Loading...

वनविभाग के अधिकारी अत्याचार करें तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो: मंत्री गोपाल भार्गव | SAGAR

भोपाल। सागर में इन दिनों वनविभाग और मंत्री गोपाल भार्गव के बीच खुली जंग शुरू हो गई है। वनविभाग के अधिकारियों ने एकराय होकर ऐलान किया है कि वो अपनी ड्यूटी नहीं करेंगे, क्योंकि मंत्री गोपाल भार्गव ने ग्रामीणों को भड़का दिया है। मंत्री ने नौरादेही अभयारण्य के ग्रामीणों से कहा है कि यदि वन विभाग के अधिकारी अत्याचार करें तो उनके हाथ-पैर तोड़ दो। मंत्री का संरक्षण मिलने के बाद ग्रामीण उग्र हो गए हैं। वो खुलेआम वनविभाग के अधिकारियों को धमकी दे रहे हैं। अब तक 2 हमले भी कर चुके हैं। अधिकारियों ने लिखकर दिया है कि यदि उनके क्षेत्र में कोई वन अपराध होता है या हमारे साथ कोई मारपीट की घटना होती है तो इसके लिए मंत्री गोपाल भार्गव जिम्मेदार होंगे। इस मामले में मंत्री भार्गव का कहना है कि डीएफओ पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर इस तरह की अनर्गल शिकायतें करा रही हैं।

वनविभाग के अधिकारियों ने सीसीएफ और डीएफओ एक पत्र लिखा है। उप वनमंडल अधिकारी (एसडीओ) प्रताप सिंह, उप वन मंडल अधिकारी (एसडीओ) बरमान प्रदीप कुमार त्रिपाठी, मोहली रेंजर शंकरलाल भूरिया, सिंगपुर रेंजर ओपी श्रीवास्तव, डोंगरगांव रेंजर नारायण रेकवाल और नौरादेही रेंजर एमडी गवले के हस्ताक्षर इस पत्र पर हैं। पत्र में कहा गया है कि गत 26 मई अभयारण्य के अंदर बसे ग्राम मोहली में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री भार्गव ने ग्रामीणों को भड़काऊ और धमकी भरा भाषण दिया कि 'यह रहली विधानसभा क्षेत्र है। यहां के गरीब, मजदूर अपनी जीविका चलाने के लिए जंगलों से चिरोंजी, महुआ और अन्य वनोपज लाते हैं। उन पर रेंजर, एसडीओ और डीएफओ अत्याचार करता है तो उसके हाथ-पैर तोड़ दो। यहां यह सब नहीं चलेगा। गरीबों को भूखे रहने नहीं दिया जाएगा। आप पर अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए हम लड़ने को तैयार हैं।' पत्र में कहा गया है कि मंत्रीजी के भाषण के बाद अभयारण्य के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों में भय व्याप्त है और वे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में अक्षम हैं।

पत्र में इस भाषण के बाद वन अमले के साथ हुई तीन घटनाओं का जिक्र किया गया हैः-
27 मई को करीब 20 व्यक्तियों ने समूह बनाकर अवैध रूप से अभयारण्य में प्रवेश किया और तेंदूपत्ता तोड़ने का प्रयास किया। वन अमले ने रोका तो उन्होंने मंत्री भार्गव के कहे शब्द दोहराए। साथ ही यह चेतावनी देकर चले गए कि कल 50-60 लोग आएंगे, तब देखते हैं तुम लोग क्या कर लेते हो।

27 मई को रात में मुखबिर से सूचना मिली कि हिनौती बैरियर से पिकअप वाहन में बेलगूदा परिवहन होने वाला है। रात करीब 11 बजे 2 मोटर साइकिलों पर कुछ हथियारबंद लोग आए और बैरियर खोल दिया। रोकने पर गाली-गलौज करते हुए वन कर्मियों पर बंदूक तान दी और पिकअप वाहन को अभयारण्य से बाहर निकाल दिया। इसके बाद वे डराते-धमकाते हुए चले गए। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद रहली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

29 मई को वनग्राम बोमा के लोग निडर होकर अभयारण्य के अंदर दोपहर के समय लकड़ी काट रहे थे। वनकर्मी रामसेवक सेन ने लकड़ी काटने से मना किया तो ग्रामीणों ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसकी रिपोर्ट पुलिस चौकी बलेह में दर्ज कराई गई है।

हमले की दो घटनाएं हो गईं
मंत्रीजी ने क्षेत्र में जो बोला है, उसके बाद से वन अधिकारियों पर हमले हो रहे हैं। हमले की दो घटनाएं सामने आई हैं। आगे ऐसी और भी घटनाएं हो सकती हैं, लेकिन हम वन संपदा की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वन अधिकारियों ने शिकायती पत्र दिया है, जिसे सीसीएफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दिया है।
वासु कन्नौजिया, डीएफओ नौरादेही अभयारण्य

पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं DFO
हां, मैंने कहा था कि क्षेत्र के आदिवासियों पर अत्याचार नहीं होने देंगे, लेकिन ये शिकायतें पूर्वाग्रह से ग्रसित डीएफओ करवा रही हैं। जब मैं अशोकनगर का प्रभारी मंत्री था, उस समय ये वहां पदस्थ थीं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलीं तो मैंने वहां से उनका ट्रांसफर पन्ना करा दिया था। इसी खुन्नस में वे अनर्गल और तथ्यहीन शिकायतें करती रहती हैं।
गोपाल भार्गव, मंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास