क्या हर दीपावली नई लक्ष्मी-गणेश मूर्तियां खरीदना चाहिए

01 November 2018

श्रीमद डांगौरी। बात जब धर्म और पूजा-पाठ की आती है तो परंपराओं के साथ कई मिथक भी होते हैं। हर व्यक्ति के पास अपना एक सवाल भी होता है। जिज्ञासाओं का सम्मान और प्रश्नों का उत्तर ही हिंदू धर्म की विशेषता है। एक प्रश्न आया है कि क्या हर दीपावली नई लक्ष्मी-गणेश मूर्तियां खरीदना चाहिए। आइए इस प्रश्न पर शास्त्र-सम्मत विचार करते हैं।

किस धर्मग्रंथ या शास्त्र में लिखा है प्रतिमा स्थापना का विधान

दीपावली पर प्रतिमा स्थापना को लेकर देश भर में कई मान्यताएं हैं। ज्यादातर लोग घरों में मूर्तियां स्थापित करते हैं। देश में कुछ मंदिर भी हैं जहां प्रतिमा बदलने का अवसर माना जाता है लेकिन शास्त्रों में कहीं भी नई मूर्ति की पूजा से जुड़ी बातें देखने को नहीं मिली हैं। मान्यता ये भी है कि पुराने समय में सिर्फ धातु और मिट्टी की मूर्तियों का ही चलन था। धातु की मूर्ति से ज्यादा मिट्टी की मूर्ति की पूजा होती थी। जो हर साल खंडित और बदरंग हो जाती है। इसलिए हर साल नई प्रतिमा स्थापित कर दी जाती है। 

मूर्तियां स्थापित करना चाहिए या नहीं

कई ऐसी मान्यताएं हैं कि नई मूर्ति एक आध्यात्मिक विचार का भी संचार करती है जैसा कि गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है। नई मूर्ति लाने से घऱ में नई ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए मूर्तियों की स्थापना की जाती है। 

क्या सभी प्रकार की मूर्तियां बदलनी चाहिए

यहां ध्यान रखें कि सिर्फ मिट्टी की मूर्तियां बदलने की परंपराएं हैं जबकि सोने या चांदी की मूर्तियां जो सालभर तिजोरी में रखी रहतीं हैं, उन्हे कभी नहीं बदला जाता। उन्हे केवल दीपावली के दिन पूजा स्थल पर लाकर पूजा की जाती है। शेष समय वो तिजोरी में स्थापित होतीं हैं। 

लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां एक साथ जुड़ी होनी चाहिए या अलग-अलग 

हमेशा ध्यान रखें कि लक्ष्मी गणेश कभी भी एक साथ जुड़े हुए नहीं खरीदने चाहिए। पूजाघर में रखने के लिए लक्ष्मी और गणेश की ऐसी मूर्ति लेने चाहिए, जिनमें दोनों विग्रह अलग-अलग हों।

गणेश की मूर्ति चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान-

गणेश की मूर्ति में उनकी सूंड बाएं हाथ की तरफ मुड़ी होनी चाहिए। दाईं तरफ मुड़ी हुई सूंड शुभ नहीं होती है। सूंड में दो घुमाव भी ना हों। 
मूर्ति का चुनाव समय हमेशा गणेश जी के हाथ में मोदक वाली मूर्ति खरीदें। ऐसी मूर्ति सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
गणेश जी की मूर्ति में उनके वाहन मूषक की उपस्थिति अनिवार्य है।
सोने, चांदी, पीतल या अष्टधातु की मूर्ति खरीदने के साथ क्रिस्टल के लक्ष्मी-गणेश की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। 

लक्ष्मी की मूर्ति चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान-

लक्ष्मी मां की ऐसी मूर्ति न चुनें जिसमें मां लक्ष्मी उल्लू पर विराजमान हों। ऐसी मूर्ति को काली लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
लक्ष्मी माता की ऐसी मूर्ति ऐसी लेनी चाहिए जिसमें वो कमल पर विराजमान हों। उनका हाथ वरमुद्रा में हो और धन की वर्षा करता हो।
कभी भी लक्ष्मी मां की ऐसी मूर्ति ना लेकर आएं जिसमें वो खड़ी हों। ऐसी मूर्ति लक्ष्मी मां के जाने की मुद्रा में तैयार माना जाता है।
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