MPCC नियुक्ति घोटाला: 3 भाजपाईयों को कांग्रेस का प्रवक्ता बना दिया

Monday, May 21, 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश में कमलनाथ ने अपना सारा सिस्टम तो हाईटैक कर लिया लेकिन कांग्रेस में पदों के वितरण में घोटाले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब तक सनसनीखेज प्रवक्ता भर्ती घोटाला सामने आया है। आरोप है कि मध्यप्रदेश के प्रभारी दीपक बावरिया, माणक अग्रवाल एवं मृणाल पंथ ने मिलकर 24 प्रवक्ताओं की भर्ती में गड़बड़ी की है। भर्ती से पहले यह देखा ही नहीं गया कि जिसे महत्वपूर्ण पद दिया जा रहा है उसका बैकग्राउंड क्या है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि 24 में से 3 भाजपा से संबंधित नेता हैं। दूसरी चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटालो का खुलासा करने वाले व्हिसल ब्लोअर एवं कांग्रेस नेता राहुल राठौर को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि नियुक्त किए गए कमलछाप प्रवक्ता कांग्रेस में ही हैं। पिक्चर का लास्ट सीन यह है कि इस मामले की जांच उन्हीं नेताओं को सौंपी गई है जो नियुक्ति में घोटाले के आरोपी हैं। 

दरअसल, रविवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नवनियुक्त प्रदेश व संभाग-जिला प्रवक्ताओं, मीडिया पेनलिस्ट को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर ट्रेनिंग दी गई थी। इस दौरान कांग्रेस में हुई प्रवक्ताओं की नियुक्ति में बीजेपी वर्करों के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई। इसकी शिकायत कांग्रेस के ही एक पुराने नेता राहुल राठौर ने कुछ दिन पूर्व शिकायत की थी कि प्रवक्ताओं की नियुक्ति में लापरवाही बरती गई है। शिकायत थी कि कांग्रेस प्रवक्ता बनाई गईं आशा जैन कांग्रेस के खिलाफ नगर निगम भोपाल का चुनाव लड़ चुकीं हैं।

दूसरे प्रवक्ता बनाए गए अविनाश बुंदेला के भाजपा कार्यकर्ता होने का आरोप लगाया गया साथ ही उनकी कुछ भाजपा कार्यक्रमों की तस्वीरों को भी वायरल किया गया। इस पर कांग्रेस अभी घिर ही रही थी कि प्रवक्ताओं को ट्रेनिंग दिए जाने के दौरान मीडिया ने वहां ट्रेनिंग ले रहे एक प्रवक्ता के बीजेपी से जुड़ाव रखने का मुद्दा उठा दिया।

अब्बास हफीज की कुछ भाजपा से जुड़ी तस्वीरों को दिखाते हुए मीडिया ने सवाल पूछे तो प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया की नींद उड़ गई। विवादों में फंसे बावरिया ने अपनी जान बचाने के लिए फिलहाल एक टीम गठित कर जांच के आदेश दे दिए हैं। 

कैसे हुई कमलछाप प्रवक्ताओं की भाजपा में एंट्री

बता दें कि प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने अपने ही एक करीबी और टेलेंट सर्च के प्रभारी मृणाल पंथ को चयन कमेटी का अध्यक्ष बनाया था। सूत्रों की मानें तो इनके साथ जिनको प्रवक्ताओं का चयन करना था उनमें शैलेन्द्र शियाल जो आईटी प्रोफेशनल हैं उनको इंटरव्यू की जिम्मेदारी सौंप दी गई। दिलचस्प बात यह रही कि यहां जिन लोगों ने इंटरव्यू लेकर प्रवक्ताओं का चयन किया उन्होंने इसके साथ ही खुद का भी चयन प्रवक्ता के लिए कर लिया। करीब पांच सैकड़ा इंटरव्यू के बाद दो दर्जन प्रवक्ताओं की सूची फायनल हो गई।

जिस पर गड़बड़ी का आरोप, उसी को सौंपी जांच

प्रवक्ताओं की नियुक्ति करने में जिन लोगों पर गड़बड़ी कर भाजपा के लोगों को भर्ती करने का आरोप था, अब वही लोग इसकी जांच करेंगे कि ये भूल कैसे हो गई। दीपक बावरिया इस पर कुछ भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उन्होंने जांच कमेटी का अध्यक्ष मानक अग्रवाल को बनाया है और मृणाल पंथ को भी कमेटी में शामिल किया है। 

व्हिसिल ब्लोअर कांग्रेस नेता को सस्पेंड कर दिया

चौंकाने वाली बात तो यह है कि राहुल राठौर नाम के जिस कांग्रेस नेता ने कमलछाप प्रवक्ताओं की भर्ती घोटाले की पोल खोली उसे ही सस्पेंड कर दिया गया। पिछले दिनों कमलनाथ ने कहा था कि जो भी पार्टी के हित में हो खुलकर करें मैं पीछे खड़ा हूं, परंतु इस मामले में दीपक बावरिया के साथ खुद कमलनाथ ही आरोपित हो गए। जबकि, राहुल राठौर कहते हैं कि उनको पार्टी से निलंबित किए जाने की कोई जानकारी नहीं है। निलंबन के पहले कारण बताओ नोटिस जारी होता है। उन्हें अभी तक न तो कोई नोटिस मिला है और न ही निलंबन की सूचना।

पहले भर्ती घोटाले की जांच करेंगे

मानक अग्रवाल कहते हैं, बीजेपी से जुड़े लोगों की प्रवक्ता के तौर पर कांग्रेस में नियुक्ति कैसे हो गई इसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद कार्रवाई भी की जाएगी। उनसे जब सवाल पूछा गया कि बीजेपी से जुड़े प्रवक्ताओं की नियुक्ति की शिकायत राहुल राठौर ने की थी, लेकिन उनकी शिकायत के बाद पार्टी ने उन्हें ही क्यों पार्टी से निलंबित कर दिया, इस पर मानक का कहना था कि उन्होंने पार्टी का अनुशासन तोड़ा है। सोशल मीडिया पर इस मैसेज को जारी किया। इससे पार्टी की बदनामी हुई है। जिसके बाद उनको पार्टी से बाहर कर दिया गया। 

कमलनाथ के रहते बावरिया कैसे कर रहे हैं नियुक्तियां

पार्टी के भीतर अब इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब कमलनाथ को नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है तो फिर प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया कैसे संगठन में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। प्रवक्ताओं की नियुक्ति बावरिया के इशारे पर ही की गई और इसमें गड़बड़ी सामने आने पर कांग्रेस की किरकिरी हो गई। कमलनाथ भी इस पर खामोश हैं। फिलहाल पार्टी में भले ही प्रदेश स्तर पर बदलाव हो गया हो, लेकिन अंदर ही अंदर सबकुछ ठीक नहीं लगता है।

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