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आदिवासी किसी भी परिस्थिति में नहीं बेच सकेंगे जमीन: सहरिया क्रांति से खुलीं सरकार की आंखें | mp news

24 March 2018

भोपाल। आजादी के बाद से ही अनदेखी का शिकार होते रहे सहरिया समुदाय के दिन फिरना शुरू हो गए हैं, अब आने वाले समय मे कुछ नया सहरिया समाज नजर आएगा। ग्वालियर चम्बल सम्भाग में सहरिया क्रांति आंदोलन से इस समुदाय में  आई जाग्रति ने सरकार का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है, अब शिवराज  सरकार युद्ध स्तर पर सहरिया आदिवासियों के उत्थान को बेचैन दिखाई दे रही है। सहरिया क्रांति के मांगपत्र में शामिल हर बिंदु का सरकार बारीकी से अध्धयन कर रही है, और खास बात यह कि  उनसे सहमत नज़र आ रही है। हाल ही हुई बैहक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। 

जिसे देखो वह अदिवासियों की जमीनों पर गिद्ध दृष्टि लगाए रहता था पर अब प्रदेश में आदिवासियों की जमीन किसी भी परिस्थिति में नहीं बिक सकेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार नया कानून बनाने की तैयारी में है। नए कानून में उन प्रावधानों को और सख्त किया जाएगा, जिनका फायदा उठाकर दूसरे वर्ग के लोग उनकी जमीन को खरीद लेते हैं। हालांकि, अभी भी आदिवासियों की जमीन बेची-खरीदी नहीं जा सकती है, लेकिन कुछ नियमों में से रास्ता निकालकर उनकी जमीन की खरीद-फरोख्त कर ली जाती है। इसमें अभी आदिवासी की शादी दूसरी जाति में होने पर जमीन का हस्तांतरण हो जाता है। इसके अलावा आदिवासी की जमीन को लीज पर लेकर भी काम कर लिया जाता है। इस तरह के मामले सामने आने के बाद सरकार अब ऐसे सख्त प्रावधान करने जा रही है जिससे की किसी भी तरह से खरीद-फरोख्त की कोई गुंजाइश न रहे।

वनाधिकार पट्टों का भी होगा वितरण
आदिम जाति मंत्रण समिति की बैठक में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक से 30 अप्रैल तक परीक्षण करें और एक से 30 मई तक वनाधिकार पट्टे बांटें। पेड़ों की कटाई के नियम सरल करें। शहरी क्षेत्रों के आवारा पशुओं को आदिवासी क्षेत्रों में खेती के उपयोग के लिए देने के सुझाव पर काम करें।

अवैध शराब की खुलेआम होती है बिक्री
बैठक में विधायकों ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में अवैध शराब खुलेआम बिकती है। कई जगह आदिवासी खुद भी अवैध शराब बनाने में शामिल रहते हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब की बिक्री को सख्ती से रोका जाए। जनजाति के लोगों के विरुद्ध चल रहे छोटे प्रकरण अभियान चलाकर वापस लिए जाएं। यह सुनिश्चित करें कि आदिवासी महिला छात्रावासों में अधीक्षक महिला ही रहें। आवश्यकता हो तो भर्ती करें। पेसा एक्ट और पांचवी अनुसूची की सही व्याख्या के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी।

यह भी लिए गए निर्णय
पट्टाधारी को सामान्य किसान की तरह सुविधा मिले। इसके लिए समिति बनेगी।
जनजाति श्रद्धा स्थलों की विकास योजना बनाई जाए।
जनप्रतिनिधि पट्टा परीक्षण में शामिल रहे।
पट्टा देने के बाद संबंधितों को नक्शा भी उपलब्ध हो।
जनजाति परिवार के बच्चों के लिए आश्रम छात्रावास खोले जाएं।
बैकलॉग पदों की पूर्ति के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा
कम लागत वाले कामों को एकीकृत परियोजना के जरिए कराने की बात कही है ।सहरिया क्रांति के जनक संजय बेचैन का कहना है कि व्यसं मुक्ति के बाद अदिवासोयों कि हुंकार ने देश मे नए परिवर्तन की संभावना को जन्म दिया है । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के प्रमुख एजेंडे में सहरिया कल्याण शामिल है , जो सराहनीय है । सहरिया के उत्थान में सहरिया क्रांति की भूमिका बेहद सराहनीय रही है।



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