बेरोजगारी: COLLEGE का हीरो, पढ़ाई में अव्वल, MBA छात्र ने सुसाइड कर लिया, सरकार के पास ना नौकरियां हैं ना योजना

01 November 2018

ग्वालियर। आईपीएस कॉलेज से एमबीए कर रहे छात्र तरुण भाटिया (22) ने मंगलवार रात जहर खाकर आत्महत्या कर ली। वो कॉलेज का हीरो था। पढ़ाई में अव्वल। उसकी मां दुकान चलाकर उसे पढ़ा रही थी। उसका बस एक ही सपना था, अच्छी सी नौकरी ताकि मां को आराम दे सके लेकिन यह सपना भी पूरा ना हो पाया। एमबीए डिग्री होल्डर्स के लिए सरकार के पास ना नौकरियां हैं ना ही कोई योजना। 

परिजन और दोस्तों के अनुसार वह पिछले करीब चार महीने से डिप्रेशन में था। उसे हर पल नौकरी लगने की चिंता सताती रहती थी। इससे पुलिस को आशंका है कि उसने इसी कारण आत्महत्या की होगी। तरुण पढ़ने में अव्वल था।  उसने इस बार एमबीए सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा दी थी, जिसका रिजल्ट दस दिन पहले ही आया और वह फर्स्ट डिवीजन में पास हुआ था।

इसके बाद भी वह नौकरी को लेकर असमंजस में था। इस स्थिति में पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उसकी परेशानी की कोई और वजह तो नहीं थी। घटना माधौगंज के मामा का बाजार स्थित कदम साहब का बाड़ा क्षेत्र की है। माधौगंज थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। मौत का कारण जानने के लिए मोबाइल भी जब्त किया है। छात्र के पिता का निधन तभी हो गया था, जब वह 14 माह का था। 

इंटरनल में रोने लगा था: 
एक महीने पहले इंटरनल के दौरान वह परीक्षा देते समय ही रोने लगा था। उसे दोस्तों ने संभाला था।  तरुण ने एक दिन पहले ही अपनी मां से दो पासपोर्ट साइज फोटो मांगे थे। उसने नया सीवी भी बनवाया था। संभावना है कि वह किसी नौकरी के लिए आवेदन करने वाला था।

वही तो मेरा इकलौता सहारा था, दुकान चलाकर उसे पढ़ा रही थी
पति की मौत के बाद वही तो मेरा इकलौता सहारा था। दुकान चलाकर उसे पढ़ा रही थी। सपना था, बेटा बड़ा अफसर बने। बेटी की शादी हो चुकी है। लेकिन पता नहीं क्यूं, वो कुछ महीनों से बहुत बेचैन था। बार-बार बोलता था कि मां नौकरी लगेगी या नहीं, मैं उसे दिलासा देती। मेरे साथ रात 10 बजे खाना खाया। फिर बोला, कमरे में गाना सुनने जा रहा हूं।

कुछ देर बाद बोला - कॉफी पीनी है। मैं कॉफी बनाकर ले गई तो कमरे में पलंग पर लेटा था। मुंह से झाग निकल रहा था। उसे अस्पताल लेकर गए तो डॉक्टर बोले, यह नहीं रहा। ऐसा कैसे हो सकता है। मेरा इकलौता सहारा मेरा साथ कैसे छोड़कर चला गया। 
कांता भाटिया, छात्र की मां 

दोस्तों का हीरो था, पढ़ाई में अव्वल
तरुण हम दोस्तों का हीरो था। पढ़ाई में अव्वल, तो हंसी मजाक में सबसे आगे। पलभर में हमारी परेशानी दूर कर देता था। लेकिन चार महीने से उदास रहने लगा था। इतना परेशान कि उसका चेहरा भी नहीं देखा जाता था। हर समय यही कहता, नौकरी लगेगी या नहीं। हमारा पुराना तरुण हमें वापस मिल जाए, इसके लिए पिछले सप्ताह कॉफी पार्टी रखी थी। उसे खूब हंसाया। लेकिन पता नहीं उसे क्या हो गया। वह कैसे इतनी जल्दी हार गया। 
युगल चौहान, तरुण का दोस्त

पूरी प्लानिंग के साथ आत्महत्या की है
पड़ोसियों ने बताया कि तरुण की मां की चीख सुनकर दौड़े। वह ऊपर वाले कमरे में था। देखा तो मुंह पर पन्नी बांध रखी थी। मुंह से झाग निकल रहा था। इससे आशंका है कि उसने आत्महत्या के लिए मुंह पर पन्नी भी बांधी होगी, जिससे दम घुट जाए। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि तरुण ने पूरी प्लानिंग के साथ आत्महत्या की है।
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