खबर का असर: DR. SANDHYA NEMA सस्पेंड, गर्भस्थ शिशु की हत्या का आरोप

Saturday, July 1, 2017

भोपाल। बैतूल के सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला के प्रसव हेतु आॅपरेशन की पूरी तैयारियां कर ली गईं थीं परंतु ठीक 10 मिनट पहले डॉ संध्या नेमा आईं और आॅपरेशन रुकवा दिया। डॉ नेमा की इस हरकत के कारण शिशु की गर्भ में ही मौत हो गई। दूसरे दिन जब आॅपरेशन किया गया तो शिश मृत अवस्था में निकला। इस मामले को लोकल मीडिया के अलावा भोपाल के कुछ प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी उठाया था। भोपाल समाचार ने भी 15 जून को प्रमुखता से प्रकाशित किया और खबर का असर हुआ। मप्र शासन ने जांच में दोषी पाए जाने के बाद महिला डॉक्टर संध्या नेमा को सस्पेंड कर दिया है। 

मुलताई तहसील के ग्राम सांईखेड़ा निवासी शेख रसीद की पत्नी नाजिमा को परिजनों ने प्रसव पीड़ा होने पर 14 जून को दोपहर 12.37 बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल में पदस्थ महिला चिकित्सक संध्या नेमा ने उसका परीक्षण करने के बाद सब कुछ सामान्य होने की जानकारी परिजनों को दे दी। शाम को जब महिला की हालत गंभीर होने लगी तब परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक प्रतिभा रघुवंशी से आपरेशन करने की गुहार लगाई। महिला का आपरेशन करने की तैयारी कर ली गई और जब उसे आपरेशन कक्ष लाया गया तब अचानक डॉ. संध्या नेमा वहां पहुंच गईं और उन्होंने सुबह ऑपरेशन करने का फरमान सुना दिया। 

इसे लेकर दोनों चिकित्सकों के बीच कहासुनी भी हुई। 15 जून की सुबह जब महिला का आपरेशन किया गया तब तक गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और इसकी शिकायत कलेक्टर और सीएमएचओ से की गई। सीएमएचओ ने टीम बनाकर जांच कराई और प्रतिवेदन शासन को भेजा था। इसी आधार पर अपर संचालक स्वास्थ्य शैलबाला मार्टिन ने डॉ. संध्या नेमा को दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश जारी किया है।

शादी के पांच साल बाद भरी थी गोद
महिला चिकित्सक की हठधर्मिता के कारण अपने बच्चे को खोने वाली पीड़िता नाजिमा शेख ने बताया कि उनकी शादी के पांच साल हो गए थे लेकिन संतान नहीं थी। यह उनका पहला ही बच्चा था जिसे महिला चिकित्सक ने छीन लिया।

भोपाल किया अटैच
अपर संचालक स्वास्थ्य शैलबाला मार्टिन ने डॉ. संध्या नेमा को सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9 (1) के तहत जनहित में तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। निलंबन काल में उन्हें क्षेत्रीय संचालक कार्यालय भोपाल अटैच किया गया है।

प्रमुख सचिव ने मामले को गंभीरता से लिया
आपरेशन में देरी के कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत के मामले की जानकारी पिछले दिनों बैतूल पहुंची प्रमुख सचिव स्वास्थ्य गौरीसिंह को परिजनों ने दी थी। परिजनों का विलाप देखकर प्रमुख सचिव भावुक हो गईं और उन्होंने कार्रवाई करने का पूरा भरोसा दिलाया था।

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