केजरीवाल में अब भी संभावनाएं तलाश रहा है इंडिया: अमेरिकी सर्वे | ARVIND KEJRIWAL POPULARITY

Thursday, November 16, 2017

अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे के नतीजे बताते हैं कि देश की उम्मीदों का एकमात्र केंद्र बने लोकपाल आंदोलन से राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल में देश की जनता अब भी संभावनाएं तलाश रही है। बता दें कि भाजपा ने केजरीवाल का राजनैतिक बहिष्कार करवाने की हर संभव कोशिश की है। यहां तक कि इसके लिए भाजपा के दिग्गज नेताओं ने मर्यादाओं की सीमाएं भी तोड़ीं। केजरीवाल को हर मामले में फेल प्रमाणित किया गया और यह साबित किया गया कि केजरीवाल राजनीति के लायक ही नहीं है। 

आम आदमी पार्टी की अंतर्कलह भी किसी से छिपी नहीं है। दिल्ली में सरकार बनाने के अलावा केजरीवाल की पार्टी कुछ खास नहीं कर पाई। रातों रात देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने का सपना भी चूर चूर होकर बिखर गया। हालात यह हैं कि अब दिल्ली भी संभाली नहीं जा रही। केजरीवाल सरकार अपने अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ रही है और ज्यादातर बिफलताओं का दोषी उपराज्यपाल को बताती है। कहा यह भी जाता है कि भाजपा ने उपराज्यपाल के माध्यम से केजरीवाल को तंग करने का काम किया। इस सबके बाबजूद सर्वे में अरविंद केजरीवाल भारत के चौथे सबसे लोकप्रिय नेता बताए गए हैं। मोदी और राहुल के बाद सोनिया गांधी का ग्राफ गिर रहा है जबकि केजरीवाल भी रेस में हैं। 

अमेरिकी थिंक टैंक प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा करवाए गए सर्वे के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति में अब भी सबसे लोकप्रिय हस्ती हैं। इस सर्वेक्षण में करीब 2,464 लोगों को शामिल किया गया था। इस साल 21 फरवरी से 10 मार्च के बीच किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 88 प्रतिशत लोगों ने मोदी को सबसे लोकप्रिय हस्ती माना। इस सूची में हालांकि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी 58 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर काबिज होने में सफल रहे।

भारतीय राजनीति में सबसे लोकप्रिय हस्तियों की सूची में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (57 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (39 प्रतिशत) चौथे  स्थान पर रहे।

प्यू रिसर्च ने अपने इस सर्वे रिपोर्ट में कहा है, "जनता द्वारा मोदी का सकारात्मक आकलन भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती संतुष्टि से प्रेरित है। हर 10 में से 8 लोगों ने कहा कि आर्थिक दशाएं अच्छी हैं। ऐसा महसूस करने वाले लोगों में 2014 के चुनाव के ठीक पहले से 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्यू रिसर्च के इस सर्वे में अर्थव्यवस्था को बहुत अच्छा (30 प्रतिशत) बताने वाले वयस्कों के आंकड़े में पिछले तीन साल में तीन गुना वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "कुल मिलाकर हर 10 में से 7 भारतीय देश में चल रही चीजों को लेकर संतुष्ट हैं। भारत की दशा को लेकर सकारात्मक आकलन में 2014 से करीब दोगुनी वृद्धि हुई है।

दक्षिणी राज्यों में भी मोदी का दबदबा
सर्वेक्षण के अनुसार अपने गढ़ गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों में भी मोदी सबसे लोकप्रिय राजनीतिक हस्ती बने हुए हैं। इन राज्यों में दस में से कम से कम नौ लोगों ने प्रधानमंत्री को लेकर सकारात्मक रूख व्यक्त किया। इसी तरह पूर्वोत्तर राज्यों बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तथा दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में हर 10 में से 8 से ज्यादा लोगों का ऐसा ही मानना रहा। सर्वेक्षण के अनुसार, 2015 के बाद से मोदी की लोकप्रियता उत्तर भारत में अपेक्षाकृत वैसी ही बनी हुई है, जबकि पश्चिम एवं दक्षिण भारत में इसमें वृद्धि देखने को मिली है। हालांकि पूर्वी भारत के राज्यों में जरूर PM मोदी की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिका पर भरोसा नहीं करते भारतीय 
इस सर्वे की मानें तो भारतीयों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपेक्षा मोदी के प्रति कहीं अधिक सकारात्मकता देखी गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, अमेरिका को लेकर सकारात्मक रुख रखने वाले भारतीयों की संख्या में कमी आई है। 2015 में जहां यह संख्या 70 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर केवल 49 प्रतिशत रह गई है। केवल 40 प्रतिशत लोगों ने वैश्विक मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सही काम करने पर भरोसा जताया, जबकि 2015 में उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा को लेकर 74 प्रतिशत भारतीयों ने सकारात्मक राय दी। 

चीन से नफरत करते हैं 74 प्रतिशत भारतीय
चीन को लेकर भी ऐसा ही रहा। 2015 में चीन के प्रति सकारात्मक राय रखने वाले भारतीयों का आंकड़ा 41 प्रतिशत था, जो 2017 में घटकर 26 प्रतिशत रह गया है। गौरतलब है कि सर्वेक्षण डोकलाम में हुए टकराव से पहले किया गया था।

भड़काऊ बयान और भीड़ के बावजूद देश में साम्प्रदायिक तनाव नहीं
विपक्ष लगातार नोटबंदी और GST को चुनावी मुद्द बनाए हुए हैं और इसे आम नागरिकों को परेशान करने वाला फैसला साबित करने में काफी हद तक सफल भी रही है लेकिन प्यू रिसर्च के सर्वे में इसके उलट ही बात सामने आई है। प्यू रिसर्च ने अपने सर्वे रिपोर्ट में कहा है, "पिछले साल नवंबर में उच्च मूल्य वाले बैंक नोट को चलन से बाहर करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले के बावजूद आधी से भी कम भारतीय आबादी नकदी की उपलब्धता की कमी को एक बड़ा समस्या मानती है। इतना ही नहीं सर्वेक्षण के अनुसार समय समय पर हुई धार्मिक हिंसा के बावजूद अपेक्षाकृत कम ही भारतीय सांप्रदायिक तनाव को बड़ा मुद्दा मानते।

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