बैंक ब्याज दर का निर्धारण कैसे होता है

20 September 2018

हर खाताधारक चाहता है कि उसका BANK उसे ज्यादा से ज्यादा ब्याज (INTEREST) दे लेकिन आपने देखा होगा। आपका सेविंग अकाउंट (SAVING ACCOUNT) हो या फिर एफडी (FD), सभी बैंकों की ब्याजदरों में 0.50 प्रतिशत से ज्यादा का अंतर नहीं होता। प्राइवेट बैंक कभी थोड़ा ज्यादा देते हैं परंतु यह ज्यादा भी ललचाने वाला नहीं होता। सवाल यह उठता है कि आखिर बैंक की ब्याज दरें कैसे निर्धारित होतीं हैं। 

भारतीय रिजर्व बैंक की रेपो रेट पर तय होता है आपका ब्याज

भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट जारी करता है। इसके पीछे उसका महत्वपूर्ण शोध एवं अध्ययन होता है। इसी के आधार पर आपके बैंक बचत खातों का ब्याजदर एवं लोन पर वसूले जाने वाले ब्याज की दर तय होती है। 

रेपो रेट क्या होता है

रेपो रेट उस दर को कहा जाता है कि जिस पर रिजर्व बैंक व्यावसायिक बैंकों को अल्प अवधि का कर्ज देता है। बैंक जिस दर से कर्ज हासिल करते हैं, उससे ज्यादा दर पर कर्ज वितरित करते हैं लेकिन यह मनमाना नहीं हो सकता। आरबीआई इसके लिए समय समय पर गाइड लाइंस जारी करता है। 

रिवर्स रेपो रेट क्या होता है

रिवर्स रेपो रेट इसके उलट है जिसके आधार पर रिजर्व बैंक अन्य व्यावसायिक बैंकों से कर्ज लेता है। इस कर्ज पर रिजर्व बैंक ब्याज चुकाता है। बैंक को जो ब्याज प्राप्त होता है, उसमें अपना खर्चा और मुनाफा काटकर वो अपने ग्राहकों में वितरित कर देता है। लेकिन यह भी मनमाना नहीं हो सकता। आरबीआई इसके लिए समय समय पर गाइड लाइंस जारी करता है। 
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