सब इंजीनियर भर्ती में डिप्लोमा अमान्य के खिलाफ ज्ञापन | MP NEWS

Tuesday, January 16, 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित द्वारा प्रदेश स्तर के समाचार पत्रों तथा निगम की वेबसाइट पर संविदा के आधार डिप्टी मैनेजर (उपयंत्री) के कुल 44 पदों पर नियुक्ति हेतु प्रसारित विज्ञापन में न्यूनतम वांछित शैक्षणिक योग्यता शासन के नियमो में निर्धारित सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के स्थान पर बी.ई./बी.टेक(सिविल) तथा विगत तीन वर्षो में गेट परीक्षा के अंक निर्धारित किये जाने को शासन के निर्धारित नियमों तथा रोजगारोन्मुखी योजना के प्रतिकूल होने के संबंध में म.प्र डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने अपना ज्ञापन प्रमुख सचिव, म.प्र. शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग तथा  प्रबंध संचालक, म.प्र. जल निगम मर्यादित, भोपाल, मुख्य महाप्रबंधक म.प्र. जल निगम मर्यादित, भोपाल से भेंट कर आज दिनांक 16.01.2018 को प्रस्तुत किया। 

संघ ने अपना पक्ष रखते हुए अधिकारियों को अवगत करवाया कि मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  विभाग के अन्तर्गत गठित एक कंपनी है जो मध्यप्रदेश शासन के समस्त नियमों उपनियमों,अधिनियमों के अनूकुल ही कार्यरत है। अत: मध्यप्रदेश शासन के भर्ती नियमो में उपयंत्री पद हेतु निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ‘‘ मान्य प्राप्त शासकीय संस्था से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा’  ही मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित द्वारा विज्ञापित पदों में भी निर्धारित की जाए। प्रतिनिधि मंडल ने बताया की मध्यप्रदेश शासन में सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा का प्रदाय शासन के तकनीकी शिक्षा विभाग के अन्तर्गत संचालित लगभग 140 पोलिटेक्निक संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है। 

अनुमानत: न्यूनतम 50 छात्र प्रतिवर्ष प्रति पोलिटेक्निक से सिविल इंजीनियर डिप्लोमा प्राप्त करते हैं। ऐसी स्थिति में प्रति वर्ष लगभग 5000 डिप्लोमाधारी उम्मीदवार छात्र मध्यप्रदेश शासन में ही संचालित पोलिटेक्निक संस्थाओं में उपलब्ध होते है। इन डिप्लोमाधारी उम्मीदवारों हेतु मध्यप्रदेश शासन की शासकीय सेवा हेतु मात्र उपयंत्री का पद ही उपलब्ध होता है। अत: मध्यप्रदेश शासन की कंपनी के द्वारा इन डिप्लोमाधारी उम्मीदवारों हेतु निर्धारित पदों  को बी.ई/बी.टेक धारी उम्मीदवारों से भरकर डिप्लोमाधारी उम्मीदवारों के साथ अन्याय किया जा रहा है। यह शासन की कोशल विकास योजना के अंतर्गत रोजगार उपलब्ध कराने की मंशा के भी प्रतिकूल है। 

यह स्थिति रहने पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित पोलीटेक्नीक संस्थाओं को निरंतर चालु रखना ही ओचित्यहीन तथा अनुपयोगी होगा। प्रमुख सचिव , म.प्र. शासन , लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग तथा  प्रबंध संचालक, म.प्र. जल निगम मर्यादित, भोपाल, एवं मुख्य महाप्रबंधक म.प्र. जल निगम मर्यादित , ने संघ  के प्रतिनिधि मंडल को उक्त संबंध में विचार कर यथोचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल में संघ के प्रान्ताध्यक्ष ई. श्री देवेन्द्र सिंह भदोरिया, महामंत्री ई. श्री आर .के. एस. तोमर, उपप्रान्ताध्यक्ष ई. श्री अरविन्द गोयल, एवं संघ की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभागीय समिती के अध्यक्ष, ई. श्री मुकेश खरे, एवं सचिव, ई. श्री विमल कुमार शर्मा शामिल थे।

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