DELHI से आया बजट BHOPAL में अटका, CDTP प्रशिक्षण केन्दों पर लगे ताले | KHULA KHAT@ DEEPAK JOSHI MINISTER

Updesh Awasthee
माननीय तकनीकी शिक्षा मंत्री दीपक जोशी जी, युवाओं को रोजगारमुखी प्रशिक्षण देकर उन्हे अपने पैरों पर खड़े होने का गुर सीखाने वाले हजारों प्रशिक्षक, स्टाफ महीनों से वेतन के आभाव में निरंतर काम कर रहे इन कर्मचारियों की सुध केन्द्र सरकार नहीं ले रही। वेतन देने के बदले अब इन कर्मचारियों के प्रशिक्षण केन्द्रों पर ताले लगवाए जा रहे है। आने वाले समय में लाखों बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण मिलना बंद हो जाएगा प्रशिक्षण देने वाले भी बेरोजगार हो जाएगें। 

यह उस सरकार में हो रहा है जो रोजाना युवाओं का अपने पैरे पर खड़े होकर स्वयं का रोजगार खोलने की नसीहत देती है। युवाओं को और अधिक प्रशिक्षण देने के लिए देशभर में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू कर गली-गली में प्रशिक्षण केन्द्र खोल रही है। वहीं सरकार वर्षो वर्ष से प्रशिक्षण का गुर सीखा रहे प्रशिक्षकों को भूखे मरने के लिए छोड रही है। केंद्र ने तो पिछले साल 2016 में दिसंबर में राशि जारी कर दी थी पर प्रदेश सरकार राशि जारी नही कर रही जिसके कारण योजना बन्द होने की कगार पर आ गई। 

यह पर बात हो रही है देश के २८ राज्यों के ५२० पालीटेकिनक महाविद्यालय के माध्यम से संचालित कमयुनिटी थ्रू डेव्लपमेंट पालीटेकिनक योजना सीडीटीपी की, जिसके माध्यम से बेरोजागारों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रतिवर्ष लाखों युवा बेरोजगार प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़े होते है। वर्षो वर्ष से संचालित इस योजना में अल्प वेतन पर काम कर रहे प्रशिक्षक और स्टाप ने कभी वेतन बढ़ाने की मांग तक नहीं कि। खामोशी से अपना काम करते रहे, इसी उममीद से कि कम से कम समय पर वेतन मिलते रहे। लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार को उनकी नजर लग गई। दो वर्ष से बिना बजट से योजना संचालित की गई और अब इस योजना पर ताले लगाए जा रहे है। दो वर्ष तक बिना वेतन के काम करने वाले कर्मचारियों के आगे भूखों मरने की स्थिति पैदा हो गई है। 

वेतन मिलने की आस में अब तक उधारी में जीवन चलाया लेकिन कार्यालयों में ताले लटने से भविष्य की ङ्क्षचंता सताने लगी है। बिना वेतन के केन्द्र सरकार ने दो साल तक पूरा काम लिया। अब खामोश है, अपने वेतन के लिए कर्मचारियों ने सैकड़ो पत्र केन्द्र सरकार को लिखा, हमेशा जवाब यह आया जल्द आबंटन आ रहा है, पर इतनी देर हो गई कि महीने पूरा साल निकल गया। परेशान पॉलीटेकिनक प्राचार्यो ने योजना पर अंतिम आदेश या कहे वेतन नहीं मिलने तक ताले लगाने की घोषण कर दी। 
हेमेंद्र श्रीरसागर

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