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दशहरा के लोकप्रिय टोटके: विज्ञान नहीं मानता लेकिन लोग अपनाते हैं

विजयादशमी यानी दशहरा भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था। इसी दिन माता दुर्गा ने भी महिषासुर राक्षस का वध किया था। अत: यह माना जाता है कि यह दिन शत्रु पर विजय के लिए सबसे उत्तम दिन है। भारत में कुछ सदियों पुरानी परंपराएं हैं जिन्हे टोटके भी कहते हैं। कहा जाता है कि दशहरे के टोटके, साल भर काम करते हैं। आइए जानते हैं विजयादशमी के कुछ लोकप्रिय टोटके: 

नीलकंठ पक्षी के दर्शन 

दशहरा के दिन पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को बेहद शुभ माना जाता है। कहा जाता है विजयदशमी के दिन अगर इस पक्षी के दर्शन हो जाते हैं तो उस व्यक्ति धन-धान्य की प्राप्ति होती है। इसे शुभ मानने का कारण ये है कि भगवान राम ने नीलकंठ के दर्शन के बाद रावण पर विजय प्राप्त की थी। 

रावण के पुतले की अस्थियां

आचार्य भास्कर आमेटा बताते हैं कि मान्यताओं के अनुसार, रावण के वध और लंका विजय के प्रमाण स्वरूप श्रीराम सेना लंका की राख अपने साथ ले आई थी, इसी के चलते रावण के पुतले की अस्थियों को घर ले जाने का चलन शुरू हुआ। कहा जाता है कि रावण की अस्थियां घर में रखने से समृद्धि आती है और बुरी बलाएं दूर रहतीं हैं। 

शमी का पेड़ 

दशहरे के दिन शमी के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से सभी तरह के कोर्ट केस में विजय मिलती है। शमी को अग्नि देव का रूप भी माना जाता है, इसलिए हवन में भी शमी की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है। शमी के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पौराणि‍क मान्यताओं के अनुसार लंका पर विजयी पाने के बाद श्रीराम ने शमी पूजन किया था। नवरात्र में भी मां दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। गणेश जी और शनिदेव, दोनों को ही शमी बहुत प्रिय है। भारत के तमाम राजपरिवार आज भी इस दिन शमी के पेड़ का पूजन करते हैं। 

हनुमान जी के दर्शन 

दशहरे के दिन एक मुट्ठी साबुत उड़द हनुमान जी की प्रतिमा के चरणों में रखकर ग्यारह बार परिक्रमा करें। इस परिक्रमा के समय अपने इच्‍छा को मन में दोहराएं। परिक्रमा पूर्ण होने पर स्वयं हनुमानजी की मूर्ति के सामने अपनी मनोकामना कहें, फिर उस उड़द में से एक दाना लेकर घर लौट आएं और घर के मंदिर में रख दें। 

पान का 'बीड़ा'

पान को जीत का प्रतीक माना गया है, पान का 'बीड़ा' शब्द का एक महत्व यह भी है इस दिन हम सही रास्ते पर चलने का 'बीड़ा' उठाते हैं। पान प्रेम का पर्याय है, दशहरे में रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाने की परम्परा है। ऐसा माना जाता है दशहरे के दिन पान खाकर लोग असत्य पर हुई सत्य की जीत की खुशी मनाते हैं। 

कुत्ता और गाय 

दशहरे के दिन से शुरू करके 51 दिन तक रोजाना कुत्तों और गायों को मीठा लड्डू या बेसन की मिठाई खिलाने से सालभर धन संबंधी किसी तरह की कोई कमी नहीं रहती है।
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