इन 6 विशेषताओं ने अध्यापक के बेटे को देश का सबसे लोकप्रिय व्यक्ति बनाया | Inspirational story

20 August 2018

नई दिल्ली। यदि किसी सामान्य नागरिक का बेटा उच्च पद तक पहुंच जाए तो उसकी योग्यता की प्रशंसा होती है परंतु किस्मत, संगत, अवसर और प्रतियोगिता को भी श्रेय ​दे दिया जाता है परंतु यदि एक व्यक्ति जो 9 साल तक किसी से ना मिले और उसकी मृत्यु पर सारा देश रो पड़े तो इसे क्या कहेंगे। जी हां, अपन बात अटलजी की ही कर रहे हैं। यह लोकप्रियता का वो रिकॉर्ड है जिसे सदियों तक तोड़ा नहीं जा सकेगा। सारा देश उस दौर में गमज़दा है जबकि लोग अपने पड़ौसी की शवयात्रा से कन्नी काट लेते हैं। 

ऐसे लोग आदर्श होते हैं। इनके जीवन से ही दुनिया जिंदगी के पाठ सीखती है। आइए हम बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी एवं मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी का बेटा अटल बिहारी वाजपेयी किन विशेष गुणों का कारण देश का इतना लाड़ला बन गया। 

सहृदयता | Good hearted
बड़े दिल का होना बहुत बड़ी बात होती है। हममें से तमाम लोग छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाते हैं। एक-दूसरे से मुंह फुला लेते हैं। इसका असर आपसी व्यवहार और कामकाज पर साफ झलक जाता है, पर अटल जी बार-बार कहते थे कि 'मतभेद' स्वाभाविक है, लेकिन इसकी वजह से 'मनभेद' नहीं होना चाहिए। उन्होंने न सिर्फ ऐसा कहा, बल्कि अपने जीवन में हर बार करके भी दिखाया। जाहिर है कि उनके इस स्वभाव की वजह से ही सब उनके दोस्त ही रहे, चाहे वे किसी भी विचार या दल में क्यों न हों। उनकी दुश्मनी किसी से नहीं रही। वैचारिक रूप से उनका कट्टर से कट्टर विरोधी भी व्यक्तिगत स्तर पर उनका मुरीद था। दरअसल, यह उनका जादू ही था कि वे किसी को नाराज होने का मौका नहीं देते थे। यह सहृदयता भी उनकी एक बड़ी सीख है।

निराशा से दूर | Away from despair
अटल जी का पूरा जीवन इस बात का गवाह है कि पराजय या मन का न होने के बावजूद निराशा कभी उन पर हावी नहीं हो सकी। चाहे एक वोट से सरकार गिरने की बात हो या चुनाव में हार की बात हो, उन्होंने सभी को बड़े सहज भाव से लिया। हार को भूलकर वह हमेशा आगे की ओर देखते थे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते थे, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि अगर वे पूरे मन और ईमानदारी से काम करते हैं, तो एक न एक दिन उन्हें जीत मिलेगी ही। अटल ऐसे ही अटल नहीं हो गए थे। उनके 'अटल' होने के पीछे लंबा संघर्ष भी था। यह युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि कैसे हार या निराशा को खुद पर हावी न होने देते हुए सकारात्मक नजरिए के साथ अपना कर्म करते रहें।

सुनने का धैर्य | Patience to listen
अटल जी एक ऐसे जननेता थे, जिनके पास कवि-हृदय था। हर कोई मानता है कि संभवत: यही करण है कि एक इंसान के रूप में वे बेहद संवेदनशील थे। अपनी ज्यादा कहने की बजाय उनमें दूसरों को सुनने का असीम धैर्य था। वे कम बोलते थे, पर जब बोलते थे तो अपनी धारदार बातों से हर किसी को निरुत्तर कर देते थे। चाहे सामने कोई भी हो। उनकी बातों में हंसी-ठिठोली भी होती थी और गूढ़ गहरी बातें भी। उनमें पद या शक्ति का कभी कोई अभिमान नहीं रहा। यह भी उनसे सीखने की बात है कि कैसे हम पहले इंसान हैं, जिसे पद या शक्ति की ताकत में चूर रहने की बजाय दूसरों के प्रति सदा इंसानियत का भाव रखना चाहिए।

सर्वस्वीकार्यता | All Acceptability
यह अटल जी के गुणों में सबसे ऊपर माना जा सकता है। यह भी उनका स्वभावगत गुण था। वे सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करते थे। यह गुण तभी आ सकता है, जब आप दूसरों से अपनी बात मनवाने से पहले उनकी बात सुनते और मानते रहे हों। इसके पीछे पारस्परिक विश्वास का भाव भी है। यही कारण है कि चाहे कोई राजनीतिक विरोधी हो या फिर किसी भी धर्म और संप्रदाय से जुड़ा व्यक्ति, हर कोई उनका प्रशंसक रहा। उन्हें पता था कि किससे किस तरह अपनी बात पर हामी भरवानी है।

वाकपटुता-हाजिरजवाबी | Good speaker-Quick answering
वे बोलने में जितने वाकपटु थे, हाजिरजवाबी में भी उतने ही तेज थे। चाहे संसद हो या चुनावी भाषण का मंच या फिर किसी लाइव इंटरव्यू में पत्रकारों के सवालों की बौछार ही क्यों न हो। वे बड़े संयम के साथ सामने वाले की बात या सवाल सुनते-गुनते और फिर अपनी खास अदा में मुस्कुराते हुए बड़ी सहजता और सरलता के साथ उसे लाजवाब कर देते। चुभने वाले सवालों को भी टालने की बजाय वे बड़े मजाकिया अंदाज में उत्तर दे देते। उन्हें खुद पर इतना विश्वास था कि सवाल-जवाब के सिलसिले में कभी-कभी वे खुद पर भी व्यंग्य करके हंसने का मौका दे देते थे। उनकी यह वक्तृत्व कला और हाजिरजवाबी की क्षमता भी हम सभी के लिए सीख हो सकती है।
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