NAREMDRA MODI: गुजरात में 50 रैलियां करेंगे, बिहार में 31 कीं थीं

Sunday, December 3, 2017

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में भाजपा कि किरकिरी होने से बचाने के लिए हर आखरी जोर लगा रहे हैं। उनके प्रधानमंत्री बनने से लेकर अब तक कुल 17 राज्यों में चुनाव हुए परंतु कहीं भी मोदी की इतनी रैलियां नहीं हुईं। अब तक सबसे ज्यादा 31 रैलियां मोदी ने बिहार में की थीं लेकिन मोदी अपने घर गुजरात में 50 रैलियां कर रहे हैं। बता दें कि गुजरात में आचार संहिता (Code of conduct) लगने से पहले मोदी ने 16 प्रोग्राम किए थे। इस दौरान करीब 14 हजार करोड़ रुपए की स्कीमों का एलान किया गया। 

बिहार में की थीं सबसे ज्यादा रैली
पीएम बनने के बाद 17 राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान आचार संहिता लगने के बाद मोदी ने 170 रैलियां की हैं। इनमें सबसे ज्यादा 31 रैलियां 243 सीटों वाले बिहार में की थीं। रविवार से मोदी फिर दो दिन तक गुजरात में रैलियां करेंगे। वे भरूच और सुरेन्द्रनगर के अलावा सीएम विजय रूपाणी के चुनाव क्षेत्र राजकोट पश्चिम में रैलियां करेंगे।

गुजरात में मोदी की ताबड़तोड़ रैलियों की वजह
मोदी के गुजरात से जाने के बाद राज्य में राजनीतिक हालात अस्थिर हैं। राज्य में दलितों पर हिंसा के खिलाफ और आरक्षण के लिए पाटीदार समुदाय के आंदोलन हुए। पुलिस की कार्रवाई में 14 पाटीदार युवा मारे गए। इन आंदोलन में हार्दिक पटेल पाटीदार समाज के बड़े नेता बनकर उभरे। दलितों को जिग्नेश मेवाणी के तौर पर युवा नेता मिला। अल्पेश ठाकोर ओबीसी नेता बनकर उभरे। 

इन आंदोलनों के ठीक बाद पंचायत चुनाव हुआ। इसमें 31 ताल्लुकाओं में बीजेपी को सिर्फ 10 पर ही जीत मिली। जिला पंचायत चुनाव में भी पार्टी को बुरी तरह से हार मिली। डैमेज कंट्रोल करने के लिए पार्टी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को भी हटा दिया। उनकी जगह विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाया। सबसे बड़ी वजह यह है कि अगर बीजेपी गुजरात में हारती है तो इसका मैसेज पूरे देश में जाएगा। क्योंकि गुजरात मॉडल की हवा पर ही मोदी पीएम बने थे। ऐसे में गुजरात हारने से अपोजिशन का उत्साह बढ़ेगा। इससे बिखरा हुआ विपक्ष एकजुट होगा। 2019 में मोदी के सामने चुनौती बढ़ेगी।

मोदी ने अभी तक गुजरात में 8 रैलियां की हैं
मोदी ने गुजरात में विधानसभा चुनाव का एलान होने के बाद से अभी तक 8 रैलियां की हैं। पहले फेज की वोटिंग से पहले वे अभी और जिलों में चुनावी रैलियों को एड्रेस करेंगे।

मोदी ने 17 राज्यों में रैली की, 9 में जीत मिली
महाराष्ट्र 27, हरियाणा 11, जम्मू-कश्मीर 06, झारखंड 14, दिल्ली 05, बिहार 31, तमिलनाडु 04, पश्चिम बंगाल 10, केरल 03, पुड्डुचेरी 01, असम 15, पंजाब 04, गोवा 03, मणिपुर 03, उत्तर प्रदेश 24, उत्तराखंड 04, हिमाचल 07 और गुजरात 08 (02 दिसंबर तक)

महाराष्ट्र में: ना खाउंगा, ना खाने दूंगा
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूट गया था। ऐसे में मोदी ने कमान संभाली। 27 रैलियां की। बीजेपी को 100 से ज्यादा सीटें मिली। वहीं सोनिया गांधी ने चार और राहुल ने छह रैलियां की थीं। 
थीम: करप्शन का मुद्दा उठाया। लगभग हर रैली में कहा, ‘ना खाउंगा, ना खाने दूंगा, ना सोऊंगा, ना सोने दूंगा।’

बिहार में सवा लाख करोड़ का पैकेज
बिहार: मोदी ने रैलियों की और सवा लाख करोड़ के पैकेज का एलान किया। बिहार में जदयू, राजद और कांग्रेस के महागंठबंधन के खिलाफ मोदी ने ही कमान संभाली थी। लेकिन पार्टी को दिल्ली के बाद यहां दूसरी सबसे बड़ी हार मिली। 
थीम: नीतीश पर तंज कसते हुए कहा था कि जीतन राम मांझी पर जुल्म हुआ तो मैं बेचैन हो गया। एक गरीब के बेटे की थाली खींच ली लेकिन जब एक महादलित के बेटे का सब कुछ छीन लिया तब मुझे लगा कि शायद उनके डीएनए में ही गड़बड़ है।

यूपी में कब्रिस्तान और श्मशान 
यूपी: बिहार के बाद यूपी में चुनाव हुए। आचार संहिता से पहले मोदी ने छह बड़ी रैलियां कीं। चुनाव के एलान के बाद 24 रैलियां कीं। यूपी में सात फेज में चुनाव हुए थे। इस लिहाज से मोदी ने हर फेज में 3 से 4 रैलियां की। नतीजा पार्टी के पक्ष में आया। 403 में से 325 सीटें जीत ली। वहीं, राहुल गांधी ने 35 रैलियां की। अखिलेश यादव के साथ 7 रोड शो भी किए।
थीम: पोलराइजेशन की पॉलिसी अपनाई। मोदी ने चुनावी सभा में कहा कि गांव में अगर कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए, अगर रमजान में बिजली रहती है तो दिवाली में भी बिजली आनी चाहिए।

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