तीन दशकों की उपेक्षा का शिकार हैं गैर-सचिवालयीन स्टेनोग्राफर्स | KHULA KHAT

Updesh Awasthee
योगेन्द्र सिंह पवार, होशंगाबाद। स्टनोग्राफर्स कॉडर के कर्त्तव्यों का निर्धारित मानक उसकी योग्यता, क्षमता और निष्ठा को व्यक्त करता है। प्रदेश के गठन से 1986 तक एकसमान वेतनमान वाले 10 से अधिक कॉडर्स में शामिल रहे ’’सिंगल’’ स्टेनोग्राफर्स के अन्यायपूर्ण विभाजन से गैर-सचिवालयीन स्टेनोग्राफर्स लगातार वेतन और पदोन्नति विसंगतियों में उपेक्षा का शिकार रहते हुए आज सबसे निचले वेतनमान क्रम पर है । पदोन्नति अवसरों के मुकाबले गैर-सचिवालयीन स्टेनोग्राफर्स तृतीय श्रेणी लिपिक से नीचे हैं।

1993 से 2003 तक 10 साल की कॉग्रेस सरकार और 2003 से अब तक 15 सालों की भाजपा सरकार दोनों के ही शासनकाल में इस कॉडर की जायज मॉंगों की पूर्ति नहीं हो सकी, जबकि कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता सर्वश्री दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजेन्द्रप्रसाद शुक्ल, आनंद अहिरवार के अलावा 150 से अधिक विधायकों और 20 से अधिक सांसदों ने इस कॉडर की मॉंग को जायज मानते हुए अनुकूल अनुशंसायें कीं। 

माननीय महोदय, 15 साल की भाजपा सरकार में भी मंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों से इस कॉडर की मॉंग को जायज तो माना, आश्वासन भी दिये, पर नतीजे में निराशा ही मिली।
हां, ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी पार्टी ने चुनावी घोषणा पत्र की बजाय ’’वचन पत्र’’ जारी कर विशेषकर कर्मचारी वर्ग की मॉंगों और समस्याओं का उसमें शामिल किया। स्टेनोग्राफर्स के लिए वेतन और पदोन्नति विसंगतियों के निराकरण, कर्त्तव्य के अनुरूप वेतन, सेवा अवधि में चार स्तरीय समयमान वेतनमान और अन्य मॉंगों को ’’वचन पत्र’’ में शामिल किया जाना इस कॉडर के लिये संतोष का विषय तो है, किन्तु आशंका भी है कि, कहीं गैर-सचिवालयीन होने से यह कॉडर फिर अन्याय का शिकार न हो जाय।

माननीय महोदय, जब पूरे प्रदेश में स्टेनोग्राफर्स के लिए शैक्षिक और तकनीकी अर्हता, सेवा और भर्ती नियम व शर्तें, कार्य प्रकृति, कर्त्तव्य के निर्धारित घण्टे समान हैं, और सुप्रीम कोर्ट भी समान काम के लिये समान वेतन का हामी है, तब इस कॉडर में वेतन और पदोन्नति विसंगतियॉं होना न्यायोचित् नहीं है। 

राजभवन, विधानसभा, मंत्रालय और गृह जैसी विशिष्ट जगहों की सेवायें विशिष्ट होने के भाजपा सरकार के मंत्री के कथन का न केवल कॉंग्रेसी विधायकों ने बल्कि सत्ता पक्ष के भाजपा विधायकों ने भी विरोध किया और भाजपा सरकार से कर्मचारियों के बीच भेदभाव न करने और समान सेवा शर्तें और वेतन लागू किये जाने की बात कही थी । फिर मैदानीस्तर पर पर असुविधाओं के बीच काम करने वाले कर्मचारियों के मुकाबले कुछेक विशिष्ट जगहों पर काम करने वाले वालों की सेवायें विशिष्ट क्यों होनी चाहिये, जबकि सेवा और भर्ती नियम समान हैं ? 

माननीय महोदय, गैर-सचिवालयीन स्टेनोग्राफर्स कॉडर की कुल जमा संख्या बमुश्किल 1200 है । कार्यालय अवधि से इतर भी शासकीय दायित्वों को प्राथमिकता देता है । अपनी जायज मॉंगों की पूर्ति के लिए इस कॉडर ने हड़ताल, असहयोग, धरना, प्रदर्शन का सहारा नहीं लिया । इसके बावजूद, आज गैर-सचिवालयीन कॉडर उपेक्षा और अन्याय का शिकार है ।

अब आपसे अनुरोध है कि, तीन वर्षों की उपेक्षा को दूर कर गैर-मंत्रालयीन स्टेनोटाईपिस्ट और स्टेनोग्राफर्स की वेतन और पदोन्नति विसंगतियों को दूर करते हुए ’’वचन पत्र’’ में दिये वचन को तत्काल पूरा करें । इस छोटे-से कॉडर की मॉंगपूर्ति पर शासन को बहुत वित्तीय भार भी नहीं आयेगा, और कर्मचारी वर्ग में नई सरकार की इस पहल से ’’वचन पूर्ति’’ के संबंध में अच्छा संदेश भी जायेगा।
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