25% से ज्यादा प्रसव ऑपरेशन करने वाली महिला डॉक्टर ब्लैक लिस्टेड हो जाएंगी

Updesh Awasthee
भोपाल। निजी या सरकारी अस्पताल में किसी डॉक्टर ने 25 फीसदी से ज्यादा प्रसव ऑपरेशन से कराए हैं तो वह ब्लैक लिस्टेड हो सकता है। लाइसेंस के निलंबन के साथ डॉक्टर को अयोग्य मानकर पांच वर्ष तक प्रसव के काम से दूर भी रखा जा सकता है। 20 से 25 फीसदी तक सीजेरियन कराने वाले डॉक्टरों पर 5 लाख तक जुर्माना लगाया जा सकता है। राज्य महिला आयोग ने हाल ही में राज्य सरकार को यह अनुशंसा की है। आयोग ने पांच वर्षों में की गई नार्मल और सीजेरियन डिलीवरी के आंकड़े देखने के बाद यह सिफारिश की है। आयोग की अध्यक्ष लता वानखेड़े ने पद संभालने के बाद आयोग में छह सलाहकार समितियां बनाईं। इन्हीं में से समिति जो इस विषय पर काम कर रही थी, उसने अपना अध्ययन आयोग को दिया, जिसके बाद उसे शासन को भेजा गया। इस समिति के प्रमुख सलाहकार प्रमोद दुबे हैं।

सिजेरियन से पहले बताते हैं ये कारण
आयोग ने सिफारिशों में सख्त रूप से यह टिप्पणी की है कि डिलीवरी के समय डॉक्टर सामान्यत: यह कहते हैं कि बच्चे के गले में नाल दूसरे या तीसरे राउंड में कसी है, बच्चा पेट में उल्टा है, मां के पेट का पानी सूख गया है या नवजात ओवरवेट है। इससे अभिभावक डर जाते हैं, जबकि बरसों से ऐसे ही प्रसव हो रहे हैं।

क्यों दी ये सिफारिशें
आयोग के प्रमुख सलाहकार दुबे का मानना है कि डिलीवरी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। लेकिन डॉक्टरों ने इसे नियंत्रित कर दिया है। पहले जन्म की बधाई दी जाती थी। अब संशय से पूछा जाता है कि डिलीवरी सीजेरियन है या नाॅर्मल। यह बदलाव 40 वर्षों में आया है।

अभी सिर्फ फौरी काम करता था विभाग
स्वास्थ्य विभाग अभी डिलीवरी को लेकर फौरी कार्यवाही ही करता था। प्रभारी स्वास्थ्य आयुक्त वी किरण गोपाल का कहना है कि किसी प्रकरण में यह जानकारी आती है कि कोई अस्पताल लगातार सीजेरियन कर रहा है तो विभाग यह जानने की कोशिश करता है कि ऐसा क्यों हो रहा है? हम अस्पताल को सीजेरियन कम करने की सलाह देते हैं। जहां तक राज्य महिला आयोग की सिफारिशों का सवाल है तो वह आती हैं तो हम उसका अध्ययन करके काम करेंगे।

5 लाख तक का जुर्माना हो
15% सीजेरियन स्वीकार्य, लेकिन इससे अधिक नहीं।
15 से ज्यादा और 20 से कम सीजेरियन है तो चेतावनी।
20 से अधिक 25% से कम है तो 5 लाख रुपए तक दंड।
सीजेरियन डिलीवरी के आंकड़े अस्पतालों में प्रदर्शित करने होंगे, ताकि गर्भवती महिला जान सके कि वह किस चिकित्सक के हवाले है।
गर्भवती इससे यह चुन सकेगी कि किस डॉक्टर से वह इलाज कराए।
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आयोग ने यदि लाइसेंस कैंसल करने या कुछ अन्य बातें कहीं हैं तो वह अभी हमारे पास नहीं आईं। इस बारे में शासन कोई पहल करता है तो हम देखेंगे। 
डॉ. उल्का श्रीवास्तव, अध्यक्ष, मप्र मेडिकल काउंसिल
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