मप्र राज्य महिला आयोग में रिश्वतखोरी!, अध्यक्ष का पीए करता है सेटिंग ? | mp news

Saturday, December 23, 2017

भोपाल। मप्र राज्य महिला आयोग में ज्यादातर महिलाएं तब पहुंचतीं हैं जब पुलिस से उन्हे न्याय नहीं मिलता। उम्मीद होती है कि यहां बात सुनी जाएगी। समझी जाएगी और न्याय दिलाया जाएगा। पुलिस जैसे घटिया व्यवहार और रिश्वतखोरी का सामना नहीं करना होगा लेकिन मप्र राज्य महिला आयोग में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि आयोग की अध्यक्ष लता वानखेड़े ने आरोप लगाने वाले को ही पुलिस के हवाले कर दिया और शासकीय कार्य में बाधा का आरोप लगा डाला। 

महिला आयोग में आयोजित दो दिवसीय बेंच में शुक्रवार को एक विवाद हुआ। एक महिला का बेटा चिल्ला रहा था। वो अपनी बात रखना चाहता था लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। महिला आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस को बुलाया और शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाकर उसे थाने भिजवा दिया। श्यामला हिल्स थाने में उसे हिरासत में रखा गया और फिर बिना एफआईआर के छोड़ दिया गया। पता चला है कि यह झगड़ा अध्यक्ष लता वानखेड़े के पीए प्रवीण साहू द्वारा 5 हजार रुपए लेकर फाइल क्लोज किए जाने के आरोप को लेकर बढ़ा था। 
फरियादी अनुराधा मेहता के बेटे आयुष मेहता का आरोप था कि प्रवीण नहीं चाहते थे कि उनकी सुनवाई हो। इसलिए वे हर बार उन्हेंं भगा देते थे। शुक्रवार को भी उन्हे और मां को पीए प्रवीण साहू ने फिर सुनवाई कक्ष से बाहर निकाल दिया था, जिसका उन्होंने विरोध किया। वे समझाने गए तो उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। वहीं साहू का कहना था कि वे मां-बेटे को नहीं जानते हैं। उसने रुपया लेने का आरोप लगाया था जिसकी वजह से उन्हें गुस्सा गया। इधर, अध्यक्ष का कहना है कि आयोग के खिलाफ जो भी आरोप लगाए हैं, वे गलत हैं। आवेदक को कोई गलतफहमी हुई है। 

देवर के खिलाफ शिकायत लेकर गई थी आयोग 
अनुराधा की शिकायत थी कि पति स्व. सुबोध मेहता और देवर स्मित ने रायल मार्केट में विकलांग कोटे के तहत ममता गैस एजेंसी खोली थी। चूंकि स्मित विकलांग हैं, इसलिए एजेंसी मिल गई। पति की मौत के बाद देवर ने बिजनेस कब्जे में ले लिया। एजेंसी में पति के शेयर भी उन्हें नहीं दे रहे हैं। जिसकी वजह से उन्हें आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ा रहा है। यही नहीं, देवर उन्हें कई तरह से प्रताड़ित कर रहा है। 

बिना सुने बंद कर दी थी आयोग ने फाइल 
नेहरूनगर निवासी आयुष के मुताबिक मां ने 14 सितंबर 2017 को महिला आयोग में चाचा के खिलाफ शिकायत की थी। इस पर आयोग में फाइल तैयार हुई थी। मां को नंवबर में हुई बेंच में बुलाया गया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्हें यह कहकर वापस कर दिया गया कि अनावेदक स्मित मेहता देश के बाहर हैं। बाद में पता चला कि उन्हें सुने बिना ही फाइल क्लोज कर दी गई। इसकी शिकायत उन्होंने अध्यक्ष से की, जिस पर उन्होंने फिर से आवेदन करने को कहा। उन्होंने 31 अक्टूबर को फिर आवेदन दिया। सुनवाई के लिए वे फिर आए थे। उन्हें और उनकी मां को चार बुलाया जा चुका है। 

स्थिति स्पष्ट करें लता वानखेड़े
इस मामले में महिला आयोग की अध्यक्ष लता वानखेड़े को चाहिए कि प्रकरण से जुड़ी पूरी स्थिति स्पष्ट करें। क्यों बिना सुनवाई के उनकी फाइल क्लोज कर दी गई। क्यों उन्होंने पुरानी फाइल खोलने के बजाए नए सिरे से आवेदन करने को कहा। क्यों बार बार मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है। सवाल यह भी है कि क्या केवल यही मामला है या ऐसे ही कई और भी मामले हैं। पीए प्रवीण साहू पर इतना विश्वास क्यों, यदि शिकायत सामने आई है तो जांच होनी चाहिए। 

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