मप्र: WhatsApp भी आचार संहिता के दायरे में, बवाल शुरू | MP ELECTION NEWS

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मप्र: WhatsApp भी आचार संहिता के दायरे में, बवाल शुरू | MP ELECTION NEWS


ग्वालियर। सोशल मैसेजिंग एप व्हाट्सएप भी अब आचार संहिता के दायरे में आ गया है। मध्यप्रदेश के भिंड जिले में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष कुमार गुप्ता ने आदेश दिए हैं कि जिले भर में जितने भी व्हाट्सएप ग्रुप संचालित हो रहे हैं, उन्हे रजिस्ट्रेशन कराना होगा। बिना रजिस्ट्रेशन वाले व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के साथ ही नया विवाद शुरू हो गया है। 

क्या है आदेश
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष कुमार गुप्ता ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें लिखा है कि व्हाट्सएप के ग्रुप संचालक (एडमिन) को जिला जनसंपर्क कार्यालय में अपने ग्रुप के बारे में जानकारी देना होगी। साथी ही उसने रजिस्ट्रेशन भी कराना अनिवार्य है। प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन का आखिरी तारीख 15 अक्टूबर रखी है। जो समय सीमा के अंदर अपनी जानकारी कार्यालय में नहीं देगा बाद में उसपर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

व्हाट्सएप एडमिंस ने कहा यह आजादी पर हमला है
इधर इस आदेश के बाद व्हाट्सएप एडमिन्स में हड़कंप मच गया है। उनमें आक्रोश भी है। उन्होंने इस आदेश को गलत बताया है। उनका कहना है कि इस तरह से जिला प्रशासन द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप का रजिस्ट्रेशन कराना आम आदमी की स्वतंत्रता पर हमला है। ग्रुप एडमिन्स का कहना है कि अगर कलेक्टर ने अपना आदेश वापस नहीं लिया तो वह कोर्ट की शरण लेंगे।

कार्रवाई क्या होगी यह नहीं बताया
कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आशीष कुमार गुप्ता के नोटिफिकेशन में यह नहीं बताया गया कि वाट्सएप ग्रुप के एडमिन आचार संहिता की किस धारा के तहत उसके दायरे में आते हैं और ऐसे वाट्सएप ग्रुप जिनमें शैक्षणिक, धार्मिक या सामाजिक संदेशों का आदान प्रदान होता है उसके संचालक किस कानून के तहत आचार संहिता के दायरे में आते हैं। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन यदि रजिस्ट्रेशन नहीं कराता तो उसके खिलाफ किस धारा के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

आने जाने का खर्चा कौन देगा
व्हाट्सएप एडमिंस का कहना है कि अव्वल तो यह न्यायसंगत नहीं लगता क्योंकि सभी व्हाट्सएप ग्रुप राजनीतिक नहीं होते। लोग अपने परिवार, शैक्षणिक गतिविधियों, सामाजिक जानकारियों, चुटकुलों इत्यादि के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाते हैं। दूसरा यदि रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है तो भिंड के दूरस्थ गांव से मुख्यालय तक आने जाने का खर्चा क्या जिला निर्वाचन कार्यालय से मिलेगा। 

मॉनीटरिंग कैसे करेंगे
इस आदेश में एक तकनीकी इरर भी है। सवाल यह है कि 
जिले भर में चलने वाले हजारों व्हाट्सएप ग्रुपों की मॉनीटरिंग कैसे की जाएगी। 
क्या रजिस्ट्रेशन कराने के बाद प्रचार करने की अनुमति होगी। 
यदि कोई व्यक्ति कलेक्टर की लास्ट डेट 15 अक्टूबर के बाद व्हाट्सएप ग्रुप बनाता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। 
क्या 15 अक्टूबर 2018 के बाद मतदान की तारीख तक जिले भर में व्हाट्सएप ग्रुप बनाना प्रतिबंधित रहेगा। 
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