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GWALIOR भारत बंद: 2 अप्रैल से फरार उपद्रवी नेता गिरफ्तार। SC/ST Act



GWALIOR: 2 अप्रैल को ग्वालियर-चंबल अंचल में उपद्रव भड़काने वाले एस-3(सम्यक समाज संघ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मास्टर माइंड लाखन सिंह बौद्ध को आगरा से गिरफ्तार कर लिया गया है। उपद्रव के 94 दिन बाद शनिवार की सुबह 6 बजे जब वह दिल्ली भागने की फिराक में था तभी ग्वालियर से पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे धर दबोचा। टीम दोपहर करीब 3 बजे उसे लेकर ग्वालियर आई। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया। जहां उसे 10 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। 
  
एससी एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में 2 अप्रैल को ग्वालियर-चंबल अंचल में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए उपद्रव में गिरफ्तार किए गए उपद्रवियों से पूछताछ में उसका नाम सामने आया था। इसका खुलासा सबसे पहले दैनिक भास्कर ने किया था। इसके बाद पुलिस ने लाखन सिंह बौद्ध पर 33 मामले दर्ज किए। तभी से वह फरार चल रहा था। हाल ही में उसने फिर से 9 अगस्त को आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके चलते उन लोगों की घेराबंदी शुरू कर दी गई, जिनकी भूमिका 2 अप्रैल को दंगा भड़काने में रही। क्राइम ब्रांच लाखन के मोबाइल और उसके सोशल मीडिया पर अपलोड हो रहे वीडियो, पोस्ट से उसकी लोकेशन खंगालने के साथ सात दिन से उसकी घेराबंदी में लगी थी।

भ्रष्टाचार में हुआ बर्खास्त तो जमीन कब्जाने आैर लोगों को भड़काने का करने लगा काम:ग्वालियर कलेक्टोरेट में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहे लाखन सिंह बौद्ध को भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त किया गया था। नौकरी जाने के बाद उसने जमीन कब्जाने आैर समाज की राजनीति के नाम पर लोगों को भड़काने का काम शुरू कर दिया। 2 अप्रैल को उसने मुरार, थाटीपुर, सिरोल, गोला का मंदिर के इलाकों में वर्ग विशेष के लोगों को यह कहकर भड़काया था कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण खत्म कर दिया है और अगर तोड़फोड़ नहीं की तो भविष्य खराब हो जाएगा। इसके बाद उसने बाहर से लाल कपड़े वालों को बुलाकर सभा भी कराई थी आैर खुद 2 अप्रैल से पहले ही भूमिगत हो गया था। उसके खिलाफ 33 केस दर्ज हैं। जबकि उसके संगठन का नेटवर्क 10 राज्यों में फैला है। भडकाऊ पोस्ट जारी कर वह एक बार फिर उपद्रव कराने की तैयारी में था। क्राइम ब्रांच की टीम अब उसके मददगारों को तलाश रही है। जेल जाते वक्त उसने कहा- अब जेल से आंदोलन होगा।

दिव्यांग होने से कोर्ट नीचे लगी:क्राइम ब्रांच दोपहर करीब 3 बजे लाखन को जिला न्यायालय लेकर पहुंची। जेएमएफसी राममनोहर दांगी की कोर्ट में उसे पेश किया गया। लाखन के दिव्यांग होने की वजह से कोर्ट नीचे लगी, जबकि जेएमएफसी कोर्ट द्वितीय मंजिल पर है। लाखन के पेश होते ही अभियोजन अधिकारी अभिषेक सिरोठिया ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का निवेदन किया। इसे स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने 10 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजा। अब 14 अगस्त उसे फिर पेश किया जाएगा।

न्यायाधीश ने उस पर दर्ज मामलों की जानकारी ली तो लाखन बोला कि मैं अगर दोषी हूं तो फांसी पर लटका दें। मेरे खिलाफ झूठे मामले दर्ज कर फंसाया गया है। इनकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने उससे पूछा कि वकील करना चाहते हो या नहीं। इस पर उसने वकील की मांग की।

लाखन कलेक्टोरेट की नजूल शाखा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था। 24 फरवरी 2018 को भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर उसे बर्खास्त किया गया था। उसने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट एसबी सिंह से नजूल एनआेसी के नाम पर 21 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। श्री सिंह ने जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत की। मामला साबित होने पर उसे बर्खास्त कर दिया गया। उसके खिलाफ जमीन घेरकर अंबेडकर की प्रतिमा लगवाने आैर इसी काम के लिए मिलावली, डबरा में जमीन घेरने के मामले भी हैं। 18 मामलों में पेश किया: शनिवार को उसे 18 मामलों में ही पेश किया। 17 अापराधिक मामले मुरार और 1 मामला थाटीपुर का है। अभी गोला का मंदिर, पड़ाव, विवि थाने में दर्ज मामले पेश होना बाकी हैं।
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