BHOPAL: घोटालेबाज कारोबारियों ने प्रदेश टुडे अखबार को धमकाया

Updesh Awasthee
भोपाल। देश में इन दिनों काफी कुछ बदल रहा है। घोटालेबाज अब छुपकर भागते या अपने कर्मों में सुधार नहीं करते बल्कि उनके घोटालों को उजागर करने वालों के खिलाफ हमलावर हो जाते हैं। चाहे वो बालाघाट के पत्रकार संदीप कोठारी हत्याकांड हो या फिर व्यापमं घोटाले की छानबीन कर रहे आजतक के टीवी पत्रकार अक्षय सिंह की संदिग्ध मौत। अब भोपाल में भी ऐसा ही कुछ पक रहा है। आरोप है कि घोटालेबाज आॅटो मोबाइल डीलर्स द्वारा भोपाल के सबसे लोकप्रिय सांध्य दैनिक PRADESH TODAY को सरेआम धमकाया है। 

मध्यप्रदेश के सबसे बड़े हिंदी अखबार दैनिक भास्कर में मध्यप्रदेश स्टेट आॅटो मोबाइल एसोसिएशन की तरफ से एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराई गई है। यह आम सूचना विधिसंगत कम धमकी ज्यादा लग रही है। सूचना में एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि प्रदेश टुडे ने उनके खिलाफ फर्जी खबरों का प्रकाशन किया अत: उसके सदस्य प्रदेश टुडे को विज्ञापन नहीं देंगे। एसोसिएशन ने लिखा है कि वो प्रदेश टुडे के खिलाफ भारत प्रे​स परिषद में शिकायत करने जा रहे हैं। 

नोटिस की जरूरत ही नहीं थी
यह नोटिस शुरू से अंत तक अनुपयोगी एवं आधारहीन है। इसकी जरूरत ही नहीं थी। एसोसिएशन को लगता है कि उसके खिलाफ कोई गलत खबर प्रकाशित हुई है तो प्रेस कांफ्रेंस बुलाए और अपना पक्ष रखे। हर रोज लोग मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखते हैं। विज्ञापन देना या ना देना किसी भी कारोबारी का व्यक्तिगत निर्णय होता है। एसोसिएशन इस तरह के फैसले करने के लिए अधिकृत नहीं है। एसोसिएशन ने खुद को खाप पंचायत की तरह प्रस्तुत कर दिया है। भारत प्रेस परिषद में हर रोज सैंकड़ों शिकायतें की जातीं हैं। परिषद सुनवाई योग्य पाती है तो नोटिस जारी करके पक्षकारों को बुलाया जाता है। मीडिया संस्थान बाध्य होते हैं कि वो परिषद के बुलाने पर उपस्थित हों। शिकायत से पहले या बाद में किसी भी प्रकार की आम सूचना की आवश्यकता ही नहीं होती। कुल मिलाकर इसे एक गैरकानूनी नोटिस कहा जा सकता है। 

कहीं एसोसिएशन ही तो फर्जी नहीं
प्रकाशित हुए नोटिस में 'मध्यप्रदेश स्टेट आटो मोबाइल एसोसिएशन' का जिक्र किया गया है। भोपाल समाचार ने इस एसोसिएशन के बारे में विस्तृत जानकारी पता लगाने की कोशिश की ताकि एसोसिएशन के पदाधिकारियों से इस संदर्भ में उनका पक्ष जाना जा सके परंतु इंटरनेट पर इस नाम का कहीं कोई जिक्र तक नहीं है। आज का युग इंटरनेट का युग है। कोई भी संगठन जैसे ही गठित होता है उसके सदस्य सोशल मीडिया पर उसके बारे में जानकारी साझा करते हैं। भोपाल के आॅटो मोबाइल कारोबारियों का कोई संगठन बैठक या कार्यक्रम आयोजित करते और किसी भी बेवसाइट पर उसकी खबर प्रकाशित ना हो, असंभव है। परंतु 'मध्यप्रदेश स्टेट आटो मोबाइल एसोसिएशन' की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। यहां तक कि फेसबुक पर M.P. STATE AUTOMOBILE ASSOCIATION का भी कभी किसी ने कोई जिक्र नहीं किया। क्या यह संदेह नहीं किया जाना चाहिए कि यह एक फर्जी एसोसिएशन है। यदि यह फर्जी नहीं है तो अपनी स्थापना एवं पंजीयन संबंधी सभी दस्तावेजों समेत मीडिया से सीधे मुलाकात करे और अपना पक्ष रखे। 
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