KULDEEP YADAV: जिसके लिए पिता ने शहर छोड़ा, उसने सबके छक्के छुड़ा दिए, लाइफ में भी हैं कई स्पिन | SPORTS NEWS

27 November 2018

उन्नाव और कानपुर का गुड्डू अब कुलदीप यादव बन गया है। उत्तरप्रदेश में जब राजनीति में यादवों के सूर्य पर ग्रहण लगा हुआ है। क्रिकेट की दुनिया में यह सूर्य क्षितिज पर अपनी कक्षा में स्थापित हो रहा है। जी हां, अपना गुड्डू यानी कुलदीप यादव अब दुनिया का तीसरा सबसे खतरनाक गेंदबाज बन गया है। उसकी गैंद अच्छे-अच्छों के छक्के छुड़ा रही है लेकिन ये सफलता उसे स्टेप बाई स्टेप नहीं मिल गई। उसकी लाइफ में उसकी गेंद की तरह कई स्पिन आए हैं। आइए जानते हैं कुलदीप यादव के बारे में कुछ रोचक बातें: 

भारतीय क्रिकेट टीम के पहले ‘चाइनामैन’ गेंदबाज़


कुलदीप यादव जिंदगी में कभी चीन नहीं गए लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के पहले ‘चाइनामैन’ गेंदबाज़ हैं। दरअसल, कुलदीप गेंद को बाएं हाथ की कलाई से स्पिन कराते हैं, जिसे क्रिकेट की शब्दावली में’चाइनामैन’ गेंदबाजी कहा जाता है। वे क्रिकेट के तीनों अंतरराष्ट्रीय संस्करणों, टेस्ट मैच, वन डे और टवेंटी-20 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा वे घरेलू स्तर पर उत्तर प्रदेश क्रिकेट टीम, मध्य क्षेत्र, इंडिया ए, इंडिया अंडर-19 के लिए भी खेल चुके हैं। आईपीएल में वे मुंबई इंडियन्स और कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम का हिस्सा रहे हैं।  कुलदीप मुख्य रूप से बाएं हाथ के चाइनामैन गेंदबाज की भूमिका में हैं। निचले क्रम में बाए हाथ के बल्लेबाजी करते हैं।

कुलदीप का सपना पूरा करने पिता ने सबकुछ छोड़ दिया था


यह सुनने में तो अच्छा लगता है परंतु रियल लाइफ में बहुत कम होता है कि कोई मिडिल क्लास व्यक्ति अपनी इनकम की कंफर्टजोन सिर्फ इसलिए छोड़ दे क्योंकि उसका बेटा क्रिकेट खेलना चाहता है। कुलदीप यादव का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 14 दिसंबर 1994 को हुआ। कुलदीप यादव के पिता का नाम राम सिंह यादव तथा माता का नाम ऊषा यादव है। रामसिंह उन्नाव में ईंट भट्ठे के मालिक थे लेकिन कुलदीप क्रिकेट खेलना चाहता था अत: पिता राम सिंह परिवार सहित कानपुर में आकर बस गए। कुलदीप के भाई जनार्दन भी अच्छे बल्लेबाज रहे।

टेनिस खेलने निकले थे, क्रिकेटर बन गए


बचपन में कुलदीप को स्पोर्टस में कोई खास रुचि नहीं थी। पिता राम सिंह खुद क्रिकेट के खिलाडी थे, लेकिन वे अमेरिकी टेनिस खिलाडी आंद्रे आगासी से बहुत प्रभावित थे। कुलदीप को भी वे टेनिस का बड़ा खिलाड़ी बनाना चाहते थे। लेकिन स्थितियां ऐसी बनती गईं कि टेनिस की गेंद से क्रिकेट खेलते-खेलते कुलदीप पूरी तरह क्रिकेट के हो गए। कुलदीप के पिता ने बताया कि कुलदीप बचपन में बहुत दुबले-पतले थे। उसको थोडा एक्सरसाइज कराने के रोवर्स मैदान में लेकर जाया करते थे। ये बात तबकी है, जब कपिल की उम्र लगभग 8 साल थी। इसी बीच वहां स्थानीय लड़कों को क्रिकेट की ट्रेनिंग देने वाले कपिल पांडेय उसकी लगन और मेहनत से बहुत प्रभावित हुए। कपिल ने कुलदीप के पिता को बुलाकर कहा कि इस बच्चे में खेल के प्रति लगन अच्छी है। अगर इस दिशा में ठीक से मेहनत की जाय तो लडका बहुत आगे जा सकता है। राम सिंह ने कोच की बात मान ली और बेटे कुलदीप का एडमिशन क्रिकेट एकेडमी में करा दिया। 

फास्ट बॉलर बनना चाहते थे, स्पिनर बन गए


कुलदीप के पिता रामसिंह ने बताया कुलदीप फास्ट बॉलर बनना चाहता था। बचपन में जब लगभग 10 साल का था, तो सीढ़ी से गिर गया था। इससे उसके बाएं हाथ की कलाई में चोट लग गई थी। प्लास्टर हटने के बाद भी कुलदीप की कलाई में हल्का टेढ़ापन आ गया था। अब वो तेज गेंदबाजी नहीं कर सकता था। ज्यादातर लोग ऐसे मौके पर लाइफ का गोल ही बदल लेते हैं परंतु कुलदीप ने हाथ टूट जाने के बाद भी बॉल का साथ नहीं छोड़। टूटी कलाई लेकर जब वो मैदान में पहुंचा तो कोच कपिल पांडेय ने भी निगेटिव कमेंट करके बाहर नहीं भगाया बल्कि एक स्टडी की। 

