BHOPAL एनकाउंटर: पुलिस कार्रवाई को क्लीनचिट, जेल प्रशासन दोषी

भोपाल। पिछले साल दीपावली की रात हुए जेल ब्रेक एवं 8 सिमी कार्यकर्ताओं के एनकाउंटर मामले में गठित की गई ज्यूडिशियल इन्क्वारी की रिपोर्ट आ गई है। फिलहाल यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन सूत्र बताते हैं कि इसमें पुलिस द्वारा की गई एनकाउंटर की कार्रवाई को सही बताया गया है जबकि जेल ब्रेक के लिए जेल प्रशासन को दोषी माना गया है। सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसके पांडे ने 9 महीने के बाद एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जनरल एडमिनिस्ट्रेशन प्रभांशु कमल को 12 पेज की ज्यूडिशियल इन्क्वायरी की रिपोर्ट के साथ सैकड़ों पेज के एनेक्सचर सौंपे हैं। रिपोर्ट में जेल और पुलिस विभाग को मर्ज करने की भी सिफारिश की गई है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। दिसंबर 2017 में प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखेगी। इसके बाद ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

क्या था घटनाक्रम
भोपाल की सेंट्रल जेल से 30-31 अक्टूबर की दरमियानी रात 8 कैदी भागे थे। जिन्हे शहर के बाहर पहाड़ी पर घेरकर पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया गया था। भागने वालों में अहमद रमजान खान, जाकिर हुसैन, शेख मेहबूब, मोहम्मद सालिक, मुजीब शेख, अकील खिलजी, खालिद अहमद और मजीद नागौरी शामिल थे, जो सभी एनकाउंटर में मारे गए। भागने से पहले बदमाशों ने जेल प्रहरी रमाशंकर की हत्या कर दी थी। इस मामले में कैदियों की फरारी और एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे थे। देश भर में यह मामला बहस का विषय बन गया था। चीफ मिनिस्टर शिवराज सिंह चौहान ने 7 नवंबर 2016 को जस्टिस पांडे की अध्यक्षता में 3 माह के लिए सिंगल मेंबर की ज्यूडिशियल इन्क्वारी गठित की थी। इसका समय 9 माह तक बढ़ाया गया।

सिमी कार्यकर्ताओं की फरारी के लए जेल प्रबंधन दोषी
कमीशन ने भोपाल जेल में क्षमता से दोगुने कैदी बंद होने के संबंध में जेल प्रबंधन द्वारा लिखे गए पत्रों को गंभीरता से न लेना भी लापरवाही बताया।
कमीशन ने यह भी कहा है कि कैदियों पर नजर रखने के लिए जेल में 42 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन इसमें सिमी के आतंकियों की निगरानी के लिए लगे चारों सीसीटी कैमरे खराब पाए गए। जो घटना से डेढ़ महिने पहले से बंद थे। 
30-31 अक्टूबर 2016 की रात भोपाल सेंट्रल जेल में 70 की बजाए सिर्फ 40 स्टाफ ड्यूटी पर थे। इनमें से भी कई लोग दिवाली मना रहे थे ये बात जेल के ज्यादातर कैदियों को पता थी।
खबर मिलने पर भी बाकी सुरक्षा गार्ड ने अलार्म या सिटी बजा कर बाकी को अलर्ट नहीं करने पर जेल प्रबंधन की लापरवाही बताई है।
ज्यूडिशियल इन्क्वायरी में हालात और परिस्थिति का हवाला देते हुए जेल ब्रेक करके भागे 8 सिमी आतंकियों के एनकांउटर को सही ठहराया है।
कमीशन ने ग्रामीणों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि फरार हुए सिमी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मनीखेड़ी गांव के आसपास घेरकर उन्हें सरेंडर करने को कहा था, लेकिन आतंकियों ने पुलिस पर गोलीबारी करना शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में वो मारे गए। 
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