ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: जमीन के नीचे दबा मिला सदियों पुराना मंदिर | MP NEWS

Monday, April 2, 2018

ओंकारेश्वर। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में सभामंडप निर्माण के लिए खुदाई के दौरान प्राचीन मंदिरनुमा एक कक्ष निकला है। मुख्य मंदिर के गर्भगृह के निकट मंदिर निकलने की चर्चा नगर में फैलने के बाद लोगों की भीड़ जमा होने से फिलहाल खुदाई का कार्य रोक दिया गया है। प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है। वहीं इसे लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई है।

सीढ़ियों के नीचे मिली सुरंग
ओंकारेश्वर आने वाले तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के साधारण द्वार के समक्ष भगवान नंदी की मूर्ति के निकट सभामंडप का निर्माण करने के लिए खुदाई की जा रही है। मंदिर में प्रवेश के लिए बनी सीढ़ियों को खोदने पर उनके नीचे सुरंग नजर आई। जिसे और खोदने पर करीब 8 बाय 8 का मंदिर जैसा कमरा मिला है। इसे लेकर मंदिर के पंडित, पुजारी और तीर्थनगरीवासियों में उत्सुकता है।

पता लगाएंगे कितना पुराना है यह निर्माण
खुदाई में मंदिर निकलने की सूचना पर पुनासा एसडीएम अरविंद चौहान ने पुरातत्व और पर्यटन विभाग के स्थानीय अधिकारियों के साथ मंदिर पहुंचकर जायजा लिया। पूरे क्षेत्र को आमजन के लिए प्रतिबंधित कर पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर बुलाया गया है। उनके आने पर आगे की कार्रवाई कर भवन के इतिहास का पता लगाया जाएगा।

पहले भी निकल चुके हैं प्राचीन मंदिर और मूर्तियां
पंडा संघ के अध्यक्ष पंडित नवल किशोर शर्मा ने कहा कि भगवान ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में अनेक मंदिर दबे हुए हैं। खुदाई के दौरान पहले भी मंदिर और मूर्तियां निकल चुकी हैं। जेपी कंपनी द्वारा पूर्व में इसी स्थान पर खुदाई की थी तब भगवान की प्राचीन मूर्तियां निकली थी। यह मंदिर भी अति प्राचीन होगा। यह गर्भगृह से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए इसे तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए बंद कर दिया होगा। इसकी पूरी सावधानी से खुदाई होना चाहिए। शर्मा ने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। विकास हो लेकिन मंदिर की मर्यादाओं का खयाल रखते हुए किया जाए।

मंदिर के सायंकाल पुजारी पंडित डंकेश्वर दीक्षित ने कहा कि समय-समय पर मंदिरों का जीर्णोद्धार होता रहा है। आदिगुरु शंकराचार्यजी के समय जब बौद्घ धर्म का अधिक प्रभाव था उस समय भी मंदिर का जीर्णोद्घार किया गया था। पूरे मंदिर क्षेत्र में अनेक शिव मंदिर हैं। यहां निर्माण कार्य और खुदाई सावधानीपूर्वक होनी चाहिए। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं है। यहां स्थित स्वयंभू भगवान ओंकारेश्वर देश के बारह ज्यातिर्लिंगों में से एक हैं।

मंदिर नहीं है, बस कमरा है
ज्योतिर्लिंग मंदिर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और पुनासा एसडीएम अरविंद चौहान ने कहा कि प्रसादम योजना अंतर्गत श्रद्घालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में सभामंडप का निर्माण किया जाना है। इसके लिए सीढ़ियों के नीचे खुदाई के दौरान एक कमरेनुमा स्थान निकला है। इसमें मंदिर या मूर्ति नजर नहीं आती है। इसे क्यों बंद किया गया और मुख्य मंदिर के आसपास बने मंदिरों में किसी का हिस्सा तो नहीं है, यह सभी जानकारी पुरातत्व विभाग की जांच से स्पष्ट हो सकेगा। लोग किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं दें। निर्माण कार्य मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और पुरातत्व विभाग की देखरेख में हो रहा है।

कलेक्टर को कुछ पता ही नहीं था
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 में ओंकारेश्वर बांध का निर्माण करने वाली कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स ने ओंकारेश्वर मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार किया था। उस समय भी मंदिर के आसपास काफी पुराने मंदिर व मूर्तियां मिली थीं। कई मूर्तियां तो आज भी मंदिर परिसर में सुरक्षित रखी हुई हैं। लोगों का कहना है कि ओंकारेश्वर मंदिर का जीर्णोद्घार हो तथा श्रद्घालुओं को सुविधाएं मिलें लेकिन मंदिर की सुरक्षा और लोगों की आस्था का खयाल रखा जाना चाहिए। कलेक्टर अभिषेकसिंह ने कहा कि मंदिर में काम चल रहा है लेकिन खुदाई में मंदिरनुमा कक्ष निकला है, इसकी जानकारी नहीं है। मैं पता करता हूं।

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