HOSPITAL ने ईसाई का शव हिंदुओं को दे दिया, परिवार ने अंतिम संस्कार भी कर दिया | BHOPAL NEWS

30 October 2018

भोपाल। भोपाल मेमोरियल अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रबंधन ने रविवार को एक क्रिश्चियन परिवार के बुजुर्ग का शव हिंदू परिवार को दे दिया। उस परिवार ने बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कर सोमवार को अस्थि विसर्जन भी कर दिया। जब सोमवार को ही अस्पताल प्रबंधन ने क्रिश्चियन परिवार को फोन करके कहा कि आप शव ले गए लेकिन रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं किए, तो परिजनों के होश उड़ गए। अस्पताल पहुंचकर उन्होंने प्रबंधन को बताया कि वे शव नहीं ले गए हैं। इसके बाद मर्चुरी में देखा गया तो शव नहीं था। लापरवाही सामने आते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया, क्रिश्चियन परिवार ने देर शाम निशातपुरा थाने में प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक गोविंद गार्डन निवासी 67 वर्षीय कुंजुमन केपी जीआई इंडस्ट्री गोविंदपुरा से रिटायर थे। परिवार में पत्नी मरिअम्मा, बेटा बीजू, बेटी बीना व ब्लैसी हैं। वह कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। हार्ट अटैक आने पर उनका भोपाल मेमोरियल अस्पताल में इलाज चल रहा था।

बीती 27 अक्टूबर शनिवार की दोपहर को इलाज के दौरान अस्पताल में उनका निधन हो गया। केरल से रिश्तेदारों के आने पर कुंजुमन का अंतिम संस्कार 30 अक्टूबर को करने का तय करके परिजनों ने उनका शव अस्पताल की मर्चुरी में रखवा दिया।

27 अक्टूबर को ही अस्पताल में सांस में दिक्कत के चलते भर्ती बड़वई निवासी 73 वर्षीय खुशीलाल सेन का भी शाम साढ़े छह बजे निधन हो गया था। रात होने व करवाचौथ के कारण परिजनों ने खुशीलाल का शव मर्चुरी में ही रखवा दिया था।

अगले दिन रविवार की सुबह साढ़े सात बजे खुशीलाल सेन के परिजन अस्पताल पहुंचे और मर्चुरी से दिया गया शव ले जाकर दोपहर 12 बजे के करीब अंतिम संस्कार कर दिया। इस दौरान उन्हें भी नहीं पता था कि वे किसी और का शव ले आए हैं और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया है।

अस्पताल से गए फोन से मचा हड़कंप

अस्पताल से सोमवार सुबह कुंजुमन के भाई बाबू केपी को फोन किया गया, कि आप कल शव ले गए लेकिन रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं किए। यह सुनते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने परिजनों के साथ अस्पताल पहुंचकर प्रबंधन को जब यह बताया कि वे अपने भाई का शव नहीं ले गए हैं, तो अस्पताल में हड़कंप मच गया।

प्रबंधन ने तत्काल मर्चुरी में शव की तलाशी व रिकॉर्ड की जांच की तो खुलासा हुआ कि खुशीलाल के शव की जगह उनके परिजनों को कुंजुमन का शव दे दिया गया है। इसके बाद जब खुशीलाल के परिजनों को फोन पर सूचित किया गया कि वे दूसरे व्यक्ति का शव ले गए हैं, जो उन्होंने बताया कि वे तो शव का अंतिम संस्कार कर होशंगाबाद में आज नर्मदा में अस्थियां भी विसर्जित कर चुके हैं।

इस स्थिति में कुंजुमन के परिजनों में रोष व्याप्त हो गया। ईसाई समाज के बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए और देर शाम तक अस्पताल में नाराजगी जाहिर करने के बाद उन्होंने निशातपुरा थाने में प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही की शिकायत दर्ज कराई।

इधर थाने पहुंचे खुशीलाल के बेटे प्रेमनारायण ने बताया कि मर्चुरी से शव देते समय आधा चेहरा दिखाया गया था। जिसे देखकर हमें पिता का शव ही लगा। इसके बाद अंतिम संस्कार से पहले सभी क्रियाएं की गईं, इस दौरान मां के अलावा रिश्तेदारों समेत करीब 40 से ज्यादा लोग थे, लेकिन किसी को भी भ्रम नहीं हुआ।

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