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कमलनाथ ने अध्यापकों के सुर में सुर मिलाए, की नियमितीकरण की मांग

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रदेश के 2 लाख 84 हजार अध्यापकों के साथ धोखा किया है। विगत 29 मई को कैबीनेट में इन अध्यापकों के संविलियन का फैसला लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया था लेकिन जब आदेश जारी हुए तो उसे देखकर सभी अध्यापक अपने आप को ठगा महसूस करने लगे, क्योंकि यह आदेश संविलियन का न होकर नया कैडर बनाने का था।  श्री नाथ ने कहा कि इस दोषपूर्ण आदेश के कारण अध्यापकों की 20 से 22 वर्ष की वरिष्ठता समाप्त हो जायेगी। इसके अलावा जो अध्यापक 2005 के पूर्व भर्ती हुए थे वे रिटायरमेंट के बाद पेंशन के लाभ से वंचित हो जायेंगे। अध्यापकों के साथ मुख्यमंत्री ने अन्याय किया है। 

अध्यापक पिछले 5 वर्षों में 91 बार अपनी मांगों को मनवाने के लिए राजधानी में एकजुट हुए हैं। इस बार अपनी मांगों को लेकर पुनः एकत्र हुए हैं। हमारी कई महिला अध्यापक बहनों ने मांगे मनवाने के लिए मुंडन कराकर अपना सशक्त विरोध तक दर्ज कराया। इस विरोध के बाद ही मुख्यमंत्री ने संविलियन की घोषणा की थी।कमलनाथ ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह अध्यापकों को दिये गये आश्वासन और की गई घोषणा से एक बार फिर पलट गये। अध्यापकों की मांग थी कि उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ 01 जनवरी, 2016 से दिया जाये। लेकिन उन्हें वेतनमान का लाभ 01 जुलाई, 2018 से दिये जाने का निर्णय का वे विरोध कर रहे हैं। इस तरह मुख्यमंत्री शिवराजसिंह द्वारा उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाकर उनके साथ एक और धोखा होगा।  

श्री नाथ ने मांग की है कि यदि सरकार में जरा भी नैतिकता और वचनबद्धता शेष है तो वे अपने वायदे, घोषणा और निर्णय के अनुरूप अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन और उन्हें वेतनमान का लाभ 01 जनवरी, 2016 से दिये जाने का संशोधित आदेश तत्काल जारी करें। ताकि उनकी वरिष्ठता बनी रहे और आर्थिक नुकसान न हो। इसी तरह की खबरें नियमित रूप से पढ़ने के लिए MOBILE APP DOWNLOAD करने के लिए (यहां क्लिक करेंया फिर प्ले स्टोर में सर्च करें bhopalsamachar.com