कुलदीप की लंबाई अपेक्षाकृृत कम थी 168 सेमी। 
तेज गेंदबाजी के हिसाब से यह बहुत अच्छी लंबाई नहीें मानी जाती। 
टूटी कलाई से जो बॉल आ रही थी वो नैसर्गिक स्पिन कला के जैसी थी जिसे चाइनामैन गेंदबाजी कहा जाता है। 
कुलदीप को यह नहीं पता था परंतु कोच का अनुभव और अध्ययन काम आया। 
कोच ने उसे स्पिन के लिए प्रेरित किया।
एक इंटरव्यू में कुलदीप ने बताया शुरुआत में मुझे कोच की ये सलाह बहुत नहीं भाई, लेकिन जल्दी ही समझ में आ गया कि कैरियर में कुछ खास हासिल करने में बाए हाथ की ये कलाई स्पिन ही मददगार होगी।

अंडर-19 क्रिकेट विश्चकप में ली थी पहली हैट्रिक


कुलदीप यादव ने पहली बार लोगों का ध्यान तब खींचा जब उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आयोजित Under-19 World Cup-2014 में Indian cricket team की ओर से सर्वाधिक विकेट हासिल किए। इस टूर्नामेंट में कुलदीप ने 6 मैच खेलकर कुल 14 विकेट लिए थे। सभी टीमों के गेंदबाजों में उनका प्रदर्शन संयुक्त रूप से दूसरे नंबर पर था। Under-19 World Cup-2014 में कुलदीप ने स्कॉटलैंड के ख़िलाफ लगातार तीन गेंदों पर विकेट लेकर अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय हैट्रिक भी पूरी की। Under-19 World Cup के इतिहास में hat-trick लगाने वाले पहले भारतीय गेंदबाज भी बने। रोचक बात यह है कि इस टूर्नामेंट के पहले मैच में, जोकि पाकिस्तान के खिलाफ था, कुलदीप को एक भी विकेट नहीं मिला था। लेकिन अगले ही मैच में स्कॉटलैंड के खिलाफ उन्होंने हैट्रिक लेकर कसर निकाल ली। टूर्नामेंट केदो मैचों में चार-चार विकेट हासिल किए।

टवेंटी-20 चैंपियन्स लीग में से खींचा ध्यान


Indian Premier League (IPL) 2012 में कुलदीप को Mumbai Indians ने खरीदा था, लेकिन उन्हें कोई भी मैच नहीं खिलाया गया। 2014 के आईपीएल में वे Kolkata Knight Riders (KKR) की टीम में थे, लेकिन इस बार भी कुलदीप को कोई भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। आखिरकार 2016 के Champions League में कुलदीप को पहली बार Kolkata Knight Riders (KKR) की ओर से ही खेलने का मौका मिला। यहां उन्हें टीम के प्रमुख स्पिन गेंदबाज वेस्ट इंडीज के सुनील नरैन के सपोर्ट में रखा गया था।पूरे टूर्नामेंट में कुलदीप को सिर्फ 3 मैच खेलने का मौका मिला, जिनमें कुल 6 विकेट लेकर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की।

दिलीप ट्रॉफी से खुली अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की राह


2016 की दिलीप ट्राफी में कुलदीप को India Red टीम में शामिल किया गया। इसमें कुलदीप ने कुल 3 मैच खेलकर 17 विकेट हासिल किए और अपनी टीम को टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने में मदद की।
2017 में आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के भारतीय दौरे के दौरान कुलदीप को भारतीय टीम में शामिल किया गया। धर्मशाला में हुए मैच में कुलदीप ने अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत की। पहले ही मैच में चार Australian batsmen को आउटकर कुलदीप ने अपनी काबिलियत साबित की।
जल्द ही कुलदीप को वनडे अंतर्राष्ट्रीय मैच मेें भी पदार्पण का मौका मिल गया। 2017 में वे West Indies के दौरे पर गई भारतीय टीम में उन्हें शामिल किया गया। 23 जून 2017 को Queen’s Park Oval में उन्होंने पहला मैच खेला। इस दौरे में कुलदीप संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे।

टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक बनाने वाले तीसरे भारतीय


सितंबर 2017 में आस्ट्रेलिया टीम के खिलाफ कोलकाता में हुए दूसरे एकदिवसीय मैच में कुलदीप ने ऑस्ट्रेलियाई पारी के 33वें ओवर की दूसरी, तीसरी और चौथी गेंद पर Matthew Wade, Ashton Agar और Pat Cummins को आउट कर एक बार फिर hat-trick लेने का कारनामा किया। वनडे मैचों के इतिहास मे किसी भी भारतीय गेंदबाज की तरफ से लगाई गई यह सिर्फ तीसरी hat-trick थी। उनसे पहले सिर्फ चेतन शर्मा और कपिल देव ही hat-trick लगा सके थे।

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