RAJASTHAN के 125 विधायकों को फिर टिकट दिया तो हार जाएंगे | NATIONAL NEWS

Saturday, February 3, 2018

नई दिल्ली। राजस्थान में भाजपा को पहला तीन तलाक 'अलवर, अजमेर और मांडलगढ़' मिल चुका है। अब हालात चिंता से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। राजस्थान की जनता के मूड पर किया गया एक अध्ययन बताता है कि यहां की जनता अपने विधायक को दूसरा मौका नहीं देती। भजपा के पास 160 विधायक हैं, यदि सभी को वापस टिकट दे दिए गए तो केवल 28 ही जीत पाएंगे, 125 विधायक हार जाएंगे और इसी के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का 180 प्लस का सपना भी टूट जाएगा। 

सियासी ट्रेंड दो संकेत देता है। पहला, सत्तारूढ़ दल की वापसी नहीं होती। दूसरा, चुनाव मैदान में उतरने वाले सत्तापक्ष के मौजूदा विधायकों में से महज 17 फीसदी तक ही वापस जीतते हैं। सत्ता वापसी की बात तो दूर, इस ट्रेंड के हिसाब से मुकाबले में आने के लिए ही बीजेपी के पास नए चेहरे उतारना ही एक विकल्प बचता है। सियासी जानकारों का भी यही कहना है। सत्ता पक्ष के विधायकों की एंटीइनकमबेंसी का सबसे बड़ा उदाहरण अलवर लोकसभा सीट रही।

BJP की हारी हुई 3 सीटें क्यों हैं अहम?
यहां हुए उपचुनाव में मौजूदा विधायक और कैबिनेट मंत्री जसवंत यादव बतौर प्रत्याशी इस लोकसभा सीट पर तो हारे ही, अपनी विधानसभा सीट बहरोड़ पर भी बढ़त कायम नहीं रख पाए। कहने को तो ये सिर्फ तीन सीटें हैं लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि ये सीटें आसपास के सात जिलों को सियासी तौर पर प्रभावित करती हैं। ये सात जिले प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों का एक चौथाई हिस्सा कवर करते हैं। आइए जानते हैं क्या है पिछले चार विधानसभा चुनाव का ट्रेंड: 

11वीं विधानसभा (1998 से 2003) :कांग्रेस की सरकार बनी
इससे पहले के चुनाव में बीजेपी के 124 विधायकों के साथ सत्ता में आई थी लेकिन 1998 में उसके 33 विधायक ही जीते। इनमें से भी 19 विधायक ही दोबारा जीतकर आए। यानी 124 विधायकों का 15.88%।

12वीं विधानसभा (2003 से 2008): बीजेपी की सरकार बनी
इससे पहले के चुनाव में कांग्रेस 152 विधायकों के साथ सत्ता में आई थी। 2003 के चुनाव में उसके सिर्फ 56 विधायक ही चुनाव जीत पाए। इनमें दोबारा चुने गए 26 विधायक 152 के 17% यानी 26 रहे।

13वीं विधानसभा (2008 से 2013): कांग्रेस सत्तारूढ़ हुई
इससे पहले के चुनाव में बीजेपी 120 विधायकों के साथ सरकार में आई थी। 2008 में चुनाव हुए तो 78 विधायक ही चुनकर आए। इनमें दोबारा चुने गए विधायकों की संख्या 14.5% यानी 17 थी।

14वीं विधानसभा (2013 से...): बीजेपी की सरकार
इससे पहले कांग्रेस 102 विधायकों के साथ सत्ता में आई। इनमें 6 विधायक उसे सपोर्ट करने वाली बीएसपी के थे। 2013 के चुनाव में कांग्रेस के कुल 21 विधायक चुनकर आए जिनमें दोबारा चुनकर आने वालों की संख्या 7 रही।

एंटीइनकंबेंसी और नाराजगी है हार की असली वजह
आकंड़ों पर गौर करें तो साफ हो जाता है कि एंटीइनकमबेंसी और मौजूदा विधायक से नाराजगी के कारण सत्तापक्ष के ज्यादातर विधायक दोबारा जीतकर नहीं आते।
5% तक माैजूदा विधायक जनता से जुड़ाव व लोकप्रियता के कारण फिर चुने जाते हैं।

इसी ट्रेंड को मानें तो...मौजूदा विधायकों में से बीजेपी के 28 ही जीतेंगे
राजस्थान में पिछले 20 साल के जनता के मिजाज और विधानसभा में दोबारा जीतकर पहुंचे विधायकों की संख्या के ट्रेंड को देखते हुए कहा जा सकता है कि नए चेहरों के बिना सत्तारूढ़ बीजेपी मुकाबले की स्थिति में नहीं आ सकती। पिछले चार विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा फिर से चुनकर पहुंचे विधायकों के मैक्सिमम 17% के आंकड़े को भी आधार माना जाए तो बीजेपी के मौजूदा 160 विधायकों में से ज्यादा से ज्यादा 28 विधायकों के ही फिर से जीतकर आने के आसार हैं।

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