पुलिस कब तक बचा पाएगी मंत्री रामपाल और उनके बेटे को | MP NEWS

Saturday, March 24, 2018

भोपाल। प्रीति रघुवंशी आत्महत्या मामले में अब तो पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि मप्र पुलिस शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्री रामपाल सिंह एवं उनके बेटे गिरजेश प्रताप सिंह का खुला बचाव कर रही है परंतु सवाल यह है कि पुलिस उन्हे कब तक बचा पाएगी। कानून के जानकारों का कहना है कि यदि पीड़ित पक्ष 156 (3) सीआरपीसी के तहत कोर्ट में पिटीशन लगा दे तो पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी ही होगी। इतना ही नहीं जिस परिवार से शादीशुदा गिरजेश प्रताप सिंह की सगाई हुई है, यदि वो चाहे तो धारा 419 के तहत एफआईआर करवा सकता है। 

बता दें कि प्रीति रघुवंशी के पिता ने पुलिस पर खुला आरोप लगाया कि उदयपुरा में उनके बयान दर्ज नहीं किए गए और भोपाल में उनसे बेतुके सवाल पूछे गए। ऐसे सवाल जिनका सुसाइड केस से कोई रिश्ता ही नहीं था। कानून के जानकारों की माने, तो पुलिस एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी करती है, तो परिजन कोर्ट में न्याय की गुहार लगाकर एफआईआर की कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। 

रायसेन जिले के उदयपुरा में 17 मार्च को प्रीति रघुवंशी ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। मंत्री रामपाल सिंह के बेटे गिरजेश प्रताप सिंह ने 20 जून 2017 को भोपाल के नेहरू नगर आर्य समाज मंदिर समिति में आर्य विवाह एक्ट-1937 के अंतर्गत शादी की थी।

आरोप है कि गिरजेश ने प्रीति को अपनाने का कहकर उसके चार-पांच वैवाहिक रिश्तों को तुड़वा दिया था। साथ ही गिरजेश और उसके परिवार की तरफ से प्रीति और उसके परिजनों को धमकाया और प्रताड़ित भी किया जा रहा था। गिरजेश ने दूसरी सगाई भी कर ली थी। जब ये जानकारी प्रीति को पता चली, तो उसने खुदकुशी कर ली।

इस मामले में उदयपुरा पुलिस ने अभी तक एफआईआर दर्ज नही की है। बयान के नाम पर परिजनों को परेशान किया लेकिन जब मामले में राजनीति शुरू हुई, तो प्रदेश में भूचाल आ गया। कांग्रेस ने साथ दिया, तो डीजीपी के निर्देश के बाद प्रीति के पिता, मां और भाईयों के भोपाल में बयान दर्ज हुए. अब इन्हीं बयानों के बाद रामपाल और उनका बेटा एफआईआर की फेर में आ गया है।

यदि परिजनों के बयान के बाद भी रायसेन पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो परिजन कोर्ट में न्याय की गुहार लगा सकते हैं। कोर्ट के जानकारों का कहना है कि मामले में एफआईआर दर्ज होनी ही चाहिए। यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो कोर्ट मामले की सुनवाई करते हुए तमाम सबूतों के आधार पर 156 (3) सीआरपीसी के तहत पुलिस को एफआईआर के आदेश दे सकता है। ये दावा जानकारों ने इसलिए किया है, क्योंकि मामले में सबूत पर्याप्त हैं, जो ये सबित करते हैं कि मामले में राजनीति दबाव के कारण केस दर्ज नहीं किया जा रहा है।

पहली शादी होने के बाद यदि गिरजेश की सगाई टूटती है, तो धारा 419 छल करने के तहत सगाई करने वाला पक्ष भी मंत्री रामपाल और उसके बेटे पर एफआईआर दर्ज करा सकता है। अब रामपाल सिंह और उनका बेटा इस मामले में बुरी तरह से फंस गया है और ऐसे में पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर होना तय मानी जा रही है।

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