मप्र विद्युत वितरण कंपनियों में घोटाला, 32 करोड़ का खुलासा, जांच जारी

Saturday, July 22, 2017

भोपाल। किसानों को नोटिस देकर उनके मकान और घर की कुर्की करने वाले बिजली कम्पनियों के अफसरों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर करोड़ों का गोलमाल किया है। मध्य क्षेत्र व पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों के द्वारा सिर्फ वर्क आर्डर जारी कर काम पूरा हुए बिना भुगतान किए जाने के मामले में अब सरकार बैकफुट पर है। अफसरों की मिलीभगत से किए गए इस काम में 32 करोड़ रुपए का भुगतान काम पूर्ण हुए बगैर कर दिए जाने का खुलासा हुआ है जिसके बाद इस राशि की वसूली बैंक गारंटी और पेनाल्टी लगाकर की गई है।

मुरैना में बाहर से खरीद लिया सामान
मुरैना जिले में नवम्बर 2016 के बाद 3 व 5 प्रतिशत सुपरवीजन के कामों के लिए बिजली कम्पनी द्वारा तय वेंडरों से सामान की खरीदी नहीं की गई है। यह मामला सत्यपाल सिंह सिकरवार ने विधानसभा में उठाया जिसके जवाब में मंत्री जैन ने स्वीकार किया कि मटेरियल अनुमोदित वेंडरों से नहीं खरीदा गया है। इसके लिए उप महाप्रबंधक, प्रबंधक और सहायक प्रबंधक जिम्मेदार हैं। इस मामले में पांच जुलाई को जांच के आदेश जारी किए गए हैं तथा मुरैना एसटीसी संभाग के 35 ठेकेदारों को नोटिस भेजे गए हैं। मंत्री ने बताया कि 3 प्रतिशत सुपरवीजन के 670 कामों में से 166 के एस्टीमेट स्वीकृत किए गए हैं।

ऐसे चला अफसरों, ठेकेदारों का गठजोड़
रतलाम व मंदसौर जिले में एक जनवरी 15 के बाद 11 केवी और 33 केवी फीडरों के नवीनीकरण रखरखाव के लिए पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा ठेके दिए गए। रतलाम जिले के काम में रतलाम के अलावा देवास और शाजापुर के भी काम थे। इसका काम मेसर्स आनंद इलेक्ट्रिकल्स दिल्ली को दिया गया। मंदसौर जिले में मेसर्स नीलशिखा इंफ्रा लिमिटेड इंदौर को उज्जैन, आगर, नीमच जिलों के साथ काम सौंपा गया। मेसर्स आनंद इलेक्ट्रिकल्स को पूरे काम की बदौलत अफसरों और ठेकेदार की मिलीभगत के चलते 12.78 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया पर कम्पनी ने काम पूरा नहीं किया। 

विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने बताया कि इस स्थिति में बैंक गारंटी की 8.39 करोड़ रुपए की राशि काटकर देयकों की वसूली की गई। इस पर कंपनी को 4.39 करोड़ रुपए का भुगतान ही किया गया। इसी तरह नीलशिखा कम्पनी को 16.17 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया था। इस कम्पनी ने भी काम पूरे नहीं किए और रतलाम में 11 केवी के 28 व 33 केवी के किसी भी फीडर का काम पूरा नहीं किया। इस पर कंपनी का ठेका समाप्त कर दिया गया। मंदसौर जिले में एक को छोड़कर बाकी काम हुए थे। 

एक अन्य सवाल विधायक राजेंद्र पांडेय ने उठाया जिसमें रतलाम जिले में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना व दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के काम पूरे नहीं होने की बात कही गई। इस मामले में मंत्री जैन ने कहा कि जिन कामों में देरी हुई है, उसमें मेसर्स श्रीराम स्विच गियर रतलाम के 38.26 लाख व 79.94 लाख तथा मेसर्स श्रीराम स्विच गियर सांगली के प्रोजेक्ट वाले 2.02 करोड़ रुपए की पेनाल्टी की राशि की कटौती की गई है। इन कामों के पूरे होने की समय सीमा मंत्री नहीं बता सके हैं।

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