बुलंदशहर: वो विरोध प्रदर्शन, इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या की साजिश था ? | NATIONAL NEWS

04 December 2018

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में गो हत्या मामले में हुए विरोध प्रदर्शन में अब कुछ नई बातें सामने आ रहीं हैं। संदेह जताया जा रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन न्याय की मांग के लिए नहीं बल्कि इंस्पेक्टर सुबोध मार सिंह की हत्या के लिए साजिश के तहत आयोजित किया गया था। बता दें कि इंस्पेक्टर सुबोध अखलोक केस के जांच अधिकारी थे। उन्होंने कुछ पुख्ता सबूत जुटाए थे जिसके बाद उनका तबादला कर दिया गया था। इंस्पेक्टर सुबोध ने खुद को अखलोक केस में बतौर गवाह नंबर 7 दर्ज कर लिया था। 


क्या हुआ, सिलसिलेवार यहां पढ़िए


ये घटना स्याना थाना क्षेत्र के मऊ गांव से शुरू हुई थी, जब सोमवार सुबह करीब 11 बजे गांव के भूतपूर्व प्रधान ने अपने खेत में कुछ मवेशियों के काटे जाने की शिकायत की। इस शिकायत पर स्याना थाने के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार मौके पर पहुंचे और लोगों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। 

भीड़ को भड़काकर लाया गया


पुलिस के मुताबिक, इस दौरान लोग शांत हो गए और थाने में एफआईआर लिखने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार और बुलंदशहर के जिलाधिकारी ने बताया कि इसके थोड़ी देर बाद आसपास के तीन गांव से करीब 400 की संख्या में लोग ट्रैक्टर ट्रॉली में अवशेष भरकर चिंगरावठी पुलिस चौकी के बाहर पहुंच गए।

Inspector Subodh को गोली मारी गई


पुलिस चौकी के बाहर जब भीड़ ने स्याना रोड जाम कर दिया तो इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के नेतृत्व में उग्र लोगों को समझाने की कोशिश की गई लेकिन जल्द ही हालात बेकाबू हो गए और पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। भीड़ ने पुलिस को निशाना बनाया, जमकर पत्थरबाजी की गई। हमले में घायल एक पुलिसकर्मी ने बताया कि भीड़ ने चारों तरफ से पुलिस पर अटैक किया सबको तितर-बितर कर दिया। बताया जा रहा है कि इसी दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को गोली लग गई।

District Magistrate Anuj Jha ने किए चौंकाने वाले खुलासे


बुलंदशहर के जिलाधिकारी अनुज झा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने बताया, 'भीड़ हथियार के साथ चौकी के बाहर पहुंची थी। उनके पास धारदार हथियार और लाठी-डंडे भी थे।


पत्थरबाजी व आगजनी के दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार पर हमला हुआ और वो घायल हो गए।


अनुज झा के मुताबिक, 'यहां घायल होने के बाद वह नजदीकी खेत में ऊंचे मेढ़ के पीछे चले गए। जब सुबोध के ड्राइवर ने उन्हें इस हालत में देखा तो वह गाड़ी लेकर पहुंचे और सुबोध कुमार को उठाकर गाड़ी में बैठाया। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जब गाड़ी में सुबोध कुमार को ले जाया गया, तो ग्रामीण वहां भी आ गए और पथराव कर दिया। इंस्पेक्टर सुबोध को अस्पताल तक नहीं जाने दिया गया। जिलाधिकारी अनुज झा ने बताया कि जब सुबोध कुमार को पुलिस अस्पताल ले गई तो बाद में वहां मौजूद भीड़ ने उस पुलिस वैन में भी आग लगा दी जिसमें सुबोध को लाया गया था। 

यह प्रदर्शन एक साजिश थी

इस सवाल पर डीएम अनुज झा ने बताया कि यह जांच का विषय है लेकिन उन्होंने यह बताया कि जो लोग रोड जाम करने पहुंचे थे उनके पास हथियार थे। अनुज झा के मुताबिक, 'भीड़ के पास धारदार हथियार भी थे। उन्होंने हमला किया है, ये भी सच है। इंस्पेक्टर को भी एक गोली लगी है, जिससे ये निश्चित होता है कि गोली चली है। इंस्पेक्टर के बाईं आंख की तरफ गोली का जख्म है। सर्विस रिवॉल्वर छीनकर हमला किया गया है या नहीं, ये अभी जांच का विषय है।

Akhilak Case क्या है और इंस्पेक्टर सुबोध का इससे क्या कनेक्शन है


पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह दादरी में मोहम्मद अखलाक लिंचिंग मामले में जांच अधिकारी थे। बता दें कि घर में गाय का मांस रखने की अफवाह के बाद भीड़ ने मोहम्मद अखलाक और उनके बेटे पर घर में घुसकर हमला कर दिया था, जिसमें अखलाक को काफी चोटें आईं। उन्हीं चोटों की वजह से अखलाक की मौत हो गई थी। इस केस की जांच में सुबोध कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और तय समय पर सभी जरूरी सबूत भी इकट्ठा कर लिए थे। इसके साथ ही सुबोध सिंह को इस केस से हटा दिया गया और उनका वाराणसी ट्रांसफर कर दिया गया था। 

अखलाक केस में गवाह नंबर-7 थे इंस्पेक्टर सुबोध


बिसाहड़ा में भी गोमांस को लेकर बवाल हुआ था। यहां 28 सितंबर 2015 की रात गोमांस रखने के शक में इखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। उसके बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया था। साथ ही यह गांव राजनीति का गढ़ बन गया था। यह गांव जारचा कोतवाली के तहत आता है। उस समय जारचा में सुबोध कुमार ही प्रभारी थे। उनकी अगुवाई में ही पुलिस की टीम ने बिसाहड़ा कांड का खुलासा कर गिरफ्तारियां की थीं। वह बिसाहड़ा कांड के जांच अधिकारी रहे हैं। इसी के आधार पर बिसाहड़ा कांड की चार्ज शीट तैयार हुई थी। चार्जशीट के अनुसार वह बिसाहड़ा कांड में गवाह नंबर-7 हैं। 

यूपी एडीजी (लॉ ऐंड ऑर्डर) आनंद कुमार ने बताया, 'सुबोध कुमार सिंह 28 सितंबर 2015 से 9 नवंबर 2015 तक अखलाक लिंचिंग मामले में जांच अधिकारी थे। बाद में इस मामले में चार्जशीट किसी अन्य जांच अधिकारी ने फाइल की थी।' 


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