फरवरी को लेखानुदान लाया जाना प्रस्तावित है। इधर, बीते साल से आगामी वित्तीय वर्ष (2019-2020) में केंद्र से जीएसटी की राशि हर महीने 350  करोड़ रुपए ज्यादा मिलने की संभावना है जो करीब 2157 करोड़ रुपए होगी। इससे सरकार को किसानों की कर्जमाफी की राशि की भरपाई करने में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में केंद्र से जीएसटी की राशि हर महीने  1850 करोड़ रुपए मिल रही है, इसमें अभी तक कोई कमी नहीं आई है।

सड़कों के बजट में 2500 करोड़ की कटौती
नई सड़कें जो अति आवश्यक हैं और पुरानी जिनकी मरम्मत की जरूरत है, उनके लिए करीब 5500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है। सड़कों के लिए जरूरत 7500 करोड़ रुपए की है, जिसमें करीब 2500 करोड़ रुपए की कटौती होगी। मार्च तक लोक निर्माण विभाग को सड़कों के लिए 1000 करोड़ रुपए की जरूरत है।

स्थापना व्यय से 5000 करोड़ निकालकर किसानों को
सरकार का स्थापना व्यय लगातार बढ़ रहा है, यह साल भर में करीब 42000 करोड़ रुपए है। इसमें अफसरों और कर्मचारियों के वेतन भत्तों में खर्चा 30 हजार करोड़ के करीब है। इसके अलावा 12 हजार करोड़ रुपए वाहनों, सरकारी दफ्तरों के फर्नीचर और स्टेशनरी पर खर्च होते हैं, इसमें से 5000 करोड़ की कटौती किया जाना है। यह राशि किसानों की कर्जमाफी में समाहित की जाएगी।

पहले लघु एवं सीमांत कृषकों कर्ज चुकाएंगे
किसानों की कर्जमाफी में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत सरकार पहले लघु एवं सीमांत कृषकों के कोऑपरेटिव सोसायटियों से लिए कर्ज को चुकाने जा रही है। सहकारी बैंकों से 12.47 लाख किसानों ने 3236 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। यह राशि 22 फरवरी से किसानों के खातों में जाना शुरू हो जाएगी। मौजूदा वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए सरकार इस राशि को अन्य खर्चों में कटौती कर समाहित करेगी।

जीएसटी की मिलेगी राशि : 
जीएसटी के केंद्र से 2018-19 में मिलने वाली राशि -22,250 करोड़ रुपए (हर महीने 1850 करोड़ रुपए मिल रहे हैं) अगले वित्तीय वर्ष यानी (2019-20) में मिलने वाली अनुमानित राशि - 25890 करोड़ रुपए (1 अप्रैल 2019 से मिलेेंगे 2157 करोड़ रुपए हर महीने)।

अफसर हो या मंत्री एक ही गाड़ी की जरूरत होती है। अभी तक देखने में आया था कि कई विभागों में अफसरों के पास एक से ज्यादा गाड़ियां थी, इससे सरकार का खर्च अनावश्यक बढ़ रहा था, इसमें कटौती की जा रही है। यह कोई वित्तीय संकट नहीं, वित्तीय प्रबंधन है। 
-तरुण भनोत, वित्तमंत्री



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