RSS के क्षेत्रीय प्रचारक अरुण जैन को सपाक्स का जवाब | MP NEWS

30 January 2018

भोपाल। दिनांक 29.01.2018 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रिय प्रचारक, श्री अरूण जैन द्वारा अपने अनुबोधन में यह आरोप लगाया कि’ आरक्षण को लेकर मध्यप्रदेश में इन दिनों दो परास्पर विरोधी आंदोलन चलाये जा रहे हैं जिनकी फडिंग एक ही विचारधारा के लोगों द्वारा की जा रही है’। उन्होंने ये भी कहा की कुछ लोग जातियों को आपस में लड़वाने का कार्य कर रहें हैं। सपाक्स ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रिय प्रचारक की जानकारी के लिए पूरे मामले को संक्षिप्त में दोहराया है। सपाक्स से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 30 अप्रैल 2016 को अपने निर्णय में पदोन्नति में आरक्षण के मध्यप्रदेश शासन के नियमों को असंवैधानिक ठहराकर निरस्त कर दिया गया था। 

भाजपा सरकार ने दिया है जातिवाद को सरकारी पोषण
मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार द्वारा उक्त निर्णय का पालन नहीं किया गया एवं न्यायालय में जीत के बाद भी सपाक्स इस मुद्दे पर निरंतर संघर्षरत है। इस प्रकरण में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर मध्यप्रदेश शासन एक वर्ग विशेष के हितों के लिये न सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय गया बल्कि एक संगठन विशेष को सभी प्रकार की सुविधांए मुहैया करवाई गई। यहां तक की न्यायालयीन संघर्ष हेतु करोड़ों रूपये का बजट स्वीकृत कर वर्ग विशेष की अनापेक्षित रूप से आर्थिक मदद् की गई। 

किसी दल या विचारधारा से सपाक्स का कोई रिश्ता नहीं
जहॉ तक सपाक्स संस्था का प्रश्न है यह सर्वविदित है कि प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल सपाक्स के मुददे का समर्थन नहीं करते हैं। सपाक्स का संघर्ष अधिकारियों/ कमर्चारियों का है और उनके द्वारा ही पोषित है। संगठन द्वारा किसी भी दल अथवा विचारधारा से न तो किसी प्रकार का अर्थिक न ही कोई बौद्धिक सहयोग लिया जा रहा है। 

सपाक्स ने चर्चा के लिए RSS को भी बुलाया था
संस्था यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि अपने मुददों पर विस्तार से चर्चा करने हेतु संस्था द्वारा न सिर्फ शासन बल्कि दोनों प्रमुख दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को भी अनेक बार लिखा जा चुका है एवं तथ्यों से अवगत कराया गया है। यहॉ यह भी स्पष्ट करना संस्था उचित समझती है कि संस्था ने कभी भी आरक्षण का विरोध नहीं किया है बल्कि संस्था की मांग संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत माननीय न्यायालयों के निर्णयों के अनुरूप आरक्षण व्यवस्था युक्तियुक्त रूप से लागू किये जाने की रही है। संस्था मात्र उन गलत नीतियोें का विरोध कर रही है जो संविधान की आड़ में बहुसंख्यक वर्ग का अहित करने के उद्देश्य से अपनायी गई है। 

सपाक्स के सदस्य पद का दुरुपयोग नहीं करते
संस्था द्वारा अपने प्रखर विरोध के बावजूद सामाजिक समरसता बिगाडने अथवा सामान्य शासकीय प्रक्रियायों/ व्यवस्थओं में कभी भी किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने की कोई भी गतिविधि नहीे की है। निर्धारित संवैधानिक दायरोें और पूर्ण अनुषासन में रहकर ही संस्था अपने न्यायिक अधिकारों के लिये लड़ रही है। संस्था, विनम्रता से पुनः शासन से अनुरोध करती है कि न्यायपूर्ण कार्यवाही करते हुए तत्काल वह कदम उठाये जिससे वर्तमान गंभीर हालातों में सुधार हो।

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