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बेटा BOOK में MOBILE फिट करके CHATTING करता था, मां-बाप को लगा पढ़ने लगा है | MOBILE ADDICTION

28 December 2018

भोपाल। एक निजी स्कूल का 12वीं का छात्र दिन-रात मोबाइल पर चैटिंग करता था। इसलिए मां-बाप उसे टोकते रहते थे। उनकी डांट से बचने के लिए उसने किताब को काटकर उसमें मोबाइल फिट कर दिया। घरवालों को लगता बेटा सुधर गया है और पढ़ने लगा है लेकिन जब वह छमाही परीक्षा में फेल हुआ, तब माता-पिता को उसके कारनामे का पता चला।

यह मामला काउंसलिंग के लिए चाइल्ड लाइन में पहुंचा। काउंसलर्स ने माता-पिता और बच्चे की काउंसलिंग कर समझाइश दी। बच्चा साकेत नगर में रहता है। उसकी मां प्रोफेसर और पिता बैंक में कार्यरत हैं। तब बेटे की काउंसलिंग के लिए माता-पिता उसे लेकर चाइल्ड लाइन पहुंचे। बता दें कि चाइल्ड लाइन में एक माह में करीब 5 से 6 ऐसे मामले आ रहे हैं, जिसमें मोबाइल पर रोकटोक और पढ़ाई के डर से बच्चे घर छोड़ कर भाग रहे हैं। ऐसा करने वालों में 13 ये 18 वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल हैं। 

चाइल्ड लाइन की काउंसलर्स का कहना है कि मोबाइल के लिए रोक-टोक करने पर आजकल बच्चे अग्रेसिव हो जा रहे हैं। ऐसे बच्चों की काउंसलिंग बहुत जरूरी है। ऐसे मामलों में बच्चों को चाइल्ड लाइन में अन्य बच्चों के साथ रखने के लिए भी अभिभावकों से कहा जाता है, ताकि वे दूसरे बच्चों की परेशानी को समझ सके। काउंसलिंग में कई ऐसे मामले आ रहे हैं।

केस- 1: 16 वर्षीय की लड़की भाग गई थी
शाहपुरा निवासी 16 वर्षीय किशोरी अपनी मां की डांट से परेशान होकर घर छोड़कर चली गई थी। दो-तीन बाद झांसी से रेलवे चाइल्ड लाइन ने उसे सीडब्ल्यूसी में पेश किया। काउंसिलिंग में बालिका ने बताया कि उसकी मां उसे मोबाइल पर बात कम करने और पढ़ाई करने के लिए डांटती थी। जिससे परेशान होकर वह घर छोड़कर चली गई।

केस-2: 9वीं की छात्रा ने उत्पात मचा रखा था
अशोका गार्डन निवासी 9वीं की छात्रा के माता-पिता ने चाइल्ड लाइन में शिकायत की कि उनकी बेटी रात-रात भर फोन पर बात करती है। मना करते हैं तो वह खुद को कमरे में बंद कर लेती है। सामान तोड़ने-फोड़ने लगती है। काउंसलिंग में छात्रा ने बताया कि मम्मी-पापा फोन पर बात करने से रोकते हैं, जो उसे अच्छा नहीं लगता है।

केस-3: चैटिंग करने के लिए मुंबई भाग गया
कोलार निवासी 11वीं के छात्र को पिता ने दिनभर मोबाइल पर चैटिंग करने से रोका तो वह घर छोड़कर ही भाग गया। वह मुंबई चला गया। करीब तीन से चार दिन बाद छात्र को भोपाल चाइल्ड लाइन लेकर आई। जब बच्चे की काउंसलिंग की गई तो उसने बताया कि पापा उसे मोबाइल पर चैटिंग के लिए डांटते और पढ़ाई के लिए कहते रहते थे।

समझाइश देते हैं
चाइल्ड लाइन में हर माह 5 से 6 किशोर बच्चों के भागने के मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें वे मोबाइल पर रोक लगाने और पढ़ाई करने के लिए अभिभावकों से मिले डांट-फटकार के कारण बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं। काउंसलिंग कर उनको समझाइश दी जाती है। 
अर्चना सहाय, डायरेक्टर, चाइल्ड लाइन



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