महिला को छूने और घूरने पर हो सकती है 7 साल की "जेल", जानिए सेक्सुअल हैरेसमेंट से जुड़ी ये खास बातें...

12 October 2018

इन दिनों भारत में मीटू कैंपन जोर पकड़ रहा है। तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाए जाने के बाद अब धीरे-धीरे बॉलीवुड की कई एक्ट्रेसेस खुद के साथ हुए उत्पीडऩ (sexual harrasment)  की कहानी खुल कर बयां कर रही हैं। इसके साथ ही देश की जानी-मानी शख्सियतों पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लग रहे हैं, जिसमें कैलाश खेर, संस्कारी बापू आलोकनाथ, पत्रकार पीयूष मिश्रा के अलावा कई बड़े एक्टर्स शामिल हैं। केवल एक्टर्स ही नहीं बल्कि आम महिला भी कभी न कभी यौन उत्पीडऩ की शिकार होती है। ऐसे में अब वक्त आ गया है कि हर महिला को अपने अधिकार और इससे जुड़े कानून( law against sexual harrasment) मालूम होने चाहिए। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं वर्कप्लेस पर सैक्शुअल हैरसमेंट के बारे में ये बातें.....

वर्कप्लेस पर किस तरह का व्यवहार सैक्शुअल हैरसमेंट है

- वर्कप्लेस पर महिला कर्मचारी को टच करना और उसका फायदा उठाने की कोशिश करना। 
- सैक्शुअल फैवर्स की डिमांड करना। 
- गंदे इशारे करना। 
- पॉर्नोग्राफी और सैक्शुअल वीडियोज दिखाना। 

एम्प्लॉयीज कैसे बैठा सकते हैं इंक्वारी (employers go about the inquiry)

हर वर्कप्लेस पर 10 सदस्यों की एक इंटरनल कमेटी का गठन करना चाहिए, जो आरोपों को सुनने और उन पर फैसला लेने के लिए सक्षम हो। कमेटी में कम से कम या आधे सदस्य महिला हों। कमेटी में एनजीओ से जुड़ी महिला सदस्यों को भी शामिल किया जा सकता है, जो महिलाओं के अधिकार के लिए काम करती हैं। 

पीडि़तों की मानी जानी चाहिए ये बातें भी
- नियमों के अनुसार एम्प्लॉयीज को स्टाफ मीटिंग्स में सैक्शुअल हैरसमेंट से जुड़े मुद्दे उठाने का पूरा अधिकार होना चाहिए। 
- ऑफिस में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए गाइडलाइन्स बनानी चाहिए। 
- कंपनी का ये फर्ज है कि पीडि़त व्यक्ति फिर से किसी तरह के भेदभाव का शिकार न हो साथ ही पीडि़त की मांग पर उसका ट्रांसफर भी करा देना चाहिए। 

ऑफिस के बाहर भी वर्कप्लेस

अब तक वर्कप्लेस का मतलब ऑफिस के अंदर के माहौल से होता है। लेकिन बता दें कि वर्कप्लेस ऑफिस के बाहर उन जगहों को भी माना जाता है, जहां पर एम्प्लॉयीज की मौजूदगी होती  है। अगर महिला कर्मचारी के साथ किसी मीटिंग के दौरान रेस्टोरेंट में भी उत्पीडऩ होता है, तो एक्ट के तहत ये जगह भी वर्कप्लेस कहलाती है। 

ऐसे व्यवहार पर मिलती है ये सजा

- क्रिमिनल लॉ एक्ट 2013 के अनुसार महिला को छूने पर 1-5 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। 
- किसी महिला पर ज्यादा ध्यान देना, लगातार घूरना और उसके बारे में गलत अफवाहें फैलाने पर 1 से 7 साल तक की जेल की सजा और जुर्माना हो सकता है। 
- किसी महिला के लिए गंदे शब्द इस्तेमाल करना और उसकी विनम्रता को अपमानित करने पर क्रिमिनल लॉ एक्ट 2013 के तहत 3 साल की जेल और जुर्माना लग सकता है।
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